Jyotiba Phule Biography in Hindi | ज्योतिबा फुले का जीवन परिचय

Jyotiba Phule Biography in Hindi | ज्योतिबा फुले भारत के महान समाज सुधारक थे। जिन्होंने ना केवल माली समाज या दलित समाज बल्कि पुरे भारत में समाज सुधार का कार्य किया था। इन्होंने भारतीय समाज में फैली बहुत सी कुप्रथाओं के खिलाफ जमकर आवाज उठाई जैसे नारी शिक्षा, विधवा विवाह, किसानों के हितों के लिए समाज में बहुत संघर्ष किया।

Update: 2020-11-25 20:46 GMT

Jyotiba Phule Biography in Hindi | ज्योतिबा फुले का जीवन परिचय

Jyotiba Phule Biography in Hindi | ज्योतिबा फुले का जीवन परिचय

  • पूरा नाम महात्मा जोतिराव गोविंदराव फुले
  • जन्म 11 अप्रैल 1827
  • जन्मस्थान पुणे
  • पिता गोविंदराव फुले
  • माता विमला बाई
  • पत्नी सावित्रीबाई फुले
  • व्यवसाय सामाजिक कार्यकर्ता
  • नागरिकता भारतीय

सामाजिक कार्यकर्ता ज्योतिबा फुले (Jyotiba Phule Biography in Hindi) 

Jyotiba Phule Biography in Hindi | ज्योतिबा फुले भारत के महान समाज सुधारक थे। जिन्होंने ना केवल माली समाज या दलित समाज बल्कि पुरे भारत में समाज सुधार का कार्य किया था। इन्होंने भारतीय समाज में फैली बहुत सी कुप्रथाओं के खिलाफ जमकर आवाज उठाई जैसे नारी शिक्षा, विधवा विवाह, किसानों के हितों के लिए समाज में बहुत संघर्ष किया। अंग्रेजो के शाषन के दौरान जब ज्योतिबा फुले सहित कई समाज सुधारको जैसे राजा राम मोहन रॉय, स्वामी दयानंद सरस्वती और बाल गंगाधर तिलक ने देश की जनता में देशभक्ति की अलख जगाई थी।

प्रारंभिक जीवन (Jyotiba Phule Early Life)

ज्योतिबा फुले का जन्म 11अप्रैल 1827 को ब्रिटिश भारत के खानवाडी (पुणे) में हुआ था। इनकी माता का नाम चिमनाबाई और पिता का नाम गोविंदराव था। एक वर्ष की अवस्था में ही इनकी माता का स्वर्गवास हो गया। इसके बाद इनके पालन पोषण के लिए सगुणाबाई नामक एक दाई ने किया। इनको माता का प्रेम इसी महिला ने दिया।

शिक्षा (Jyotiba Phule Education)

इनका परिवार बेहद गरीब होने के बाद भी इनके पिता ज्योतिबा फुले को पढ़ाना चाहते थे। इस दौरान इनको जब बचपन में 7 साल की उम्र में स्कूल में पढ़ने भेजा गया तो समाज में बहुत ही ज्यादा जाति भेदभाव होने के कारण उन्हें भी भेदभाव को सामना करना पड़ा। और इस दौरान उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा।

ज्योतिबा फुले दिन में बगीचे का कार्य करते थे। और रात में उनकी माता उन्हें पढ़ाती थी। और उनकी पढ़ाई में लगाव को देखकर उनके पड़ोसी में रहते शिक्षक ने ज्योतिबा फुले का दाखिला एक अंग्रेजी स्कूल में करवा दिया। फिर ज्योतिबा फुले ने सबसे अच्छे अंक ला कर सभी को हैरान कर डाला।

निजी जीवन (Jyotiba Phule Married Life) 

इनका विवाह 1840 में साबित्री बाई फुले से हुआ। ये बाद में स्वयं एक प्रसिद्ध स्वयंसेवी महिला के रूप में सामने आयीं। स्त्री शिक्षा और दलितों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के अपने उद्देश्य में दोनों पति-पत्नी ने साथ मिलकर कार्य किया।

सामाजिक कार्य (Jyotiba Phule Social Work)

उन्होंने महसूस किया कि जातियों और पंथो पर बंटे इस देश का सुधार तभी संभव है जब लोगो की मानसिकता में सुधार होगा। उस समय समाज में वर्गभेद अपनी चरम सीमा पर था। स्त्री और दलित वर्ग की दशा अच्छी नहीं थी। उन्हें शिक्षा से वंचित रखा जाता था। ज्योतिबा को इस स्थिति पर बड़ा दुःख होता था।

उन्होंने स्त्री सुर दलितों की शिक्षा के लिए सामाजिक संघर्ष का बीड़ा उठाया। उनका मानना था कि माताएँ जो संस्कार बच्चो पर डालती हैं। उसी में उन बच्चो के भविष्य के बीज होते है। इसलिए लडकियों को शिक्षित करना आवश्यक है।

इन्होने दलितों महिलाओं के उत्थान के लिए अनेक कार्य किये। को इन्होंने महाराष्ट्र में "सत्यशोधक समाज" की स्थापना की। इन्होने समाज के सभी वर्गों के लिए शिक्षा प्रदान किये जाने की मुखालफत की। ये भारतीय समाज में प्रचलित जाति व्यवस्था के घोर विरोधी थे।

इन्होने समाज के जाति आधारित विभाजन का सदैव विरोध किया। इन्होंने जाति प्रथा को समाप्त करने के उद्देश्य से बिना पंडित के ही विवाह संस्कार प्रारंभ किया। इसके लिए बॉम्बे हाई कोर्ट से मान्यता भी प्राप्त की। इन्होंने बाल-विवाह का विरोध किया। ये विधवा पुनर्विवाह के समर्थक थे।

1848 में स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिये ज्योतिबा और उनकी पत्नी ने मिलकर स्कूल खोला जो देश का पहला महिला विद्यालय था। उस दौर में लडकियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नही मिली तो उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई को पढाना शुरू कर दिया। और उनको इतना योग्य बना दिया कि वो स्कूल में बच्चो को पढ़ा सके।

उच्च वर्ग के लोगो ने शुरू से ही उनके काम में बाधा डाली थी लेकिन उन्होंने ने अपने कदम पीछे नही हटाए थे। ऐसी महिलाओं जो शोषण का शिकार हुई हो या किसी कारणवश परेशान हो इसलिये उन्होंने ऐसी महिलाओं के लिये अपने घर के दरवाजे खुले रखे थे। जहाँ उनकी देखभाल हो सके। 

मजदूरों के लिए कार्य :

ज्योतिबा फुले ने ठेकदारी का काम करते हुए। उन्हें मजदूरों की दुर्दशा का भी पता चला और उन्होंने मजदूरों की स्थिति सुधारने का भी काम किया। उन्होंने अपनी स्कूल में अछूतों और मजदूरों के बच्चो को भी प्रवेश दिलवाया था। क्योकि वो जानते थे कि शिक्षा के माध्यम से ही देश का सुधार निहित है।

अब ज्योतिबा की आर्थिक स्तिथि सवरने लगी थी। क्योंकि स्कूल में बच्चो की संख्या बढती जा रही थी। हालांकि स्कूल चलाने में उन्हें कई सामाजिक मुद्दों का सामना करना पड़ा था। लेकिन उन्होंने हिम्मत से काम लिया। इस तरह उन्होंने समाज के लिए बहुत योगदान दिया।

ज्योतिबा फुले का साहित्य (Jyotiba Phule Literature)

  • गुलामगिरी
  • क्षत्रपति शिवाजी
  • अछूतों की कैफियत
  • किसान का कोड़ा
  • तृतीय रत्न
  • राजा भोसला
  • पखड़ा

ज्योतिबा फुले को मिले सम्मान (Jyotiba Phule The Honor) 

ज्योतिबा फुले की सामाजिक कार्यों की सराहना देश भर में होने लगी। इनकी समाजसेवा को देखते हुए। मुंबई की एक विशाल सभा में 11 मई, 1888 को विट्ठलराव कृष्णाजी वंडेकर जी ने इन्हें महात्मा की उपाधि से सम्मानित किया।

मृत्यु (Jyotiba Phule Death)

कुछ समय बाद उनको लकवा हो गया। और जिसके कारण उनके शरीर में कमजोरी आ गयी थी। उनकी ये कमजोरी दिन प्रतिदिन बढ़ती गयी और 27 नवंबर, 1890 को हमारे देश के महान व्यक्ति का निधन हो गया।

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