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Chandra Shekhar Singh Biography in Hindi | चन्द्रशेखर सिंह की जीवनी

Chandra Shekhar Singh Biography in Hindi |

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Chandra Shekhar Singh Biography in Hindi | चन्द्रशेखर सिंह की जीवनी

Chandra Shekhar Singh Biography in Hindi | चन्द्रशेखर सिंह की जीवनी

  • नाम चंद्रशेखर सिंह
  • जन्म 1 जुलाई 1927
  • जन्मस्थान इब्राहीमपट्टी, उत्तरप्रदेश
  • पुत्र नीरज शेखर, पंकज शेखर सिंह
  • शिक्षा बीए
  • व्यवसाय राजनीतिज्ञ
  • राजनैतिक पार्टी समाजवादी जनता पार्टी
  • नागरिकता भारतीय

राजनेता चंद्र शेखर सिंह (Chandra Shekhar Singh Biography in Hindi)

चंद्र शेखर सिंह एक भारतीय राजनेता थे जिन्होंने 10 नवम्बर 1990 से 21 जून 1991 तक भारत के आठवे प्रधानमंत्री बनकर देश की सेवा की थी। इन्हें युवा तुर्क का सम्बोधन इनकी निष्पक्षता के कारण प्राप्त हुआ था। वी.पी. सिंह के बाद चंद्रशेखर ने ही प्रधानमंत्री का पदभार सम्भाला था। वह आचार्य नरेंद्र देव के काफ़ी समीप माने जाते थे। उनके व्यक्तित्व एवं चरित्र से इन्होंने बहुत कुछ आत्मसात किया था। Politician Chandra Shekhar

प्रारंभिक जीवन (Chandra Shekhar Singh Early Life) :

चंद्र शेखर सिंह का जन्म 17 अप्रैल 1927 को उत्तर प्रदेश के बल्लिया जिले के इब्राहिमपट्टी गाँव में हुआ था। वे एक खेती करने वाले राजपूत परिवार से सम्बन्ध रखते थे। चंद्रशेखर का राजनीति के प्रति रुझान विद्यार्थी जीवन में ही हो गया था। इन्हें आग उग़लते क्रान्तिकारी विचारों के कारण जाना जाता था।

शिक्षा और विवाह (Chandra Shekhar Singh Education and Marriage) :

चंद्रशेखर ने 1950-1951 में राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की। इनका विवाह दूजा देवी के साथ सम्पन्न हुआ था। इनके दो पुत्र पंकज और नीरज हैं।

शुरुआती करियर (Chandra Shekhar Singh Starting Career) :

चन्द्र शेखर अपने छात्र जीवन से ही राजनीति की ओर आकर्षित थे और क्रांतिकारी जोश और गर्म स्वभाव वाले वाले आदर्शवादी के रूप में जाने जाते थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1950-51) से राजनीति विज्ञान में अपनी मास्टर डिग्री करने के बाद वे समाजवादी आंदोलन में शामिल हो गए।

उन्हें आचार्य नरेंद्र देव के साथ बहुत निकट से जुड़े होने का सौभाग्य प्राप्त था। वे बलिया में जिला प्रजा समाजवादी पार्टी के सचिव चुने गए एक साल के भीतर वे उत्तर प्रदेश में राज्य प्रजा समाजवादी पार्टी के संयुक्त सचिव बने। 1955-56 में वे उत्तर प्रदेश में राज्य प्रजा समाजवादी पार्टी के महासचिव बने।

राजनीतिक करियर (Chandra Shekhar Singh Political Career) :

राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति में आगमन उत्तरप्रदेश राज्यसभा में प्रवेश करने के बाद हुआ। 1962 में चंद्रशेखर जी को प्रजा समाजवादी पार्टी के द्वारा राज्यसभा का टिकट मिल गया। यहाँ से इन्होने उच्च राजनीति का आरम्भ किया। अहम् मुद्दों पर आवाज बुलंद करना चंद्रशेखर जी के व्यक्तित्व में शामिल था। इनकी दमदार आवाज, वेबाक बोलने की आदत काफी प्रभावशाली थी, लोग इनके आगे आवाज नहीं उठा पाते थे। Chandra Shekhar Singh Biography in Hindi

चंद्र शेखर सोशलिस्ट पार्टी के मुख्य राजनेता थे। उन्होंने बैंको के राष्ट्रीयकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बाद में 1964 में वे भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस में शामिल हो गए। 1962 से 1967 तक वे राज्य सभा के सदस्य बने हुए थे। सबसे पहले 1967 में वे लोक सभा में दाखिल हुए थे। कांग्रेस पार्टी के सदस्य रहते हुए, उन्होंने कई बार इंदिरा गाँधी और उनके कार्यो की आलोचना की थी। इस वजह से 1975 में उन्हें कांग्रेस पार्टी से अलग होना पड़ा था।

1975 के आपातकाल के दौरान इंदिरा गाँधी ने कई राज नेताओं को जेल भेजा। उनमें चंद्रशेखर जी का नाम भी शामिल था। उनके साथ-साथ मोहन धारिया और राम धन जैसे नेताओ को भी गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कांग्रेस पार्टी में "जिंजर ग्रुप" की शुरुवात भी की थी, जिसके सदस्य अविभाजित कांग्रेस पार्टी के समय में खुद फिरोज गाँधी और सत्येन्द्र नारायण भी थे।

आनी-बानी के तुरंत बाद, चंद्रशेखर 1977 में उत्तरप्रदेश के बलिया से चंद्रशेखर को लोकसभा की सीट मिल गई और जनता पार्टी के अध्यक्ष बन गये और उन्होंने राज्य में पहली अकांग्रेस सरकार बनायी। इसके बाद वे जनता दल के अध्यक्ष बन गए।

इन्होने दक्षिण के कन्याकुमारी से दिल्ली के राजघाट तक हुई पद यात्रा जिसे बाद में भारत यात्रा भी कहा गया, उसमें हिस्सेदारी की। 4260 किलोमीटर की पद यात्रा को 6 जनवरी 1983 से शुरू कर 25 जून 1983 को समाप्त किया गया। भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं पर प्रकाश डालना और सामाजिक असमानताओं और प्रचलित जातिवाद की असमानताओं को दूर करना था।

1988 में यह पार्टी दूसरी पार्टियों में मिल गयी और फिर वी.पी. सिंह के नेतृत्व में एक नयी सरकार का गठन किया गया। इसके कुछ समय बाद एक बार फिर चंद्रशेखर ने संगठित होकर, जनता दल सोशलिस्ट नाम के पार्टी की स्थापना की। फिर कांग्रेस की सहायता से, विशेषतः राजीव गाँधी के सहयोग से वे नवम्बर 1990 में वी.पी. सिंह की जगह प्रधानमंत्री बने। 1984 के चुनाव को छोड़कर वे लोक सभा के सभी चुनावो में जीते, क्योकि इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद कांग्रेस ने पोल को घुमा दिया था।

चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने (Chandra Shekhar As a Prime Minister of India) :

नवंबर 1990 में राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के पतन के बाद, राजीव गाँधी की मदद से चंद्रशेखर सिंह को 10 नवंबर 1990 को प्रधानमंत्री बना दिया गया। लेकिन कुछ समय बाद ही वी.पी. सिंह ने जनता दल से अलग समाजवादी पार्टी बना ली। जिसके बाद चंद्रशेखर को बीजेपी के द्वारा बहुमत मिला। ये बात राजीव गाँधी को अच्छी नहीं लगी और उन्होंने कुछ समय बाद चंद्रशेखर की सरकार से बहुमत वापस ले लिया। जिसके साथ मार्च 1991 में चंद्रशेखर सिंह की सरकार गिर गई, और उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

चंद्र शेखर सात महीनो तक प्रधानमंत्री भी बने थे, चरण सिंह के बाद वे दुसरे सबसे कम समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री थे। अपने कार्यकाल में उन्होंने डिफेन्स और होम अफेयर्स के कार्यो को भी संभाला था। उनकी सरकार में 1990-91 का खाड़ी युद्ध भी शामिल है। 1991 की बसंत ऋतू में भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने दुसरे चुनाव में हिस्सा लेने की ठानी थी। और इसके चलते 6 मार्च 1991 में ही चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। | Chandra Shekhar Singh Biography in Hindi

पी.वी. नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री का पद सौपने के बाद, चंद्र शेखर का राजनीतिक महत्त्व काफी कम हो गया था, लेकिन फिर भी लोक सभा में वे काफी सालो तक अपने सीट बचाने में सफल रहे। उन्होंने देश के बहुत से भागो में भारत यात्रा सेंटर की स्थापना की और ग्रामीण विकास पर ज्यादा ध्यान देने लगे थे।

मृत्यु (Chandra Shekhar Singh Death) :

चंद्रशेखर जी बहुत सी बीमारियों से जूझ रहे थे और मई महीने से ही वे नयी दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती थे, तबियत ख़राब के चलते उन्हें 3 मई 2007 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, 8 जुलाई 2007 को 80 साल की उम्र में दिल्ली में इन्होने अंतिम सांस ली। उनकी मृत्यु के बाद पुरे सम्मान के साथ 10 जुलाई को यमुना नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। अगस्त में उनकी अस्थियो को सिरुवनी नदी में विसर्जित किया गया था।

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