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सुप्रीम कोर्ट में शांति भूषण की याचिका हुई नामंजूर, कहा- CJI हैं 'मास्टर ऑफ रोस्टर'

सुप्रीम कोर्ट में शांति भूषण की याचिका हुई नामंजूर, कहा- CJI हैं मास्टर ऑफ रोस्टर
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सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील शांति भूषण की रोस्टर से जुड़ी याचिका को नामंजूर कर दिया है. कोर्ट ने भूषण की याचिका को खारिज करते हुए कहा, इस बात पर कोई मतभेद नहीं है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) मास्टर ऑफ रोस्टर होते हैं और मामलों को विभिन्न पीठों को आवंटित करने का अधिकार उनके पास होता है. अदालत ने कहा, सीजेआई की भूमिका समकक्षों के बीच प्रमुख की होती है और उन पर मामलों को आवंटित करने का विशिष्ट दायित्व होता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सीजेआई, सबसे वरिष्ठ जज होने की वजह से अदालत के प्रशासन का नेतृत्व करने का अधिकार रखते हैं जिसमें मामलों का आवंटन करना भी शामिल है.



जस्टिस ए के सीकरी ने कहा, 'लोगों के मन में न्यायपालिका का क्षरण होना न्यायिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा है.' अदालत ने कहा कि कोई भी तंत्र पुख्ता नहीं होता और न्यायापालिका की कार्यप्रणाली में सुधार की हमेशा गुंजाइश होती है. 2 जजों वाली बेंच ने अलग-अलग लेकिन एक समान राय रखते हुए कहा कि चीफ जस्टिस के पास मामलों को आवंटित करने और बेंच को नामित करने का विशेषाधिकार है. जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने याचिका पर 27 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. तब अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि मामलों को आवंटित करने के अधिकारों को अन्य जजों को सौंपने का कोई भी प्रयास अव्यवस्था की स्थिति पैदा कर देगा.


शांति भूषण ने अपनी जनहित याचिका में आरोप लगाया कि 'मास्टर ऑफ रोस्टर' को एक 'अनियंत्रित और बेलगाम' विवेकाधिकार नहीं होने दिया जा सकता, जिसका इस्तेमाल चीफ जस्टिस एकपक्षीय तरीके से करते हैं और चुनिंदा जजों की पीठों को चुनते हैं या विशेष जजों को मामले सौंपते हैं. याचिका को इसी साल 12 जनवरी की सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों की उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि शीर्ष अदालत में हालात सही नहीं हैं. याचिका पर दलीलों के दौरान वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के जजों के बीच एकता पर जोर दिया था और कहा था कि मामलों को 5 सदस्यों के कॉलेजियम को आवंटित करने के अधिकार सौंपने की भूषण की याचिका से जजों के बीच विवाद पैदा हो सकता है कि कौन किस मामले में सुनवाई करेगा.

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