Farmers Protest Updates: किसान आंदोलन का 7 वां दिन, नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर भी डटे किसान

कल सरकार से बातचीत बेनतीजा रहने के बाद किसान नेताओं का आंदोलन जारी रखने का एलान, नोएडा-दिल्ली का चिल्ला बॉर्डर भी बंद हुआ, सिंघु, टिकरी, झरोदा बॉर्डर पहले से बंद हैं

Update: 2020-12-02 05:21 GMT

नई दिल्ली। मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन का आज सातवां दिन है। वक़्त गुज़रने के साथ ही किसानों के आंदोलन का दायरा और बढ़ता जा रहा है। सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर के बाद अब नोएडा-दिल्ली के चिल्ला बॉर्डर पर भी हज़ारों किसान डट गए हैं। यहां किसानों के ज़ोरदार प्रदर्शन की वजह से मंगलवार शाम से ही नोएडा से दिल्ली आना-जाना मुश्किल हो गया है। किसानों के आंदोलन के इस बढ़ते दायरे की वजह से दिल्ली के तमाम एंट्री प्वाइंट एक के बाद एक बंद होते जा रहे हैं। मंगलवार को मोदी सरकार के मंत्रियों से साथ बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकल पाने के बाद किसान नेताओं ने एलान किया कि हमारा आंदोलन पहले की तरह ही जारी रहेगा।

इस बीच दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ट्रैफिक अलर्ट जारी कर कहा है कि अक्षरधाम मंदिर से चिल्ला बॉर्डर रोड किसान आंदोलन की वजह से बंद कर दिया गया है। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को इस रास्ते न जाने की अपील की है। चिल्ला बॉर्डर बंद होने की वजह से आज यानी बुधवार को नोएडा से दिल्ली और दिल्ली से नोएडा आने-जाने वाले लोगों को किसी और रास्ते की तलाश करनी होगी। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को नोएडा-दिल्ली लिंक रोड से बचने और एनएच-24 और डीएनडी के रास्ते आने-जाने की सलाह दी है।

सिंघु बॉर्डर आज भी बंद

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, सिंघु बॉर्डर अब भी दोनों ओर से बंद है। इसके अलावा, लामपुर, औचंडी और अन्य छोटे बॉर्डर भी बंद हैं। ट्रैफिक को मुकरबा और जीटीके रोड से डायवर्ट किया गया है। यात्रियों को वैकल्पिक रास्ते लेने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, यात्रियों को सिग्नेचर ब्रिज से रोहिणी आने और जाने के लिए रिंग रोड से बचने की सलाह दी गई है। सिंघु बॉर्डर के अलावा, टिकरी बॉर्डर भी बंद है। ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, किसी भी ट्रैफिक मूवमेंट के लिए टिकरी बॉर्डर, झरोदा बॉर्डर, झटिकरा बॉर्डर बंद है। हालांकि, बादुसराय बॉर्डर दो पहिया वाहनों के लिए खुले हुए हैं। इसके अलावा, हरियाणा जाने के लिए जो-जो बॉर्डर खुले हैं, वे हैं धनसा, दौराला, कपासेरा, राजोखरी एनएच 8, बिजवासन / बजघेरा, पालम विहार और डूंडाहेड़ा बॉर्डर।

इस बीच, केंद्र सरकार के बनाए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसान संगठनों और सरकार के बीच मंगलवार को साढ़े तीन घंटे से अधिक चली बैठक में कोई समाधान नहीं निकल सका। सरकार ने कृषि कानूनों पर चर्चा के लिए किसानों के प्रतिनिधियों का एक छोटा समूह बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसे किसानों के प्रतिनिधियों ने ठुकरा दिया। हालांकि, 3 दिसंबर को एक बार फिर से सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत होनी है, जिसके लिए दोनों पक्षों में सहमति बन गई है। अगली बैठक में आंदोलन में शामिल सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

विज्ञान भवन में बैठक समाप्त होने के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में 30 से अधिक किसान संगठनों के 35 प्रतिनिधियों ने शिरकत की। बातचीत सकारात्मक रही। सरकार ने किसान संगठन के प्रतिनिधियों के सामने मुद्दे पर बातचीत के लिए एक छोटा समूह बनाने का प्रस्ताव रखा। सरकार चाहती थी कि इस समूह में चार से पांच किसान संगठनों के प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ और कृषि मंत्रालय के अधिकारी रहें। लेकिन किसान संगठनों के प्रतिनिधि इसके लिए तैयार नहीं हुए। किसानों के प्रतिनिधियों का कहना था कि आंदोलन में शामिल सभी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा होनी चाहिए। 

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