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पढ़िए ! क्या हैं शिवपाल सिंह यादव के सेक्युलर मोर्चा के मायने?

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के बागी नेता शिवपाल सिंह यादव द्वारा समाजवादी सेकुलर मोर्चा बनाने के एलान के बाद अब उत्तर प्रदेश में पार्टी के दो खेमे बन चुके हैं। हालाँकि समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने अभी पूरे मामले पर ख़ामोशी बनाये रखी है। मुलायम सिंह यादव अखिलेश के साथ रहेंगे या शिवपाल की नई पार्टी को सीचेंगे ये अभी साफ़ नहीं है। संभावना यह भी है कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव एक बार फिर अपने अनुज शिवपाल सिंह यादव को निराश करें। पिछले अनुभवों को देखा जाए तो शिवपाल काफी पहले से नई पार्टी बनाने की बात करते रहे हैं। नई पार्टी बनाने को लेकर वे खुद ही कई बार अपने बयान से कल्टी मार चुके हैं। शिवपाल सिंह यादव हर बार दावा करते हैं कि नेताजी (मुलायम) का साथ नहीं छोड़ेंगे। जबकि मुलायम सिंह यादव कहते हैं कि नई पार्टी के बारे में शिवपाल से उनकी कोई बात नहीं हुई। फिर इस बार देखना है कि नई पार्टी बनाने को लेकर शिवपाल सिंह का दावा कितना सटीक बैठता है।
मुलायम होंगे तो अमर सिंह नहीं होंगे:
शिवपाल सिंह यादव के नई पार्टी बनाने के दावे को मान भी लिया जाए तो उनकी पार्टी में या तो अमर सिंह और जया प्रदा रह सकते हैं या मुलायम सिंह यादव ही रह सकते हैं। मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह में अब छत्तीस का आंकड़ा है। इसलिए स्वाभाविक है कि दोनो लोग तो शिवपाल के साथ खड़े नहीं हो सकते। वहीँ बड़ा सवाल यह है कि यदि मुलायम सिंह यादव अपने भाई शिवपाल के साथ नई पार्टी का नेतृत्व करते हैं तो ऐसी स्थति में शिवपाल के करीबी मित्र अमर सिंह कहाँ जायेंगे ? क्या वे बीजेपी से डील कर चुके हैं ? अमर सिंह को समाजवादी पार्टी से निष्कासित किया जा चूका है। इतना ही नहीं विधानसभा चुनावो से पहले सपा में हुई जूतमपैजार के पीछे अमर सिंह को बड़ा विलेन बनाकर पेश किया गया। यहाँ तक कहा गया कि पूरी लड़ाई के सूत्रपात स्वयं अमर सिंह ही थे। इसलिए यदि शिवपाल सिंह यादव के समाजवादी सेकुलर मोर्चे में मुलायम मौजूद रहते हैं तो अमर सिंह के लिए वहां कोई स्थान नहीं रह जाता।
हो सकती है गठबंधन में अखिलेश को अलग थलग करने की कोशिश:
2019 के लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन होना तय माना जा रहा है। ऐसे में शिवपाल की पार्टी समाजवादी सेकुलर मोर्चा अखिलेश की समाजवादी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। जानकारों की माने तो शिवपाल यादव मतों में सेंधमारी अवश्य कर सकते हैं। इतना ही नहीं कई लोकसभा क्षेत्रो में शिवपाल अपने पुराने वफादार मुसलमानो को टिकिट देकर समाजवादी पार्टी के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं। जानकारों के अनुसार सपा के कई पूर्व विधायक तथा सपा से निष्कासित नेता शिवपाल सिंह यादव के करीबी माने जाते हैं। इनमे अलीगढ जनपद की कोल विधानसभा से दो बार के विधायक हाजी जमीरउल्लाह खान भी शामिल हैं। हालाँकि सपा से निष्कासन के बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी ज्वाइन कर ली है लेकिन कहा जा रहा है कि ऐसे बहुत से कद्दावर नेता हैं जिन्हे समाजवादी पार्टी से निकाला गया और वे दूसरी पार्टियों में भले ही चले गए होंगे लेकिन शिवपाल सिंह यदव से करीबी रिश्ते होने के कारण उन्हें वापस आने में देर नहीं लगेगी। फिलहाल शिवपाल की नई पार्टी को लेकर सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। देखना है कि मुलायम सिंह यादव अपने भाई शिवपाल के साथ रहते हैं या अपने बेटे अखिलेश के साथ ही बने रहेंगे।
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