असम में NRC की फाइनल लिस्ट से हटाए गए 10 हजार अपात्र लोगों के नाम, जानिए क्या है मामला

सम (Assam) में पिछले साल अगस्त में प्रकाशित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (National Civil Register, एनआरसी) की अंतिम सूची से अपात्र लोगों और उनके वंशजों के करीब 10,000 नाम हटाने का आदेश जारी किया गया है।

Update: 2020-10-15 16:15 GMT

नई दिल्ली: असम (Assam) में पिछले साल अगस्त में प्रकाशित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (National Civil Register, एनआरसी) की अंतिम सूची से अपात्र लोगों और उनके वंशजों के करीब 10,000 नाम हटाने का आदेश जारी किया गया है।

NRC के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, "असम के 33 जिलों में नागरिक पंजीकरण (DRCR) के डिप्टी कमिश्नरों (DC) और जिला रजिस्ट्रार को राज्य के सबसे वरिष्ठ अधिकारी हितेश देव सरमा का एक पत्र भी इन हजारों लोगों को हिरासत में लेने के लिए स्पीकर के आदेश जारी करने के लिए कहता है।"

हितेश देव शर्मा ने मंगलवार को सभी उपायुक्तों और नागरिक पंजीयन के जिला पंजीयकों (डीआरसीआर) को लिखे पत्र में कहा, 'वेबफॉर्म के माध्यम से आपकी तरफ से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार डीएफ (घोषित विदेशी)/ डीवी ('डी' मतदाता)/पीएफटी (विदेशी न्यायाधिकरण में लंबित) श्रेणियों के अपात्र लोग और उनके वंशजों के कुछ नाम एनआरसी में पाये गये हैं।'

हितेश देव ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि नागरिकता (नागरिक पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियम, 2003 के तहत अनुसूची के खंड 4(6) के अनुसार विशिष्ट तरीके से लोगों की पहचान करने के बाद ऐसे नाम हटाने का आदेश जारी किया जाए।

सरमा ने संबंधित नियमों के हवाले से कहा, "LRCR (नागरिक पंजीकरण के स्थानीय रजिस्ट्रार) किसी भी समय राज्य में NRC के अंतिम प्रकाशन से पहले हो सकता है या आवश्यक माना जाने वाले ऐसे व्यक्तियों के नामों के सत्यापन का कारण बन सकता है।"

बता दें कि पिछले साल 31 अगस्त को अंतिम एनआरसी जारी की गयी थी जिसमें कुल 19,06,657 लोगों के नाम हटाये गये थे। असम के संसदीय कार्य मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने इस साल 31 अगस्त को विधानसभा में कहा था कि राज्य सरकार ने बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों में 20 प्रतिशत नाम और बाकी हिस्से में 10 प्रतिशत नामों के पुन: सत्यापन के लिए उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल किया है।

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