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सृजन घोटाले में आया एक और भाजपा सांसद का नाम,बनवा रहे है भागलपुर में मॉल ! जानिए क्या है सृजन घोटाला

सृजन घोटाले में आया एक और भाजपा सांसद का नाम,बनवा रहे है भागलपुर में मॉल ! जानिए क्या है सृजन घोटाला
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सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड की पूर्व सचिव मनोरमा देवी की बहू और समिति की वर्तमान सचिव प्रिया कुमार, उनके पति और समिति के सलाहकार अमित कुमार पर धाेखाधड़ी के पांच केस कोतवाली (तिलकामांझी) में अलग-अलग तारीख में दर्ज किये गये हैं. इन दोनों को पांच केस का प्राथमिकी अभियुक्त बताते हुए एसएसपी मनोज कुमार ने क्षेत्रीय पासपोर्ट पदाधिकारी को पत्र लिखकर दोनों का पासपोर्ट जब्त कर उन्हें विदेश जाने से रोकने को कहा है. प्रिया कुमार और उनके पति अमित कुमार के विरुद्ध कोतवाली (तिलकामांझी) थाने में सात अगस्त को कांड संख्या 494/17, आठ अगस्त को कांड संख्या 499/17, आठ अगस्त को ही कांड संख्या 500/17, 10 अगस्त को कांड संख्या 505/17 और 11 अगस्त को कांड संख्या 508/17 दर्ज की गयी. इन सभी कांडों में दोनों के विरुद्ध आइपीसी की धारा 409/420/467/468/471/120बी/34 के तहत केस दर्ज किया गया है. इधर, शनिवार को इओयू के एसपी राशिद जमा सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचे. जहां पूछताछ में सिविल सर्जन/सीएमओ के खाते से प्रथम दृष्ट्या 40.75 लाख रुपये सृजन के खाते में ट्रांसफर किये जाने का मामला प्रकाश में आया. इसके बाद सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार ने तिलकामांझी थाने में फर्जी तरीके से सृजन के खाते में धनराशि जमा करने पर बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया.
सरकारी राशि की धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किये गये सभी सात लोगों को शनिवार को जेल भेज दिया गया. सभी को एसएसपी आवास से वाहन में बिठाकर शाम लगभग साढ़े पांच बजे कोर्ट ले जाया गया. वहां से सीजेएम के आवास पर जरूरी औपचारिकता पूरी कराये जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया. सभी पुरुष अभियुक्तों डीएम के स्टेनो प्रेम कुमार, नाजिर राकेश यादव और राकेश झा, सृजन के ऑडिटर एससी झा, बैंक कर्मी अजय पाण्डेय और बंशीधर को कैंप जेल भेजा गया जबकि सृजन की प्रबंधक सरिता झा को शहीद जुब्बा सहनी केन्द्रीय कारा परिसर में स्थित महिला मंडल कारा भेजा गया.


इधर बैंक ऑफ बड़ौदा के सेवानिवृत्त मैनेजर कहलगांव निवासी एके सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया. इस मामले में यह आठवीं गिरफ्तारी है. जेल भेजे गये बैंक कर्मी अजय पांडे के वाहन चालक विनोद सिंह से पिछले कई दिनों से पुलिस पूछताछ कर रही है. शनिवार को तीन नयी प्राथमिकी, 800 करोड़ को छूने वाला है आंकड़ा सरकारी राशि की धोखाधड़ी को लेकर शनिवार को कोतवाली (तिलकामांझी) में तीन प्राथमिकी दर्ज की गयी. एक प्राथमिकी डीआरडीए के निदेशक द्वारा दर्ज करायी गयी है जो 86 करोड़ 73 लाख 71 हजार 751 रुपये की धोखाधड़ी का है. इसके अलावा जिला कल्याण विभाग द्वारा प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है जो लगभग 80 करोड़ की धोखाधड़ी का है. सिविल सर्जन द्वारा इसी थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी जो 40 लाख 75 हजार की धोखाधड़ी का है. इस तरह सभी को जोड़ दिया जाये तो अभी तक की धोखाधड़ी का आंकड़ा 768 करोड़ पहुंच चुका है. इसमें और बढ़ोतरी की संभावना है. केस सात अगस्त को भी दर्ज हुए, पासपोर्ट जब्त करने के लिए 12 को क्यों लिखा जा रहा पिछले पांच दिनों से पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई की टीम सिर्फ यह कहती रही कि सरकारी राशि की धोखाधड़ी हुई है और इसमें शामिल लोगों से पूछताछ की जा रही. सात लोगों जेल भी भेजा गया. प्रिया कुमार और अमित कुमार पर सात अगस्त से ही केस दर्ज किये जा रहे थे तो इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गयी, यह एक सवाल है. सवाल यह है दोनों के पासपोर्ट जब्त करने को लेकर पासपोर्ट पदाधिकारी को 12 अगस्त को क्यों लिखा जा रहा जबकि सात अगस्त को पहला केस दर्ज होने के बाद भी ऐसा किया जा सकता था. इतने दिनों की मोहलत मिलने वे इसका फायदा उठा चुके होंगे और बाहर भी जा सकते हैं. सहरसा में भी 151 करोड़ का गड़बड़झाला सहरसा. सृजन विकास सहयोग समिति लिमिटेड भागलपुर की मिलीभगत से राशि हेराफेरी मामले की जांच कर जिला की चार सदस्यीय कमेटी ने रिपोर्ट जिलाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल को सौंप दी है. गठित चार सदस्यीय टीम के अध्यक्ष सह अपर समाहर्ता धीरेंद्र कुमार झा ने बताया कि टीम के सदस्य डीआरडीए निदेशक रंजीत कुमार, एलडीएम आरके चौधरी, ट्रेजरी ऑफिसर राज कुमार व प्रधान सहायक कुंदन कुमार सिन्हा के साथ हेराफेरी मामले की जांच के दौरान पूरब बाजार स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा जाकर बैंक मैनेजर से जानकारी ली. जानकारी के अनुसार 2015 में 151 करोड़ राशि सृजन के खाते में गयी, लेकिन यह राशि पुन: विशेष भू-अर्जन कार्यालय के खाते में लौट गयी.



अाधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2012-13 में सृजन के खाते में विशेष भू-अर्जन कार्यालय की 151 करोड़ की राशि ट्रांसफर की गयी थी जो वर्ष 2015 में विशेष भू-अर्जन कार्यालय के खाते में लौटी. इससे वापस हुई राशि के ब्याज की क्षति अवश्य हुई है. वहीं जिलाधिकारी ने जांच दल को सभी सरकारी खाते की जांच का निर्देश भी दिया था. इसकी जांच कर टीम ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी है. अब तक 10 प्रमुख लोगों का चला पता जिनके पास ट्रांसफर हुए सबसे ज्यादा पैसे पटना. भागलपुर से जुड़ा सृजन घोटाले का आकार बढ़ कर 750 करोड़ को पार कर गया है. जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है, एफआइआर और घोटाले में करोड़ों की संख्या जुटती जा रही है. अब तक हुई जांच में यह बात सामने आयी है कि सृजन के खाते में ट्रांसफर होने वाले सरकारी पैसे कैश और चेक के माध्यम से सफेदपोश, अधिकारी से लेकर व्यापारी के पास पहुंचते थे. दस ऐसे लोगों के नाम सामने आये हैं, जिनके पास सबसे ज्यादा पैसे गये हैं. हालांकि जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही इस सूची में नामों की संख्या बढ़ने की आशंका है. इसकी जद में कुछ पूर्व और वर्तमान आइएएस अधिकारी के भी आने की संभावना है. भाजपा के जिन तीन नेताओं का नाम अब तक सामने आया है. इसमें एक नेता रहने वाले तो भागलपुर के हैं, लेकिन वह सांसद झारखंड से हैं. इनका एक मॉल बन रहा है, इसमें जितने रुपये की फंडिंग हुई है, उसमें अधिकतर रुपये सृजन के एकाउंट से ही ट्रांसफर हुए हैं. भाजपा के ही एक अन्य कद्दावर नेता का भी नाम सामने आना तय माना जा रहा है. इनके पास सीधे तो नहीं, लेकिन इनके सगे-संबंधियों को पैसे मिले हैं. इनके अलावा भी पांच-छह अन्य नामचीन हस्तियां हैं, जिनके खिलाफ सबूत एकत्र किये जा रहे हैं. सृजन के 50 से ज्यादा बैंक खाते सामने आये हैं, जिसमें अभी तक महज 8-10 की ही जांच हुई है.



अन्य खातों के ट्रांजेक्शन की जांच करने पर कइयों के नाम उजागर होंगे. इओयू की टीम इस मामले में जांच कर रही है. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सृजन की जमीन-जायदाद देहरादून समेत अन्य शहरों में भी काफी बड़ी संख्या में है. इसका खुलासा भी जल्द होने जा रहा है. यह माना जा रहा है कि सृजन की पूर्व संचालिका स्वर्गीय मनोरमा देवी का मुंह बोले भाई पीके घोष को इससे सबसे ज्यादा फायदा मिला है. घोटाले से लाभान्वित होने वालों में वह प्रमुख है. तथाकथित सीए के रूप में जाने-जाना वाला घोष कभी छोटी-सी कपड़े की दुकान चलाता था. कुछ ही सालों में वह रीयल स्टेट के कारोबार की बदौलत करोड़ों का मालिक बना गया. इसकी 'अंग विहार' करके रीयल स्टेट की काफी बड़ी कंपनी है, जिसने कई अपार्टमेंट और अन्य चीजें बनवायी हैं. सूत्र यह भी बताते हैं कि इसमें कई फ्लैट नामी और सफेदपोश लोगों के हैं. अंग विहार कंपनी को खड़ा करने में सृजन का काफी बड़ा हाथ है. आइएएस अमिताभ वर्मा कभी थे इसके संरक्षक! जांच के क्रम में यह भी पता चला है कि सृजन के ताल्लुकात कई आइएएस अधिकारियों से भी रहे हैं. तत्कालीन भागलपुर डीएम अमिताभ वर्मा के कार्यकाल में सृजन एनजीओ को काफी मदद मिली थी. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वे इसके संरक्षक की भूमिका में थे. हालांकि अभी तक कहीं से भी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उनके कार्यकाल में सरकारी पैसे का लेन-देन सृजन के साथ हुआ है. इसके बाद भागलपुर में केपी रम्मैया डीएम बनकर आये. इन्होंने सृजन को अपना कार्यालय चलाने के लिए सरकारी जमीन और मकान 90 साल की लीज पर दे दी. वर्तमान में सृजन का कार्यालय इसी में चलता है. इनके अलावा कई तत्कालीन डीएम के कार्यकाल में सृजन की गतिविधि सरकारी कार्यक्रमों या कार्यों में काफी देखी गयी है. इस मामले की अभी व्यापक जांच चल रही है. कई चेक पर तत्कालीन डीएम के हस्ताक्षर यह बात सामने आ रही है कि चेक पर डीएम के फर्जी हस्ताक्षर करके सरकारी खाते से रुपये की निकासी होती थी.


परंतु इसमें कई संदिग्ध मामले भी सामने आये हैं. मसलन, कुछ डीएम ने अपने चेक बुक के सीरीज में 25 नंबर के चेक पर अपना फर्जी हस्ताक्षर होने की बात बता रहे हैं. जबकि, इसके आगे-पीछे के चेक पर उनके हस्ताक्षर एकदम सही हैं. इस तरह के कई मामले हैं, जिनमें इस तरह के अनेक उदाहरण हैं. फिलहाल इन मामलों की जांच चल रही है. जांच के दायरे में कई अधिकारियों का कार्यकाल शक के दायरे में आ सकता है. सरकारी राशि की हर माह जांच कर वित्त विभाग को देनी होगी जानकारी पटना. उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने राज्य के सभी प्रधान सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, प्रमंडलीय आयुक्त व जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि वे अपने कार्यालय के सभी बैंक खातों का अद्यतन बैंक स्टेटमेंट प्राप्त कर रोकड़ बही से उसका मिलान करा लें. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाये जाने पर दोषी व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी. सरकार ने यह कदम भागलपुर में सरकारी राशि के घोटाले के बाद उठाया है. इस संबंध में सभी विभागों को निर्देश दिया गया है. सभी डीएम को अविलंब ऐसी जांच कराकर प्रमाण पत्र जल्द ही मुख्यालय को भेजने का आदेश दिया गया है. साथ ही भविष्य में बैंक खातों में जमा सरकारी राशि की शुद्धता की जांच नियमित रूप से प्रत्येक माह कराकर वित्त विभाग को सूचित करने की सलाह दी गयी है.

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