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Pherozeshah Mehta Biography In Hindi | फिरोजशाह मेहता का जीवन परिचय

Pherozeshah Mehta Biography In Hindi | सर फिरोजशाह मेहता Pherozeshah Mehta भारतीय राजनितिक नेता, कार्यकर्त्ता और वकील थे। फिरोजशाह मेहता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रभावशाली नेता थे।

Pherozeshah Mehta Biography In Hindi
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Pherozeshah Mehta Biography In Hindi

Pherozeshah Mehta Biography In Hindi | फिरोजशाह मेहता का जीवन परिचय

  • पूरा नाम फिरोजशाह मेहरवांजी मेहता
  • जन्म 4 अगस्त 1845
  • जन्मस्थान मुंबई
  • पिता मेहरवांजी
  • शिक्षण बॅरिस्टर
  • व्यवसाय भारतीय राजनीतिज्ञ
  • नागरिकता भारतीय

भारतीय राजनेता फिरोजशाह मेहता (Pherozeshah Mehta Biography in Hindi)

Pherozeshah Mehta Biography In Hindi | सर फिरोजशाह मेहता Pherozeshah Mehta भारतीय राजनितिक नेता, कार्यकर्त्ता और वकील थे। फिरोजशाह मेहता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रभावशाली नेता थे। उनके भारतीय इतिहास में महत्त्व को हम इस तरह समझ सकते है की इतिहास के कई नेता उनसे क़ानूनी सलाह लेते थे। फिरोजशाह मेहता जी कभी सीधे तरीके से ब्रिटिशो से नहीं लडे बल्कि वे क़ानूनी दावपेचो से ब्रिटिशो को धुल चटाते थे। 1873 में वे बॉम्बे नगरपालिका के नगरीय कमिश्नर बने साथ ही कई बार अध्यक्ष भी बने। 1890 में उन्हें भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में भी चुना गया।

प्रारंभिक जीवन (Pherozeshah Mehta Early Life)

फिरोजशाह मेहता का जन्म 4 अगस्त, 1845 को मुंबई के एक प्रसिद्ध व्यवसायी परिवार में हुआ था। मेहता एल्फिंस्टन कॉलेज से ग्रेजुएट हुए और 1864 में उन्होंने M.A. की परीक्षा पास की, और इसी सम्मान के साथ 6 महीने बाद वे पारसी परिवार से मुंबई विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बने।

बाद में वे क़ानून की पढाई करने के लिए इंग्लैंड गये जहा लन्दन में लिंकोन इन् में उन्होंने शिक्षा प्राप्त की। वहाँ उनका दादाभाई नौरोजी से भी सम्पर्क हुआ। वे वहाँ भारत के पक्ष में आवाज़ उठाने वाली संस्थाओं से भी जुड़े रहे। 1868 में वहीं से वकालत (बैरिस्टर) की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारत लौटे।

राजनीतिक करियर (Pherozeshah Mehta Political Career)

मुम्बई के कमिश्नर आर्थर क्रॉफ़र्ड का एक क़ानूनी मामले में बचाव करते हुए उन्होंने स्थानीय शासन के सुधार की आवश्यकता महसूस की और 1872 के 'नगरपालिका अधिनियम' की रूपरेखा तैयार की, जिसके कारण वह 'बंबई स्थानीय शासन के जनक' कहलाए।

1873 में वह इसके आयुक्त नियुक्त हुए और 1884-85 तथा 1905 में अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। 1886 से बंबई विधान परिषद के सदस्य रहते हुए वह 1893 में गवर्नर-जनरल की सर्वोच्च विधान परिषद के लिए चुने गए।

कांग्रेस से उनका सम्बन्ध उसकी स्थापना के समय ही हो गया था। उस समय के अनेक नेताओं की भाँति फिरोज़शाह मेहता भी नरम विचारों के राजनीतिज्ञ थे। 1890 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के छठे अधिवेशन की अध्यक्षता की। 1892 में पांचवे बंम्बई प्रांतीक समेंलनके अध्यक्षस्थान पर थे।

1910 में इंग्लैंड की संक्षिप्त यात्रा के बाद वह बंबई विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त हुए। 1911 में उन्होंने उस सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया की स्थापना में योगदान किया, जो भारतीयों द्वारा वित्त पोषित तथा नियंत्रित था। 1913 में 'द बॉम्बे क्रॉनिकल' नामके अखबार का प्रकाशन उन्होंने किया।

सर फिरोजशाह मेहता इतिहास के महान क्रांतिकारियों में से ही एक थे। वे अपने क़ानूनी दावपेचो से बड़े से बड़े अंग्रजी अधिकारी को भी धुल चटा देते। उन्होंने अपने क़ानूनी ज्ञान की बदौलत उस समय कई राजनीतिज्ञों की सहायता की और उन्हें ब्रिटिश अधिकारियो से बचाया भी। ब्रिटिश राज होने के बावजूद उस समय कई ब्रिटिश अधिकारी सर मेहता से डरते थे।

शिक्षा के पक्षधर (Pherozeshah Mehta Importance for Education)

फिरोजशाह मेहता शिक्षा पर बहुत ज़ोर देते थे। नौकरशाही को जनता की माँ-बाप समझने की प्रवृत्ति का उन्होंने सदा विरोध किया। वे अपने समय के उन थोड़े से नेताओं में से थे, जिनका जनता और अंग्रेज़ सरकार दोनों सम्मान करते थे। समय-समय पर वे सरकार से भिड़ भी जाते थे। अपने जीवन के अन्तिम दिनों में फिरोज़शाह मेहता ने अंग्रेज़ी दैनिक पत्र 'बॉम्बे क्रॉनिकल' का प्रकाशन आरम्भ किया। बाद में इस पत्र का देश के स्वतंत्रता संग्राम में बड़ा योगदान रहा।

मृत्यु (Pherozeshah Mehta Death)

70 वर्ष की उम्र में 5 नवंबर, 1915 के दिन फिरोजशाह मेहता का देहावसान हो गये। वो हमेशा संवैधानिक तरीकों से आजादी पाने की दिशा में सतत प्रयत्न करते रहे, इनके योगदान को आज भी याद किया जाता है।

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