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Bhimsen Joshi Biography in Hindi | भीमसेन जोशी का जीवन परिचय

Bhimsen Joshi Biography in Hindi | पंडित भीमसेन जोशी एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक थे। उन्होंने 19 साल की उम्र से गायन शुरू किया था और वे सात दशकों तक शास्त्रीय गायन करते रहे। वे अपने प्रसिद्ध भक्तिमय भजनों और अभंगो के लिए भी जाने जाते है।

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Bhimsen Joshi Biography in Hindi | भीमसेन जोशी का जीवन परिचय

Bhimsen Joshi Biography in Hindi | भीमसेन जोशी का जीवन परिचय

  • नाम भीमसेन गुरुराज जोशी
  • जन्म 4 फ़रवरी 1922
  • जन्मस्थान रोना
  • पिता रुराज जोशी
  • माता गोदावराईबाई
  • पत्नी सुनंदा कट्टी
  • पुत्र श्रीनिवास जोशी, राघवेंद्र जोशी, आनंद जोशी,
  • पुत्री शुभदा मुलुंडुंड
  • व्यवसाय हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक
  • पुरस्कार भारत रत्न, पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण
  • नागरिकता भारतीय

भारतीय शास्त्रीय गायक भीमसेन जोशी (Bhimsen Joshi Biography in Hindi)

Bhimsen Joshi Biography in Hindi | पंडित भीमसेन जोशी एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक थे। उन्होंने 19 साल की उम्र से गायन शुरू किया था और वे सात दशकों तक शास्त्रीय गायन करते रहे। वे अपने प्रसिद्ध भक्तिमय भजनों और अभंगो के लिए भी जाने जाते है। अपने एकल गायन से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में नए युग का सूत्रपात करने वाले पंडित भीमसेन जोशी कला और संस्कृति की दुनिया के छठे व्यक्ति थे, जिन्हें 2009 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्‍न' से सम्मानित किया गया था। 1998 में उन्हें म्यूजिक, डांस और नाटक के क्षेत्र में अतुल्य योगदान के लिए उनके सर्वोच्च पुरस्कार संगीत नाटक अकादमी शिष्यवृत्ति से नवाजा था।

प्रारंभिक जीवन (Bhimsen Joshi Early Life)

भीमसेन गुरुराज जोशी का जन्म कर्नाटक के धारवाड़ (गडग) जिले के रोन ग्राम में 4 फ़रवरी, 1922 को हुआ था। उनके पिता गुरुराज जोशी स्थानीय हाई स्कूल के हेडमास्टर और कन्नड़, अंग्रेज़ी और संस्कृत के विद्वान थे। उनके चाचा जी.बी जोशी चर्चित नाटककार थे तथा उन्होंने धारवाड़ की मनोहर ग्रन्थमाला को प्रोत्साहित किया था। उनके दादा प्रसिद्ध कीर्तनकार थे। अपने 16 भाई-बहनों में भीमसेन सबसे बड़े थे। युवावस्था में ही उन्होंने अपनी माता को खो दिया था और बाद में उन्हें उनकी सौतेली माँ ने बड़ा किया था। बचपन से ही भीमसेन में संगीत के प्रति प्रेम और रूचि थी और इसके साथ ही संगीत के वाद्य जैसे हार्मोनियम और तानपुरा बजाना भी उन्हें काफी पसंद था। वे दिन-रात संगीत का अभ्यास करते रहते थे।

शिक्षा (Bhimsen Joshi Education)

वह किराना घराने के संस्थापक अब्दुल करीम खान से बहुत प्रभावित थे। 1932 में वह गुरु की तलाश में घर से निकल पड़े। अगले दो वर्षो तक वह बीजापुर, पुणे और ग्वालियर में रहे। उन्होंने ग्वालियर के उस्ताद हाफिज अली खान से भी संगीत की शिक्षा ली। लेकिन अब्दुल करीम खान के शिष्य पंडित रामभाऊ कुंडालकर से उन्होने शास्त्रीय संगीत की शुरूआती शिक्षा ली।

अपनी संगीत शिक्षा से संतुष्ट न हो कर भीमसेन ग्वालियर आये और वहाँ के 'माधव संगीत विद्यालय' में प्रवेश ले लिया। ग्वालियर के 'करवल्लभ संगीत सम्मेलन' में उनकी मुलाकात में विनायकराव पटवर्धन से हुई। सवाई गन्धर्व उसके घर के बहुत पास रहते हैं। इसी तरह अनेक ज्ञानियों का जिनमें इनायत खान, स्यामाचार्या जोशी आदि है के सहयोग से उन्हें जो ज्ञान मिला उसके फलस्वरूप वे एक महान संगीतकार के रूप में ख्यातिप्राप्त हुए।

निजी जीवन (Bhimsen Joshi Personal Life)

भीमसेन जोशी ने अपने जीवन में दो शादियाँ की। 1944 में उनकी पहली पत्नी उनके मातृक चाचा की बेटी सुनंदा कट्टी के साथ हुयी। सुनंदा से उन्हें चार बच्चे हुए, राघवेन्द्र, उषा, सुमंगला और आनंद। इसके आलावा 1951 में उन्होंने कन्नड़ नाटक में उनकी सह-कलाकारा वत्सला मुधोलकर से शादी कर ली। वत्सला से भी उन्हें तीन बच्चे हुए, जयंत, शुभदा और श्रीनिवास जोशी। कुछ समय वे दोनों पत्नियों के साथ रहे, लेकिन बाद में उनकी पहली पत्नी अलग हो गयी और लिमएवाडी, सदाशिव पेठ, पुणे में किराये के मकान में रहने लगी।

गायन करियर (Bhimsen Joshi Singing Career)

1941 में भीमसेन जोशी ने 19 वर्ष की उम्र में मंच पर अपनी पहली प्रस्तुति दी। उनका पहला एल्बम 20 वर्ष की आयु में निकला, जिसमें कन्नड़ और हिन्दी में कुछ धार्मिक गीत थे। इसके दो वर्ष बाद वह रेडियो कलाकार के तौर पर मुंबई में काम करने लगे। विभिन्‍न घरानों के गुणों को मिलाकर भीमसेन जोशी अद्भुत गायन प्रस्तुत करते थे। 1942 में HMV ने रिलीज किया था। बाद में 1943 में जोशी मुंबई चले गए और वहाँ रेडियो आर्टिस्ट के रूप में काम करने लगे। 1946 में गुरु सवाई गंधर्व के 60 वे जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में उनके परफॉरमेंस की दर्शको के साथ ही गुरु ने भी काफी प्रशंसा की थी।

पसंदीदा राग (Bhimsen Joshi Favorite Melody)

उन्होंने 'सुधा कल्याण', 'मियां की तोड़ी', 'भीमपलासी', 'दरबारी', 'मुल्तानी' और 'रामकली' जैसे अनगिनत राग छेड़ संगीत के हर मंच पर संगीत प्रमियों का दिल जीता। शुद्ध कल्याण, मुल्तानी और भीमपलासी भीमसेन जोशी के पसंदीदा राग रहे।

अवार्ड और उपलब्धियाँ (Bhimsen Joshi Awards)

  • 1972 में उन्हें "पद्म श्री" से सम्मानित किया गया।
  • 1985 में भारत सरकार द्वारा "पद्म भूषण" पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • 1999 में "पद्म विभूषण" प्रदान किया गया था।
  • 2001 में कर्नाटक विश्वविद्यालय द्वारा "नदोजा पुरुस्कार" से सम्मानित किया गया।
  • 2002 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा "महाराष्ट्र भूषण" से सम्मानित किया गया।
  • 2003 में केरल सरकार द्वारा "स्वाति संगीत पुरुस्कार" से सम्मानित किया गया।
  • 2005 में "कर्नाटक रत्न" से सम्मानित किया गया।
  • 2008 को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्‍न" भी जोशी जी को मिला।
  • उन्हें "संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार" से भी सम्मानित किया जा चुका था।

मृत्यु (Bhimsen Joshi Death)

वह दो साल से बीमार थे और पि‍छले कई दि‍नों से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के मशहूर गायक 'भारत रत्‍न' पंडित भीमसेन जोशी 89 वर्ष की आयु में 24 जनवरी 2011, सोमवार सुबह 8 बजे पुणे के सहयाद्री अस्‍पताल में निधन हो गया।

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