समाजवादी पार्टी और आरएलडी गठबंधन का पंचायत चुनाव में बजा डंका, BJP को पछाड़ा

कोरोना वायरस महामारी के बीच सन्नपन हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के सभी नतीजे लगभग घोषित हो चुके हैं। तो वहीं, 3050 पदों पर जिला पंचायत सदस्यों के लिए हो रहे चुनाव में सभी राजनीतिक दलों ने अपने अधिकृत उम्मीदवार मैदान में उतारे थे और यही पंचायत चुनाव में पार्टियों की जीत-हार का पैमाना भी साबित हुआ है।

Update: 2021-05-05 09:03 GMT

लखनऊ, मई 05: कोरोना वायरस महामारी के बीच सन्नपन हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के सभी नतीजे लगभग घोषित हो चुके हैं। तो वहीं, 3050 पदों पर जिला पंचायत सदस्यों के लिए हो रहे चुनाव में सभी राजनीतिक दलों ने अपने अधिकृत उम्मीदवार मैदान में उतारे थे और यही पंचायत चुनाव में पार्टियों की जीत-हार का पैमाना भी साबित हुआ है। यानी समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) ने सत्तारूढ़ बीजेपी (बीजेपी) को पछाड़ते हुए बढ़त बना ली है। हालांकि, किसी भी दल को इस चुनाव में पूर्ण बहुमत नहीं मिला, लेकिन अभी तक जुटाए आंकड़ों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी सर्थित उम्मीदवारों को अकेले 747 सीटों पर जीत मिली है।

वहीं, बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों को 690 सीटें मिली हैं। बीएसपी को 381 सीटों पर जीत हासिल हुई है। कांग्रेस 76 सीटों जीतने में कामयाब रही। आरएलडी और अन्य दलों सहिता 1156 निर्दलियों ने जिला पंचायत चुनाव में बाजी मारते हुए कई जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी का चाबी अपने हाथ में रखी है। हालांकि, पार्टियों ने अपना चुनाव चिन्ह प्रत्याशियों को नहीं दिया और सिर्फ समर्थित उम्मीदवार उतारे ऐसे में चुनाव आयोग ने किसी पार्टी की जीत का ऐलान नहीं किया है। यह सभी आंकड़े पार्टियों, उम्मीदवारों और उनके अधिकृत प्रत्याशियों की लिस्ट से जुटाए गए हैं।

वहीं, पश्चिमी यूपी की बात करे तो यहां किसान आंदोलन ने राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) को पश्चिम यूपी में नई संजीवनी दे दी है। दरअसल, किसान आंदोलन का सीधा असर उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में देखने को साफ मिला है। तो वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को भी बड़ा झटका लगा है। बता दें कि मेरठ जिले में हुए जिला पंचायत की सभी 33 सीटों पर बीजेपी ने प्रत्याशी उतारे थे। मेरठ की कुल 33 सीटों में से बसपा को 9 सीट पर जीत मिली है जबकि सपा और भाजपा को 6-6 सीटों पर जीत मिल सकी है। यहां आरएलडी ने पांच जिला पंचायत सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि निर्दलीय को 7 सीटों पर जीत मिली है। इसी तरह की स्थिति मुजफ्फरनगर, शामली, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़ और बिजनौर में भी है।

वहीं, पश्चिमी यूपी की बात करे तो यहां किसान आंदोलन ने राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) को पश्चिम यूपी में नई संजीवनी दे दी है। दरअसल, किसान आंदोलन का सीधा असर उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में देखने को साफ मिला है। तो वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को भी बड़ा झटका लगा है। बता दें कि मेरठ जिले में हुए जिला पंचायत की सभी 33 सीटों पर बीजेपी ने प्रत्याशी उतारे थे। मेरठ की कुल 33 सीटों में से बसपा को 9 सीट पर जीत मिली है जबकि सपा और भाजपा को 6-6 सीटों पर जीत मिल सकी है। यहां आरएलडी ने पांच जिला पंचायत सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि निर्दलीय को 7 सीटों पर जीत मिली है। इसी तरह की स्थिति मुजफ्फरनगर, शामली, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़ और बिजनौर में भी है।

फर्रुखाबाद में जिला पंचायक की कुल 30 सीटें है। इनमें भाजपा 4, सपा 11, बसपा 2, अन्य को 13 सीट पर मिली जीत। बलरामपुर में जिला पंचायत की कुल 40 सीटें हैं। इनमें भाजपा को 6, सपा 11, बसपा 9 और कांग्रेस को 1 सीट पर जीत मिली। बुलंदशहर में बीजेपी को 10, बीएसपी 10, आरएलडी 6, सपा 2, आप 1 और निर्दलयी प्रत्याशियों को 23 सीटों पर जीती मिली। प्रयागराज में बीजेपी को 15, निर्दलीय 13, समाजवादी पार्टी 25, कांग्रेस 1, बीएसपी 4, एआईएमआईएम 1, अपना दल एस 4, आम आदमी पार्टी 2 सीटें मिली है।

रामपुर में सपा को 11, बीजेपी 7, बसपा 2, कांग्रेस 2 और निर्दलीयों उम्मीदवारों को 12 सीटें मिली है। अम्बेडकर नगर में भाजपा 2, सपा 9, बसपा 07, अन्य 23 सीटों पर जीत मिली है। इटावा में सपा 20, प्रसपा 20, बसपा 1, भाजपा 1, निर्दलीय को 2 सीटों पर जीत मिली है। मिर्ज़ापुर में भाजपा 5, सपा 11, बसपा 6, कांग्रेस 2, अपना दल एस 4, भारतीय किसान यूनियन 1, महानदल 1, निर्दलीय को 14 सीटों पर जीत मिली है।

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