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Nick Vujicic Biography In Hindi | निक वुजिसिक का जीवन परिचय

Nick Vujicic Biography In Hindi | निक वुजिसिक ने मुश्किलों से डटकर सामना किया। आज उन्हें पूरी दुनिया इतिहास के नाम से जानती है। लेकिन निक वुजिसिक का जीवन जन्म से ही बहुत संघर्षपूर्ण रहा है। ऐसा नहीं है कि उन्होंने हार नहीं मानी। जान तक देने की कोशिश की।

Nick Vujicic Biography In Hindi | निक वुजिसिक का जीवन परिचय
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Nick Vujicic Biography In Hindi | निक वुजिसिक का जीवन परिचय

Nick Vujicic Biography In Hindi | निक वुजिसिक का जीवन परिचय

  • पूरा नाम निकोलस वुजिसिक
  • जन्म 4 दिसंबर, 1982
  • जन्मस्थान मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया
  • पिता बोरिस्लाव वुजिसिक
  • माता दुशांका वुजिसिक
  • पत्नी कनै मियहारा
  • पुत्र देजन लेवी वुजिसिक
  • पुत्री ऐली लॉरेल, कियोशी जेम्स, ओलिविया मेई
  • व्यवसाय प्रेरक वक्ता, एक्टर
  • कंपनी एटिट्यूड इज़ एल्टिट्यूड (2007)
  • नागरिकता अमेरिका

प्रेरक वक्ता निक वुजिसिक (Nick Vujicic Biography in Hindi)

Nick Vujicic Biography In Hindi | निक वुजिसिक ने मुश्किलों से डटकर सामना किया। आज उन्हें पूरी दुनिया इतिहास के नाम से जानती है। लेकिन निक वुजिसिक का जीवन जन्म से ही बहुत संघर्षपूर्ण रहा है। ऐसा नहीं है कि उन्होंने हार नहीं मानी। जान तक देने की कोशिश की। बाद में अपने भाषण से लेकर अब तक निक पुरे विश्व की यात्रा कर रहे है और अपनी प्रेरणादायी घटनाओ से लोगो को प्रेरित कर रहे है।

प्रारंभिक जीवन (Nick Vujicic Early Life)

निक का जन्म 4 दिसंबर 1982 को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हुआ था। उनके पिता बोरिस्लाव वुजिसिक तथा माँ दुशांका वुजिसिक मूल रूप से यूगोस्लाविया के सर्बिया के थे और यहाँ ऑस्ट्रेलिया में आ बसे थे। ऑस्ट्रेलिया में बोरिस्लाव वुजिसिक एक अकाउण्टेंट के तौर पर काम करने लगे तथा दुशांका वुजिसिक बच्चों के एक हॉस्पिटल में नर्स बन गईं।

टेट्रा अमेलिया सिंड्रोम से पीड़ित इस समय पूरे विश्व में केवल सात ही व्यक्ति ज़िंदा हैं जिनमें से एक निक हैं। निक के जन्म के समय जब नर्स उसे लेकर उसकी मां के पास आई तो उसने उसे लेने से ही नहीं देखने तक से मना कर दिया। लेकिन बाद में माता-पिता ने परिस्थितियों को स्वीकार कर लिया और निक की परवरिश में लग गए।

निक के जन्म के समय उसके केवल एक पैर के स्थान पर कुछ जुड़ी हुई उँगलियाँ मात्र थीं। डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके निक की उँगलियों को अलग-अलग कर दिया ताकि वो उनकी सहायता से हाथों की उँगलियों की तरह चीज़ों को पकड़ने, पुस्तकों के पन्ने पलटने व दूसरे बहुत ज़रूरी कार्य कर सकें।

आज निक इधर-उधर जाने के लिए इलैक्ट्रिक व्हील चेयर का इस्तेमाल करते हैं। चाहे इलैक्ट्रिक व्हील चेयर से कहीं जाना हो अथवा कम्प्यूटर या मोबाइल फोन का प्रयोग करना हो निक अपने पैर की उँगलियों से ही सारा काम करते हैं। सोचिए निक को ये सब सीखने और करने के लिए कितनी हिम्मत जुटानी पड़ी होगी।

निक का आत्महत्या का प्रयास (Nick Vujicic Suicide Attempt)

निक को पढ़ाई, खेल-कूद व अपना रोज़मर्रा का काम करने में बड़ी परेशानी होती थी। स्कूल में बच्चे भी उसका मज़ाक़ उड़ाते थे। इन सब चीज़ों से मायूस व दुखी होकर दस वर्ष की उम्र में एक बार निक ने पानी के टब में डूबकर आत्महत्या तक करने की कोशिश की लेकिन उसके माता-पिता के प्यार और प्रोत्साहन ने उसे आगे बढ़ने का हौसला प्रदान किया। कभी आत्महत्या का प्रयास करने वाले निक आज हमें प्रेरित करते हुए कहते हैं –

अगर आपके साथ चमत्कार नहीं हो सकता, तो खुद एक चमत्कार बन जाइए।

आत्मनिर्भर बनने की जिद (Nick Vujicic Insistence on Becoming Self Sufficient)

निक के माता-पिता उसे हर तरह से आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे। छोटी उम्र से ही निक के माता-पिता उसे पानी के तैरना सिखाने लगे। 6 साल की उम्र में उसे पंजे की सहायता से टाइप करना सिखाने लगे। विशेषज्ञों की मदद से उन्होंने निक के लिए प्लास्टिक का ऐसा डिवाइस बनवाया जिनकी सहायता से निक ने पैंसिल और पैन पकड़ना और लिखना सीखा।

निक के माता-पिता ने निक को स्पेशल स्कूल में भेजने से मना कर दिया। वो चाहते थे कि निक सामान्य स्कूल में सामान्य बच्चों के साथ ही पढ़े। इसमें बहुत सी मुश्किलें आईं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सामान्य बच्चों के साथ पढ़ने-लिखने और काम करने का ये लाभ हुआ कि निक उन्हीं की तरह काम करने लगे।

पंजे की सहायता से निक ने न केवल पढ़ना-लिखना सीखा अपितु फुटबॉल और गोल्फ़ खेलना और तैरना भी सीखा। निक पंजे की सहायता से ही न केवल ड्रम बजा लेते हैं बल्कि मछली पकड़ना, पेंटिंग और स्काई डाइविंग तक कर लेते हैं। मुँह की सहायता से गियर बदलकर निक कार भी आसानी से चला लेते हैं।

जीवन की दिशा बदली (Nick Vujicic Changed His Life)

निक जब 13 साल के थे तो एक दिन उनकी माँ ने अख़बार में प्रकाशित एक लेख निक को पढ़कर सुनाया जिसमें एक विकलांग व्यक्ति के संघर्ष और सफलता की कहानी थी। निक को अहसास हुआ कि दुनिया में वो अकेला विकलांग नहीं है और परिश्रम व संघर्ष द्वारा आगे बढ़ा जा सकता है। उसके बाद उसके जीवन की दिशा ही बदल गई।

उसे महसूस हुआ कि ईश्वर ने उसे कुछ अलग करने के लिए ही ऐसी स्थिति में डाला है। उसे तो स्वयं प्रेरणा व प्रोत्साहन की ज़रूरत थी लेकिन उसने संकल्प लिया कि वो स्वयं लोगों को प्रेरणा व प्रोत्साहन प्रदान करेगा जिससे लोगों में व्याप्त निराशा व अकर्मण्यता दूर हो सके और वे उत्साहपूर्वक कार्य करते हुए अच्छी तरह से जीवन व्यतीत कर सकें।

मोटिवेशनल स्पीकर और एक्टर के रूप (Nick Vujicic Motivational Speaker and Actor) :

  • 19 साल की उम्र में निक ने एक प्रेरक वक्ता के रूप में कार्य करना प्रारंभ कर दिया।
  • 21 वर्ष की उम्र में निक ने अकाउण्टिंग व फाइनांस में ग्रेजुएशन किया।
  • 2005 में उन्होंने एक अन्तराष्ट्रीय नॉन-प्रॉफिट मिनिस्ट्री, लाइफ विथआउट लिम्बस संगठन की स्थापना की।
  • 2007 में उन्होंने एटिट्यूड इज़ एल्टिट्यूड नाम से एक कंपनी खोली और एक प्रेरक वक्ता के रूप में कार्य करने लगे।
  • 2009 में उन्होंने एक शॉर्ट फिल्म "ध बटरफ्लाय सर्कस" की, जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का अवार्ड दिया गया।

शादी (Nick Vujicic Marriage)

2008 में उनकी मोटिवेशनल स्पीच सुनने आई कनै मियहारा से उनकी मुलाक़ात हुई जो प्रेम में बदल गयी और 2012 में उन्होंने शादी कर ली।

अवार्ड (Nick Vujicic Awards) :

  • 1990 में उन्होंने अपनी इस बहादुरी के लिये ऑस्ट्रेलियन यंग सिटीजन अवार्ड भी जीता।
  • 2005 में यंग ऑस्ट्रेलियन ऑफ़ द इयर पुरस्कार के लिये उनका नाम निर्देशन भी किया गया था।

'जिंदगी में कुछ भी असंभव नहीं है' :

  • 33 वर्षीय निक वुजिसिक आज ना सिर्फ़ एक सफल प्रेरक वक्ता हैं, बल्कि वे वह सब करते है जो एक सामान्य व्यक्ति करता है।
  • जन्म से ही हाथ-पैर न होने के बावजूद वे वे गोल्फ व फुटबॉल खेलतें है, तैरते हैं, स्काइडाइविंग और सर्फिंग भी करतें हैं।
  • यह अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, लेकिन इससे भी ज्यादा प्रभावित करने वाली बात है, उनकी जीवन के प्रति खुशी और शांति की सम्मोहक भावना। आज वे दुनिया को जिंदगी जीने का तरीका सिखा रहे है।
  • निक ने भौतिक सीमाओं में जकड़े रहने के बजाए अपने जीवन को नियंत्रित करने की शक्ति पा ली और आशा के इसी संदेश के साथ 44 से अधिक देशों की यात्रा की है।
  • ज़िन्दगी द्वारा दी गयी हर चीज को खुलेमन से स्वीकार करना चाहिए, चाहे वे मुश्किलें ही क्यों ना हों। मुश्किलें ही वो सीढ़ियां हैं जिन पर चढ़कर ही हमे ज़िन्दगी में कामयाबी और खुशी मिलेगी।
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