Arundhati Roy Biography in Hindi | अरुंधती रॉय का जीवन परिचय

Arundhati Roy Biography in Hindi | अरुंधति राय अंग्रेजी की सुप्रसिद्ध लेखिका और समाजसेवी हैं। जिन्होंने कुछ फ़िल्मों में भी काम किया है। “द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स” के लिये बुकर पुरस्कार प्राप्त अरुंधति राय ने लेखन के अलावा नर्मदा बचाओ आंदोलन समेत भारत के दूसरे जनांदोलनों में भी हिस्सा लिया है। कश्मीर को लेकर उनके विवादास्पद बयानों के कारण वे पिछले कुछ समय से चर्चा में हैं।

Update: 2020-12-09 12:43 GMT

Arundhati Roy Biography in Hindi

Arundhati Roy Biography in Hindi | अरुंधती रॉय का जीवन परिचय

  • नाम अरुंधति राय
  • जन्म 24 नवम्बर 1961
  • जन्मस्थान शिलौंग, असम
  • पिता रंजीत रॉय
  • माता मेरी रॉय
  • पति जेरार्ड दा कुन्हा
  • पुत्री मिथवा
  • व्यवसाय लेखिका, अभिनेत्री
  • नागरिकता भारतीय

भारतीय लेखिका अरुंधती रॉय (Arundhati Roy Biography in Hindi)

Arundhati Roy Biography in Hindi | अरुंधति राय अंग्रेजी की सुप्रसिद्ध लेखिका और समाजसेवी हैं। जिन्होंने कुछ फ़िल्मों में भी काम किया है। "द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स" के लिये बुकर पुरस्कार प्राप्त अरुंधति राय ने लेखन के अलावा नर्मदा बचाओ आंदोलन समेत भारत के दूसरे जनांदोलनों में भी हिस्सा लिया है। कश्मीर को लेकर उनके विवादास्पद बयानों के कारण वे पिछले कुछ समय से चर्चा में हैं।

प्रारंभिक जीवन (Arundhati Roy Early Life)

अरुंधती रॉय का जन्म 24 नवम्बर 1961 को शिलोंग में हुआ था। उनके पिता का नाम रंजीत रॉय और उनकी माता का नाम मेरी रॉय था। वो एक क्रिस्चन महियल थी। इनका बचपन केरल में गुजरा। वह दो साल की थी, तभी उनके माता-पिता का तलाक हो गया और इसके बाद वह अपनी माँ और भाई के साथ केरला में रहने लगी। कुछ समय तक उनका परिवार मेरी रॉय के दादा के साथ तमिलनाडु के ऊटी में रहने लगा था। इसके बाद जब वह 5 साल की हो चुकी थी, तब उनका परिवार रहने के लिए वापिस केरला आ गया और वहाँ उनकी माँ ने एक स्कूल खोला।

शिक्षा (Arundhati Roy Education)

अरुंधती रॉय की प्रारंभिक शिक्षा कोट्टायम के कार्पस च्रिस्ती स्कूल से प्राप्त की और इसके बाद तमिलनाडु के निलगिरी में लोवेड़ाले की लॉरेंस स्कूल में वह पढने लगी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के स्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर से आर्किटेक्चर की पढाई पूरी की।


फिल्मी करियर (Arundhati Roy Filmy Career)

अरुंधती के दिल्ली वापिस आने के बाद उन्हें नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ अर्बन अफेयर्स में अच्छा पद मिला। 1984 में उनकी मुलाकात स्वतंत्र फिल्मनिर्माता प्रदीप कृष्ण से हुई, जिन्होंने अरुंधति को फिल्म मेसी साहिब में गड़ेरिया का किरदार दिया था। इसके बाद भारतीय स्वतंत्रता अभियान पर आधारित टेलीविज़न सीरीज में और दो फिल्म एनी और इलेक्ट्रिक मून में भी वे साथ में दिखे। इसके बाद फ़िल्मी दुनिया से मोहभंग कर अरुंधती बहुत सी जगह पर जॉब करने लगी और कुछ समय तक तो उन्होंने एरोबिक्स की क्लासेज भी ली।

इसके बाद 1997 में अपने नॉवेल दी गॉड ऑफ़ स्माल थिंग्स के प्रकाशन की सफलता के बाद उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली और वह रातों रात एक सेलिब्रिटी बन गईं। अरुंधति, प्रसिद्ध मीडिया पर्सनालिटी प्रन्नोय अरुंधति की बहन है। प्रन्नोय अरुंधति लीडिंग भारतीय टीवी मीडिया समूह NDTV के हेड है।

सामाजिक कार्य (Arundhati Roy Social Work)

इसके बाद अरुंधती ने बहुत से सामाजिक और पर्यावरणीय अभियानों में भाग लिया है। आम आदमी की तरफ से मानवों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ निडर होकर आवाज उठाने हिम्मत को देखकर उन्हें 2002 में लंनन कल्चरल फ्रीडम अवार्ड और 2004 में सिडनी पीस प्राइज और 2006 में साहित्य अकादमी अवार्ड से सम्मानित किया गया।

अरुंधती ने "दी गॉड ऑफ़ स्माल थिंग्स" के लिखने से पहले, अरुंधति टेलीविज़न नाटको और फिल्मो में छोटे-मोटे कम करती थी। 1988 में अरुंधति को बेस्ट स्क्रीनप्ले का राष्ट्रिय फिल्म अवार्ड भी मिला था। वैश्वीकरण विरोधी अभियान और USA की विदेश निति के आलोचकों की वह प्रवक्ता है। उन्होंने नुक्लेअर डील और उद्योगीकीकरण के लिए भारतीय राजनीती की भी आलोचना की है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नामनिर्देशन की भी आलोचना की थी और मोदी को उन्होंने "सबसे सैन्यवादी और आक्रमक" प्रधानमंत्री पद का उम्मेदवार बताया था। इसके बाद सामाजिक और भारत में धार्मिक असहिष्णुता के खिलाफ चले मुक़दमे में उन्होंने साहित्य अकादमी पुरस्कार को लौटा दिया था। | 

विवाद (Arundhati Roy Controversy)

अरुंधति शेखर कपूर की मशहूर फिल्म 'बैंडिट क्वीन' पर फूलन देवी के बारे में लिखे अपने लेख के कारण विवादों में भी शामिल हुईं, जिसमें उन्होंने शेखर कपूर पर यह आरोप लगाया था कि इस फिल्म में उन्होंने फूलन देवी के शोषण और उनके जीवन से संबंधित घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है।

वर्ष 2002 में अरुंधति को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अदालत का तिरस्कार करने का दोषी ठहराया गया था और साथ ही साथ उन्हें 2000 रुपये के जुर्माने के साथ-साथ एक दिन के कारावास की सजा भी सुनाई गई थी।

पुरस्कार (Arundhati Roy Awards)

  • 2002 में लंनन कल्चरल फ्रीडम अवार्ड
  • 2004 में सिडनी शांति पुरस्कार
  • 2006 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया
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