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Maulana Abul Kalam Azad Biography In Hindi | मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जीवन परिचय

Abul Kalam Azad Biography In Hindi | maulana abul kalam azad ka jeevan parichay | मौलाना अबुल कलाम आजाद का असली नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन है। लेकिन इन्हें मौलाना आजाद नाम से ही जाना जाता है।

Maulana Abul Kalam Azad Biography In Hindi  मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जीवन परिचय
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Maulana Abul Kalam Azad Biography In Hindi मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जीवन परिचय

Abul Kalam Azad Biography In Hindi | maulana abul kalam azad ka jeevan parichay | मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जीवन परिचय

  • नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन
  • जन्म 11 नवम्बर 1888
  • जन्मस्थान मक्का, सऊदी अरब
  • पिता मौलाना खैरुद्दीन
  • माता आलियाबेगम
  • पत्नी जुलेखा बेगम
  • व्यवसाय राजनीतिज्ञ, स्वतंत्रता सेनानी
  • पुरस्कार भारत रत्न
  • नागरिकता भारतीय

राजनीतिज्ञ मौलाना अबुल कलाम आजाद (Maulana Abul Kalam Azad Biography in Hindi)

Abul Kalam Azad Biography In Hindi | maulana abul kalam azad ka jeevan parichay | मौलाना अबुल कलाम आजाद का असली नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन है। लेकिन इन्हें मौलाना आजाद नाम से ही जाना जाता है। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के समय मौलाना आजाद मुख्य सेनानी में से एक थे। मौलाना आजाद, महात्मा गांधी के अनुयायी थे, उन्होंने गांधी जी के साथ अहिंसा का साथ देते हुए, सविनय अवज्ञा और असहयोग आंदोलन में बढ़चढ़ के हिस्सा लिया था। बाकि मुसलमान लीडर जैसे मोहम्मद अली जिन्ना आदि से अलग, मौलाना आजाद भारत देश की स्वतंत्रता को सांप्रदायिक स्वतंत्रता से बढ़ कर मानते थे।

प्रारंभिक जीवन (Maulana Abul Kalam Azad Early Life)

मौलाना अबुल कलाम आजाद 11 नवंबर, 1888 को सऊदी अरब के मक्का में एक बंगाली मौलाना के परिवार में जन्में थे। उनके पिता मौलाना मोहम्मद खैरुद्दीन एक विद्वान लेखक थे, जबकि उनकी मां अरब की थी। शुरुआत में मौलाना आजाद का परिवार बंगाल में रहता था, लेकिन बाद में 1857 में हुए, महाविद्रोह के बाद उनके परिवार को भारत छोड़कर अरब जाना पड़ा था, हालांकि जब मौलाना 2 साल के थे, तभी उनका परिवार फिर से भारत वापस आ गया, और कलकत्ता में रहने लगा।

शिक्षा (Maulana Abul Kalam Azad Education)

मौलाना आजाद को शुरुआत में परंपरागत इस्लामी शिक्षा घर पर ही दी गई। पहले तो इनके पिता ने पढ़ाया और फिर बाद में उनके लिए अध्यापक नियुक्त किए गए। आजाद शुरु से ही काफी प्रतिभावान बालक थे। इसलिए उन्हें बेहद कम उम्र में ही उर्दू, अरबी, बंगाली, हिन्दी, इंग्लिश, फारसी समेत कई भाषाएं सीख ली थी।

उन्हें बीजगणित, दर्शनशास्त्र, ज्यामिति गणित का भी काफी अच्छा ज्ञान प्राप्त हो गया था। शुरु से ही पढ़ाई के शौक की वजह से उनके घऱ में कई किताबें रखीं थी, जिन्हें पढ़कर उन्होंने इतिहास, विश्व, राजनीति के बारे में भी अच्छी जानकारी हासिल कर ली थी।

विवाह (Maulana Abul Kalam Azad Marriage)

मौलाना अबुल कलाम का विवाह 13 वर्ष की आयु में जुलेखा बेगम के साथ हुआ था।

पत्रकारिता करियर (Maulana Abul Kalam Azad Journalism Career)

उन्होंने अपने शुरुआती करियर में कई पत्रिकाओं में काम किया। इसलिए उन्होंने कुरान के अन्य भावरूपो पर भी लेख लिखा साथ ही उन्होंने पवित्र कुरान के सिद्धांतों की व्याख्या अपनी दूसरी रचनाओं में की। वे साप्ताहिक समाचार पत्र "अल-मिस्वाह" के संपादक थे। उनकी विद्वता ने उन्हें परम्पराओं के अनुसरण का त्याग करना और नवीनतम सिद्धांतो को अपनाने का निर्देश दिया, वे आधुनिक शिक्षावादी सर सैयद अहमद खान के विचारों से सहमत थे। उन्होंने जमालुद्दीन अफगानी और अलीगढ के अखिल इस्लामी सिद्धांतो और सर सैय्यद अहमद खान के विचारो में अपनी दिलचस्पी बढ़ाई।

स्वतंत्रता आंदोलन में (Abul Kalam Azad As a Freedom Fighter) :

अखिल इस्लामी भावना से ओतप्रोत होकर उन्होंने अफगानिस्तान, इराक, मिश्र, सीरिया और तुर्की का दौरा किया। वहा इराक में निर्वासित क्रांतिकारियों से मिले जो ईरान में संवैधानिक सरकार की स्थापना के लिए लड़ रहे थे। मिश्र में उन्होंने शेख मुहम्मद अब्दुह और सईद पाशा और अरब देश के अन्य क्रांतिकारी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की इन सभी मुलाकातों ने उन्हें राष्ट्रवादी क्रांतिकारी में तब्दील कर दिया।

विदेश से लौटने पर आज़ाद ने बंगाल के दो प्रमुख क्रांतिकारियों अरविन्द घोष और श्री श्याम शुन्दर चक्रवर्ती से मुलाकात की और ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन में शामिल हो गए। यह वह समय था, जब मौलाना आज़ाद एक कट्टरपंथी राजनीतिक विचारधारा रखते थे। जो अचानक भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के साथ बदलकर राष्ट्रीयता के रूप में विकसित हो गया। वे ब्रिटिश राज और मुसलमानों के सांप्रदायिक मुद्दों से बढ़कर देश की आजादी को कहीं ज्यादा तवज्जो देते थे।

राजनीतिक करियर (Maulana Abul Kalam Azad Political Career)

मौलाना अबुल कलाम आजाद "खिलाफत आन्दोलन" के दौरान एक नेता के रूप में महात्मा गांधी के बेहद करीबी बन गए। 1923 में मौलाना अबुल कलाम भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अध्यक्ष पद पर निय़ुक्त किए गये। अबुल कलाम आजाद ने हिन्दू-मुस्लिम एकता का समर्थन किया, और पाकिस्तान के एक अलग मुस्लिम देश की माँग का विरोध भी किया। मौलाना आजाद 1923 में हुए, धरसाना सत्याग्रह के सबसे महत्वपूर्ण नेताओं में से एक थे।

1940 में काँग्रेस के अध्यक्ष बने और 1945 तक इस पद पर कार्य किया। उस समय चल रहे 'भारत छोड़ो आन्दोलन' में भी अबुल कलाम शामिल हुए। अबुल कलाम आजाद ने भारतीय संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए संविधान सभा में कार्य किया, और 1952 से 1957 तक लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। अबुल कलाम आजाद ने वर्ष 1956 में दिल्ली के यूनेस्को जनरल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। Abul Kalam Azad As President of Congress

स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री (Maulana Abul Kalam Azad Education Minister of India)

वह स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे। और उन्होंने 11 वर्षो तक राष्ट्र की नीति का मार्गदर्शन किया। भारत के पहले शिक्षा मंत्री बनने पर उन्होंने नि:शुल्क शिक्षा, भारतीय शिक्षा पद्धति, उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना में अत्यधिक के साथ कार्य किया। मौलाना आज़ाद को ही 'भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान' अर्थात् 'IIT और 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग' की स्थापना का श्रेय है।

वे संपूर्ण भारत में 10+2+3 की समान शिक्षा संरचना के पक्षधर रहे। यदि मौलाना अबुल कलाम आज ज़िंदा होते तो वे नि:शुल्क शिक्षा के अधिकार विधेयक को संसद की स्वीकृति के लिए दी जाने वाली मंत्रिमंडलीय मंजूरी को देखकर बेहद प्रसन्न होते। शिक्षा का अधिकार विधेयक के अंतर्गत नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा एक मौलिक अधिकार है।

साहित्य रचनाएं (Maulana Abul Kalam Azad Compositions)

मौलाना अबुल कलाम नेअल-हिलाल नामक एक साप्ताहिक उर्दू पत्रिका का सूत्रपात किया था। किसी कारण वश 1914 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया, इसके बाद उन्होंने "अल-बलाघ" नामक एक नई पत्रिका की शुरुआत की। अबुल कलाम की उल्लेखनीय रचनाओं में से ''गुबार ए खातिर'' लेख उनके प्रसिद्ध लेखों में से एक है। 1942 और 1946 के बीच लिखा गया था।

अबुल कलाम आजाद ने ब्रिटिश शासन की आलोचना करते हुए, और भारत के लिए स्व-शासन की हिमायत में कई रचनाओं को प्रकाशित किया। अबुल कलाम आजाद की भारत के स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित संपूर्ण पुस्तक का शीर्षक 'इंडिया विंस फ्रीडम' 1957 में प्रकाशित हुई थी।

पुरस्कार (Maulana Abul Kalam Azad Awards)

  • 1989 में मौलाना आजाद के जन्म दिवस पर, भारत सरकार द्वारा शिक्षा को देश में बढ़ावा देने के लिए 'मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन' बनाया गया।
  • मौलाना आजाद के जन्म दिवस पर 11 नवम्बर, 1989 को हर साल 'नेशनल एजुकेशन डे' मनाया जाता है।
  • भारत के अनेकों शिक्षा संसथान, स्कूल, कॉलेज के नाम इनके पर रखे गए है।
  • मौलाना आजाद को 'भारत रत्न' से भी सम्मानित किया गया है।

मृत्यु (Maulana Abul Kalam Azad Death)

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जी की मृत्यु 70 वर्ष की आयु में

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