किसान आंदोलन का नया केंद्र बना गाजीपुर बॉर्डर, आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद

कृषि कानूनों के विरोध में आज किसान आंदोलन का 66वां दिन है। मगर, पिछले 4 दिन में 2 बार हुई हिंसा के बाद आंदोलन अब नया मोड़ ले रहा है। सिंघु बॉर्डर के साथ ही अब गाजीपुर भी बड़ा केंद्र बनता नजर आ रहा है। वहीं किसानों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रशासन की बेचैनी एक बार फिर से बढ़ गई है।

Update: 2021-01-30 13:28 GMT

कृषि कानूनों के विरोध में आज किसान आंदोलन का 66वां दिन है। मगर, पिछले 4 दिन में 2 बार हुई हिंसा के बाद आंदोलन अब नया मोड़ ले रहा है। सिंघु बॉर्डर के साथ ही अब गाजीपुर भी बड़ा केंद्र बनता नजर आ रहा है। वहीं किसानों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रशासन की बेचैनी एक बार फिर से बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन ने गाजीपुर बॉर्डर के आसपास क्षेत्रों में इंटरनेट सेेवा को बंद कर दिया है। पश्चिमी उत्तरप्रदेश से भारी संख्या में गाजीपुर कूच करने के किसानों के फैसले के बाद अब एनएच 24 की दोनों सड़को को बंद कर दिया गया है।

गौरतलब है कि दो महीने पहले जब कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने दिल्ली की सरहदों पर डेरा डाला था तो सिंघु बॉर्डर सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा। मगर पिछले दिनों राकेश टिकैत के भावुक भाषण के बाद अब गाजीपुर बॉर्डर किसान आंदोलन का नया केंद्र बनकर उभर गया है। आज भारी तादाद में पश्चिमी उत्तरप्रदेश से किसान गाजीपुर बॉर्डर की ओर कूच कर रहे हैं।

किसान आंदोलन के लिए शुक्रवार का दिन बेहद निर्णायक साबित हुआ। एक तरफ जहां किसान नेता राकेश टिकैत के आंसुओं ने वापस जाते हुए किसानों को पलटने पर मजबूर कर दिया। गाजीपुर धरना स्थल पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाली किसानों की भीड़ में अचानक बढ़ोतरी हो गई। वहीं, आज से किसान आंदोलन में राजनीतिक दलों का हस्तक्षेप भी साफ़ दिखाई देने लगा है।

शुक्रवार को किसान आंदोलन स्थल गाजीपुर पर तीन बड़े नेताओं के आने के बाद यह बात साफ हो गई है। सुबह सबसे पहले राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी, आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और देर शाम कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू किसानों के बीच दिखाई दिए।

छोटे चौधरी के आने के बाद से ही गाजीपुर धरना स्थल पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाली किसानों की भीड़ में अचानक बढ़ोतरी हो गई। गुरुवार की शाम तक ऐसा लग रहा था कि जैसे मानो धरना एक से दो दिन में स्वतः ही समाप्त हो जाएगा। लेकिन राकेश टिकैत के आंसुओं ने पूरी बाजी ही पलट कर रख दी। अभी तक किसान आंदोलन में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के वयोवृद्ध किसान ही दिखाई पड़ते थे, लेकिन गुरुवार की रात हुई पुलिस कार्रवाई के बाद युवा पीढ़ी आंदोलन की तरफ आकर्षित हुई है। युवा नेताओं में भारतीय जनता पार्टी और उनके नेताओं के खिलाफ क्रोध साफ झलक रहा है।

दूसरी ओर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जीआईसी के मैदान में हुई महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने किसानों से शनिवार को दिल्ली कूच करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गाजीपुर बॉर्डर पर दिया जा रहा धरना जारी रहेगा। किसान शनिवार से धरने में शामिल होकर आंदोलन को मजबूती देंगे।

नरेश टिकैत कहा है कि किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। किसान दिल्ली जाएं और आंदोलन को मजबूत बनाएं। जिसे ग़ाज़ीपुर बॉर्डर जाना है, वह जा सकता है। वहीं, दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों को भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने शुक्रवार को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ 40 सेकंड में आंदोलन दोबारा शुरू हुआ। कल दंगों से भी भी खतरनाक स्थिति थी। मैंने कभी बीजेपी को वोट दिया था, बीजेपी के लोगों मदद की। कल लोगों का मोरल डाउन था लेकिन हमारा आंदोलन शांति पूर्ण रहेगा। बता दें कि बीते दिन गाजीपुर बॉर्डर पर हुए बवाल के बीच राकेश टिकैत ने किसानों से यहां पहुंचने की अपील की थी। 

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