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Charles Darwin Biography in Hindi | चार्ल्स डार्विन का जीवन परिचय

Charles Darwin Biography in Hindi | चार्ल्स डार्विन Charles Darwin 19वी शताब्दी के उन महान वैज्ञानिकों में थे जिन्होंने मानव के विकास की प्रक्रिया का जैविक विवेचन कर विश्व चिन्तन को नई दिशा दी। चार्ल्स डार्विन एक अंग्रेजी प्रकृतिविज्ञान और भूवैज्ञानिक थे जो विशेषतः विज्ञान के विकास में अपने योगदान के लिये जाने जाते है।

Charles Darwin Biography in Hindi | चार्ल्स डार्विन का जीवन परिचय
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Charles Darwin Biography in Hindi | चार्ल्स डार्विन का जीवन परिचय

Charles Darwin Biography in Hindi | चार्ल्स डार्विन का जीवन परिचय

  • नाम चार्ल्स रोबर्ट डार्विन
  • जन्म 12 फरवरी 1809
  • जन्मस्थान इंग्लैंड ( श्रेव्स्बुरी )
  • पिता रॉबर्ट डार्विन
  • माता सुसाना डार्विन
  • पत्नी एम्मा डार्विन
  • पुत्र फ्रांसिस डार्विन, जॉर्ज डार्विन, विलियम इरास्मस डार्विन,
  • शिक्षा बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री
  • व्यवसाय प्रकृतिवादी
  • पुरस्कार कोपल मेडल, रॉयल मेडल। वोलास्टन मेडल
  • नागरिकता ब्रिटिश

ब्रिटिश वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन (Charles Darwin Biography in Hindi)

Charles Darwin Biography in Hindi | चार्ल्स डार्विन Charles Darwin 19वी शताब्दी के उन महान वैज्ञानिकों में थे जिन्होंने मानव के विकास की प्रक्रिया का जैविक विवेचन कर विश्व चिन्तन को नई दिशा दी। चार्ल्स डार्विन एक अंग्रेजी प्रकृतिविज्ञान और भूवैज्ञानिक थे जो विशेषतः विज्ञान के विकास में अपने योगदान के लिये जाने जाते है। उनके इस चिन्तन ने प्राणी विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान आदि कई विषयों को प्रभावित किया। British Scientist Charles Darwin

चार्ल्स डार्विन प्रारंभिक जीवन (Charles Darwin Early Life)

चार्ल्स रोबर्ट डार्विन का जन्म 12 फरवरी 1809 को इंग्लैंड के शोर्पशायर के श्रेव्स्बुरी में हुआ था। उनका जन्म उनके पारिवारिक घर दी माउंट में हुआ था। चार्ल्स अपने समृद्ध डॉक्टर रोबर्ट डार्विन की छः संतानों में पांचवे थे।

चार्ल्स डार्विन की शिक्षा (Education)

1817 में 8 की उम्र में ही धर्मोपदेशक द्वारा चलायी जा रही स्कूल में पढ़ते थे और प्रकृति के इतिहास के बारे में जानना चाहते थे। उसी साल जुलाई में उनकी माता का देहांत हो गया था। इसके बाद सितंबर 1818 से चार्ल्स अपने बड़े भाई इरेस्मस के साथ रहने लगे थे और एंग्लिकन श्रेव्स्बुर्री स्कूल में पढ़ते लगे।

एडिनबर्घ मेडिकल युनिर्वसिटी में एडमिशन (Admission to Edinburgh Medical University)

डार्विन के पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे इसलिए वो डार्विन को अपने साथ रखने लगे और डॉक्टर बनने की ट्रेनिंग देने लगे। 1825 ईसवी में जब डार्विन 16 साल के थे तो उन्हें एडिनबर्घ की मेडिकल युनिर्वसिटी में दाखिल करवाया गया। चार्ल्स डार्विन को मेडिकल में कोई ज्यादा रूचि नहीं थी। वो हमेशा प्रकृति का इतिहास जानने की कोशिश करते रहते। विविध पौधों के नाम जानने की कोशिश करते रहते और पौधों के टुकडो को भी जमा करते।

चार्ल्स डार्विन का निजी जीवन (Charles Darwin Married Life)

1839 में डार्विन ने जोशिया वैजबुड से विवाह कर लिया। फिर वे लंदन छोड़कर कैंट-डाउन के शान्त वातावरण में रहने लगे।

प्रकृति विज्ञान में उनकी रूचि (Charles Darwin As a Natural Science) :

यूनिवर्सिटी में वे हमेशा ही प्रकृति का इतिहास जानने की कोशिश करते रहते। विविध पौधों के नाम जानने की कोशिश करते रहते और पौधों के टुकडो को भी जमा करते। ऐसा करते-करते प्रकृतिविज्ञान में उनकी रूचि बढती गयी और धीरे-धीरे उन्होंने प्रकृति की जानकारी इकट्टा करना शुरू किया। बाद में उन्होंने पौधों के विभाजन की जानकारी प्राप्त करना भी शुरू किया।

जब उनके पिता ने उन्हें कैम्ब्रिज के च्रिस्ट कॉलेज में मेडिकल की पढाई के लिये भेजा तब उन्होंने मेडिकल में अपना ध्यान देने की बजाये वे लेक्चर छोड़कर पौधों की जानकारी हासिल करने लगते।

इसके बाद वे बॉटनी के प्रोफेसर जॉन स्टीवन के अच्छे दोस्त बन गये और उनके साथ उन्होंने प्रकृतिविज्ञान के वैज्ञानिको से भी मुलाकात की। Charles Darwin Biography in Hindi

1831 तक डार्विन कैम्ब्रिज में ही रहे थे। वहा उन्होंने पाले की नेचुरल टेक्नोलॉजी का अभ्यास किया और अपने लेखो को भी प्रकाशित किया। उन्होंने प्रकृति के कृत्रिम विभाजन और विविधिकरण का भी वर्णन किया था। प्रकृति से संबंधित जानकारी हासिल करने के लिये उन्होंने कई साल वैज्ञानिक यात्रा भी की थी।

"एक वैज्ञानिक इंसान की कोई इच्छा नही होती, कोई आकर्षण नही होता – केवल पत्थरो का एक दिल होता है।"

1930 से 1950 तक कयी वैज्ञानिको ने जीवन चक्र को बताने की कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नही मिल पायी। लेकिन डार्विन ने सुचारू रूप से वैज्ञानिक तरीके से जीवन विज्ञान में जीवन में समय के साथ-साथ होने वाले बदलाव को बताया था।

1859 में डार्विन ने अपनी किताब "ऑन दी ओरिजिन ऑफ़ स्पिसेस" में मानवी विकास की प्रजातियों का विस्तृत वर्णन भी किया था। 1870 से वैज्ञानिक समाज और साथ ही साधारण मनुष्यों ने भी उनकी इस व्याख्या को मानना शुरू किया।

"सबसे अच्छी संस्कृति वही होती है जिसमे हम अपने विचारो को नियंत्रित कर सकते है "मुझे मूर्खो के एक्सपेरिमेंट पसंद है। क्योकि मै ही उन्हें हमेशा बनाता हूँ।"

भूवैज्ञानिक के रूप में (Charles Darwin As a Geologist)

बाद में 5 साल तक HMS बीगलआ में जलयात्रा करने के बाद उन्होंने स्वयं को भूवैज्ञानिक के रूप में स्थापित किया और साथ ही चलेस ल्येल की एकसमानता की योजना पर उन्होंने अपना लेख भी प्रस्तुत किया था और उनके इसी लेख की वजह से वे एक प्रसिद्ध लेखक भी बन गये थे। लेकिन जीव विज्ञान पर पुरी तरह से खोज करने के लिये उन्हें थोड़े समय की जरुरत थी।

जब अल्फ्रेड रुस्सेल वल्लास ने उन्हें समान विचारो पर अपना निबंध भेजा तभी 1858 में उन्होंने अपनी व्याख्या लिखी, जिसमे दोनों के सह-प्रकाशन से उन्होंने दोनों व्याख्याओ को प्रस्तुत किया था। डार्विन की प्रकृति से संबंधित व्याख्या के बाद प्रकृति में होने वाले विविधिकरण को लोग आसानी से जान पाये थे।

1868 में चार्ल्स डार्विन ने दूसरी पुस्तक प्रकाशित की। इस पुस्तक का नाम था "द वेरीएशन ऑफ एनीमल्स एंड प्लॅंट्स दॉमेस्तिकेशन" इस पुस्तक मे दर्शाया गया था की गिने-चुने जंतुओं का चयन करके कबूतरों, कुत्तों और दूसरे जानवरों की कई नस्ले पैदा की जा सकती है। इस प्रकार नए पेड़-पौधों की भी नई नस्ले पैदा की जा सकती है।

1871 में उन्होंने मानवी प्रजातियों और उनके लैंगिक चुनाव की भी जाँच की। पौधों पर की गयी उनकी खोज को बहुत सी किताबो में प्रकाशित भी किया गया था। उनकी अंतिम किताब में सब्जियों में फफूंद के निर्माण की क्रिया का वर्णन था, चार्ल्स डार्विन ने मानवी इतिहास के सबसे प्रभावशाली भाग की व्याख्या दी थी और इसी वजह से उन्हें कयी पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया था।

उन्होंने पौधों के फफूंद और वर्म की क्रिया से संबंधित बहुत से प्रभावशाली कार्य किये है। इसके साथ ही उन्हूने मानवी विकास और बदलाव को लेकर भी बहुत से प्रभावशाली कार्य की है, जिसकी सभी ने सराहना और प्रशंसा भी की है।

"किसी भी महान से महान कार्य की शुरुवात हम से ही होती है और कार्य करते समय हमारा काम में बने रहना बहुत जरुरी है।"

24 नवम्बर 1859 को प्रकाशित उनकी "The Origin of Species" पुस्तक के 1250 प्रतियों के संस्करण के ही दिन बिक गये। सभी वैज्ञानिकों, दार्शनिको, विचारको ने इसी स्वीकार किया। डार्विन अपने रोग और कष्ट को छिपाकर भी काम के लिए समर्पित रहते थे।

मृत्यु (Charles Darwin Death)

उन्होंने अपनी इच्छा व्यतीत की थी उनकी मृत्यु के बाद उन्हें मैरी चर्चयार्ड में दफनाया जाये लेकिन डार्विन बंधुओ की प्रार्थना के बाद प्रेसिडेंट ऑफ़ रॉयल सोसाइटी ने उन्हें वेस्टमिनिस्टर ऐबी से सम्मानित भी किया। इसके बाद उन्होंने अपनी सेवा कर रही नर्सो का भी शुक्रियादा किया। 19 अप्रैल 1882 में 73 साल की उम्र इंग्लैंड में उनका देहांत हो गया। उनकी अंतिम यात्रा 26 अप्रैल को हुई थी जिसमे लाखो लोग, उनके सहकर्मी और उनके सह वैज्ञानिक, दर्शनशास्त्री और शिक्षक भी मौजूद थे।

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