EXCLUSIVE: पेड़ से उतरने के लिए चाची से टॉफी मांगने वाला सैफई का टीपू, कैसे बना भारत के सबसे बड़े राज्य का CM अखिलेश

अखिलेश यादव उर्फ टीपू का जन्म 1 जुलाई, 1973 को यूपी के इटावा जिले में एक छोटे से गांव सैफई में हुआ. यह वही सैफई है जहां हर साल एक रंगारंग कार्यक्रम होता था और फिल्मी जगत की मशहूर हस्तियां अपनी कलाकारी का हुनर दिखाकर लाखों रुपए कमाकर ले जाती थीं. सैफई महोत्सव में बड़े-बड़े नेताओं और बिजनेसमैनों का जमावड़ा लगता था.

Update: 2020-10-07 09:53 GMT

टीपू से टीपू सुल्तान कैसे बन गए अखिलेश यादव

टीपू एक आम आदमी की तरह अपना जीवन जी रहे थे. उन्हें जिप्सी चलाने का बहुत शौक था. मोटापे और सुस्ती से चिढ़ने वाले टीपू दूध से बने छाछ में देशी घी और जीरा का तड़गा लगवाकर पिया करते थे. अदरक की चाय और फोटोग्राफी का शौक उनके जीवन को सामान्य तरीके से चला रहा था.

साल 2000 में अचानक नेताजी(मुलायम सिंह) का पैगाम टीपू के पास पहुंचा जिसमें उन्हें यूपी की कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए कहा गया था. यह मुलायम सिंह की ही खाली की हुई सीट थी जिस पर उपचुनाव हो रहा था.

यहीं से टीपू के अखिलेश यादव बनने का सफर शुरू हुआ और पहली बार कन्नौज से चुनाव जीतकर 26 साल के अखिलेश यादव ने पिता की राजनीतिक विरासत को अपने कंधों का सहारा दिया. यूपी के सियासी दरवाजों पर ये अखिलेश की पहली दस्तक थी.

साल 2004 में फिर से आम चुनाव हुए और अखिलेश यादव दूसरी बार लोकसभा के लिए चुने गए. अब लोगों में अखिलेश के अंदर पिता मुलायम की झलक दिखने लगी थी. हालांकि आलोचक अभी भी अखिलेश को परिपक्व नहीं मानते थे लेकिन समय गुजरने के साथ-साथ लोगों का यह भ्रम भी दूर हो गया.



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