Kalpana Chawla Biography in Hindi | कल्पना चावला का जीवन परिचय

Kalpana Chawla Biography in Hindi | कल्पना चावला भारतीय मूल की अमरीकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थीं। वे अंतरिक्ष में जाने वाली द्वितीय भारतीय और प्रथम भारतीय महिला थीं। कल्पना ‘कोलंबिया अन्तरिक्ष यान आपदा’ में मारे गए सात अंतरिक्ष यात्री दल सदस्यों में से एक थीं। कल्पना की प्रथम अंतरिक्ष उड़ान एस.टी.एस. 87 कोलम्बिया शटल से 19 नवम्बर 1997 से 5 दिसम्बर 1997 के मध्य सम्पन्न हुई।

Update: 2020-11-25 04:28 GMT

 Kalpana Chawla Biography in Hindi | कल्पना चावला का जीवन परिचय

 Kalpana Chawla Biography in Hindi | कल्पना चावला का जीवन परिचय

  • पूरा नाम कल्पना जीन पियरे हैरिसन
  • जन्म 17 मार्च 1962
  • जन्मस्थान करनाल, पंजाब,
  • पिता बनारसी लाल चावला
  • माता संज्योथी चावला
  • विवाह जीन पियरे हैरिसन
  • शिक्षा बैचलर ऑफ साइंस
  • व्यवसाय अंतरिक्ष यात्री
  • पुरस्कार कांग्रेसी स्पेस मेडल ऑफ ऑनर, नासा स्पेस फ्लाइट मेडल
  • नागरिकता/राष्ट्रीयता अमेरिकन

अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला (Kalpana Chawla Biography in Hindi)

Kalpana Chawla Biography in Hindi | कल्पना चावला भारतीय मूल की अमरीकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थीं। वे अंतरिक्ष में जाने वाली द्वितीय भारतीय और प्रथम भारतीय महिला थीं। कल्पना 'कोलंबिया अन्तरिक्ष यान आपदा' में मारे गए सात अंतरिक्ष यात्री दल सदस्यों में से एक थीं। कल्पना की प्रथम अंतरिक्ष उड़ान एस.टी.एस. 87 कोलम्बिया शटल से 19 नवम्बर 1997 से 5 दिसम्बर 1997 के मध्य सम्पन्न हुई।

प्रारंभिक जीवन (Kalpana Chawla Early Life) :

कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल जिले में हुआ था। इनकी माता का नाम संजयोती चावला और पिता का नाम बनारसीलाल चावला था। परिवार में कुल 4 भाई-बहन थे। इनकी दो बहनें दीपा और सुनीता थी। इसके अलावा एक भाई जिसका नाम संजय था। 

शिक्षा (Kalpana Chawla Education) :

कल्पना चावला की प्रारंभिक शिक्षा करनाल के ही "टैगोर बाल निकेतन" में हुई, जो एक सीनियर सेकंडरी स्कूल था। उनके पिताजी उन्हें एक शिक्षिका या डॉक्टर के रूप में देखना चाहते थे। लेकिन कल्पना पहले ही अन्तरिक्ष में उड़ने का सपना देख चुकी थी। अपने सपने को साकार करने के लिए उन्होंने 1978 में चंड़ीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में अरोनोटिकल ब्रांच में दाखिला लिया।

1982 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की, उसके बाद वे अमेरिका चली गई। जहाँ उन्होंने टेक्सास यूनिवर्सिटी में एयरोस्पेस इंजिनियरिंग में एडमिशन लिया, इस कोर्स को उन्होंने 2 वर्ष में सफलता पूर्वक पूरा किया। बाद में 1986 में दूसरा स्ननात्कोत्तर भी उसी कालेज से पूरा कर लिया। अगले ही दो वर्षो में कल्पना चावला ने कोलराडो यूनिवर्सिटी से अपने सम्बंधित विषय में PhD भी पूरा कर लिया।

निजी जीवन (Kalpana Chawla Married Life)

कल्पना चावला अपने अध्ययन के लिए अमेरिका गयी थी। जहाँ उन्होंने अपने फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर जीन पिएरे हैरिसन से शादी करने का फैसला किया। जिसके बाद उन्हें अमेरिका की नागरिकता मिल गयी।

अंतरिक्ष यात्री के रूप में करियर (Kalpana Chawla As Astronaut Career)

कल्पना अंतरिक्ष में उड़ने वाली पहली भारतीय महिला थीं, और अंतरिक्ष में उड़ाने वाली भारतीय मूल की दूसरी व्यक्ति थीं। राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत अंतरिक्ष यान में एक उड़ान भरी थी। कल्पना जी अपने पहले मिशन में 1.04 करोड़ मील का सफ़र तय कर के पृथ्वी की 252 परिक्रमाएँ लगाई, और अंतरिक्ष में 60 से ज्यादा घंटे बिताए। 1995 में कल्पना चावला को नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल किया गया, और उन्हें 1998 में अपनी पहली उड़ान के लिए चुना गया था।

पहला अंतरिक्ष उड़ान (Kalpana Chawla First Space Flight) 

उनका पहला अंतरिक्ष मिशन 19 नवम्बर 1997 को छह अंतरिक्ष यात्री दल के हिस्से के रूप में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया की उड़ान STS-87 से शुरू किया गया । इस अंतरिक्ष यात्रा के दौरान कल्पना चावला समेत दल में कुल 6 सदस्य थे।

STS-87 के दौरान स्पार्टन उपग्रह को तैनात करने के लिए भी ज़िम्मेदार थीं, इस खराब हुए उपग्रह को पकड़ने के लिए विंस्टन स्कॉट और तकाओ दोई को अंतरिक्ष में चलना पड़ा था। 5 महीने की जांच करने के बाद नासा ने कल्पना चावला को इस मामले में पूरी तरह दोषमुक्त पाया, पारगमन इंटरफेस व यान कर्मचारियों तथा ज़मीनी नियंत्रकों के लिए परिभाषित तरीको में भी खामिया मिली ।

STS-87 की उड़ान के बाद की गतिविधियों के पूरा होने पर कल्पना जी ने अंतरिक्ष यात्री कार्यालय में, तकनीकी पदों पर काम किया, उनके यहाँ के कार्यकलाप को उनके साथियों ने विशेष पुरस्कार दे के सम्मानित किया। भारत के लिए चावला की आखिरी यात्रा 1992 के नए साल की छुट्टी के दौरान थी, जब वे और उनके पति और परिवार के साथ समय बिताने गए थे।

दूसरा अंतरिक्ष उड़ान (Kalpana Chawla Second Space Flight)

2000 में उन्हें STS-107 में अपनी दूसरी उड़ान के कर्मचारी के तौर पर चुना गया। यह अभियान लगातार पीछे सरकता रहा, क्योंकि कई कार्यों के नियोजित समय में टकराव होता रहा, और कुछ तकनीकी समस्याएँ भी आईं, जैसे कि शटल इंजन बहाव अस्तरों में दरारें।

16 जनवरी, 2003 को कल्पना जी ने आखिर में कोलंबिया पर चढ़ के विनाशरत STS-107 मिशन का आरंभ किया, उनकी ज़िम्मेदारियों में शामिल थे। स्पेसहैब, बल्ले-बल्ले, फ़्रीस्टार लघुगुरुत्व प्रयोग जिसके लिए कर्मचारी दल ने 80 प्रयोग किए, इसके जरिए पृथ्वी व अंतरिक्ष विज्ञान, उन्नत तकनीक विकास व अंतरिक्ष यात्री स्वास्थ्य व सुरक्षा का अध्ययन हुआ।

कोलंबिया अंतरिक्ष यान हादसा और मृत्यु (Columbia Apacecraft Accident)

भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला (Kalpana Chawla Death) की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा ही उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई। अपने सभी यात्रिओ के उपरांत वापसी के समय 1 फरवरी, 2003 को कोलंबिया अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल मे प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया और देखते ही देखते अंतरिक्ष यान और उसमें सवार सातों यात्रियों ख़ाक हो गए। नासा ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिये यह एक दर्दनाक घटना थी। 

पुरस्कार और सम्मान (Kalpana Chawla The Honors)

काँग्रेशनल अंतरिक्ष पदक के सम्मान

नासा अंतरिक्ष उड़ान पदक

नासा विशिष्ट सेवा पदक

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