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कश्मीर में सरकार गिराने के पीछे भाजपा की रणनीति का यशवंत सिन्हा ने किया सनसनीखेज़ खुलासा

कश्मीर में सरकार गिराने के पीछे भाजपा की रणनीति का यशवंत सिन्हा ने किया सनसनीखेज़ खुलासा
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नई दिल्ली: भाजपा महासचिव राम माधव ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से समर्थन वापस लेकर सरकार गिराने के फैसले को उनके लिए हजम कर पाना आसान नहीं था। लेकिन यह फैसला राज्य और भारत के लोगों के व्यापक हित में है। राम माधव ने बुधवार को कहा कि इस गठबंधन को साकार करने वाले अहम लोगों में वह भी थे। समझौते के एजेंडा एग्रीमेंट को तैयार करने में पीडीपी नेता हसीब ड्रबू के साथ 40 दिनों तक चर्चा करते रहे थे। राम माधव ने कहा कि जब उन्हें गठबंधन टूटने की बात का पता चला तो उनके लिए इसे स्वीकार करना सहज नहीं था। दूसरी तरफ भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने एक बार फिर से मोदी सरकार पर हमला बोला है।


इस बार उन्होंने जम्मू-कश्मीर के बहाने अपनी ही पार्टी की सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने कहा कि महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद भाजपा इस मुद्दे का इस्तेमाल देश में सांप्रदायिकता फैलाने के लिए करेगी। यशवंत सिन्हा ने स्पष्ट किया कि बीजेपी-पीडीपी गठबंधन को टूटना ही था।बीजेपी के असंतुष्ट नेता यशवंत ने कहा कि केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के साथ ही अन्य चुनावों में भी इसको पुरजोर तरीके से उठाएगी। यशवंत सिन्हा ने कहा, 'इसमें कोई संदेह नहीं कि बीजेपी को जम्मू-कश्मीर के मसले पर सांप्रदायिकता और ध्रुवीकरण को हवा देने में मदद मिलेगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन को लेकर ज्यादा आशावान नहीं थे। उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही यह तया था कि गठबंधन को टूटना है। यशवंत सिन्हा ने कहा, 'गठबंधन बनने के साथ ही दोनों सहयोगी दल विपरीत दिशा में चलने लगे थे। बीजेपी को अपनी नीतियों का अनुसरण करना था तो पीडीपी को भी अपनी नीति पर चलना था।


इस सबके बीच राज्य के शासन-प्रशासन को नुकसान हुआ। इस गठबंधन को असफल होना ही था।जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने की वकालत: यशवंत सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा को भंग कर चुनाव कराने की वकालत की है। उन्होंने कहा, 'सभी दलों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वे सरकार नहीं बनाना चाहते हैं। ऐसे में जब मौजूदा विधानसभा सरकार देने में नाकाम है तो उसे भंग कर नए सिरे से चुनाव कराना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर जम्मू-कश्मीर की जनता को लगेगा कि भाजपा ने सिर्फ चुनावी लाभ के लिए उनका मोहरे के तौर पर इस्तेमाल किया। वहीँ जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटने को लेकर कांग्रेस इन दोनों पार्टियों पर लगातार हमला बोल रही है।पार्टी ने सवाल किया कि अगर इस 'अनैतिक गठबंधन' से अलग होने का फैसला भाजपा ने 'राष्ट्रहित में' किया है तो क्या पिछले करीब साढ़े तीन साल से वह 'राष्ट्रहित के खिलाफ' काम कर रही थी।कांग्रेस पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा और केंद्र सरकार ने 'कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत' को खत्म करने का काम किया है।


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं से कहा, 'मार्च 2015 में भाजपा और पीडीपी के बीच एक अनैतिक गठबंधन हुआ। चुनाव में दोनों ने एक दूसरे को खूब गोलियां दीं। पीडीपी पर कश्मीर के लोगों ने विश्वास किया और जम्मू में भाजपा पर विश्वास किया।उमर अब्दुल्ला की ओर से राज्य में मध्यावधि चुनाव की मांग किए जाने पर आजाद ने कहा कि पहले चुनाव के लिए माहौल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'पीडीपी ने कश्मीर के लोगों के साथ विश्वासघात किया, भाजपा ने जम्मू के लोगों के साथ विश्वासघात किया। केंद्र की सरकार ने राज्य और पूर देश के साथ विश्वासघात किया।'आजाद ने कहा कि इन लोगों ने जो 'पाप' किया है वो इससे मुक्त नहीं हो सकते।एक सवाल के जवाब में आजाद ने कहा,भाजपा के लोग कह रहे हैं कि इस गठबंधन से अलग होने का फैसला उन्होंने राष्ट्रहित में किया है। इस पर मेरा सवाल यह है कि क्या पिछले साढ़े तीन साल से वे राष्ट्रहित के खिलाफ काम कर रहे थे जब वे पीडीपी के साथ सरकार में थे?


आज़ाद ने कहा, ' चुनाव के समय नरेंद्र मोदी ने बड़ी बड़ी बातें की थीं। कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत की बात की थी। इन्होंने कश्मीरियत को खत्म किया, इंसानियत को दफन कर दिया। जम्हूरियत को नुकसान पहुंचाया।' उन्होंने कहा, 'कभी इतना संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया है। इतने जवान कभी इतने कम समय में नहीं मारे गए। बहुत सारे आम नागरिक मारे गए।…पहले आतंकवादी बनने वाले नौजवान कम पढ़े लिखे होते थे, लेकिन इनके समय बहुत पढ़े लिखे लोग आतंकवादी बन गए। इन्होंने ऐसा माहौल बनाया है।'

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