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Janskati Samachar

Pythagoras Biography in Hindi | पाइथागोरस का जीवन परिचय

Pythagoras Biography in Hindi | पाइथागोरस प्राचीन यूनान के एक महान गणितज्ञ और दार्शनिक थे। गणित के क्षेत्र में इन्हें आज भी ‘पाइथागोरस का प्रमेय’ के लिए ख्याति प्राप्त है। हालाँकि गणित के क्षेत्र में योगदान से इत्तर पाइथागोरस को एक संगीतकार, रहस्यवादी, वैज्ञानिक और धार्मिक आंदोलन के संस्थापक के तौर पर भी पश्चिम के इतिहास में सम्मान प्राप्त है।

Pythagoras Biography in Hindi | पाइथागोरस का जीवन परिचय
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Pythagoras Biography in Hindi | पाइथागोरस का जीवन परिचय

Pythagoras Biography in Hindi | पाइथागोरस का जीवन परिचय

  • पूरा नाम पाइथागोरस
  • जन्म 571 ईसा पूर्व
  • जन्मस्थान सामोस, यूनान
  • पिता मनेसार्चस
  • माता पयिथिअस
  • पत्नी थेनो
  • पुत्र अराइग्नोट, मेन्स्कर्कस, टेलोजेस, ईसारा, डेमो, माइया
  • व्यवसाय गणितज्ञ और दार्शनिक
  • नागरिकता/राष्ट्रीयता ग्रीक, प्राचीन यूनानी

महान गणितज्ञ पाइथागोरस (Pythagoras Biography in Hindi)

Pythagoras Biography in Hindi | पाइथागोरस प्राचीन यूनान के एक महान गणितज्ञ और दार्शनिक थे। गणित के क्षेत्र में इन्हें आज भी 'पाइथागोरस का प्रमेय' के लिए ख्याति प्राप्त है। हालाँकि गणित के क्षेत्र में योगदान से इत्तर पाइथागोरस को एक संगीतकार, रहस्यवादी, वैज्ञानिक और धार्मिक आंदोलन के संस्थापक के तौर पर भी पश्चिम के इतिहास में सम्मान प्राप्त है। इसकी वजह छठी शताब्दी ईसा पूर्व में उनका धार्मिक शिक्षण और दर्शन में महत्वपूर्ण योगदान का होना है। उन्होंने 'पायथागोरियन पंथ' की स्थापना की थी।

प्रारंभिक जीवन (Pythagoras Early Life)

पाइथागोरस का जन्म 570 ईसा पूर्व में यूनानी द्वीप सामोस में हुआ था। ऐसा माना जाता है, कि उनका पिता मनेसार्चस लेबनान स्थित टायर के एक व्यापारी थे और माँ पयिथिअस उस द्वीप की मूल निवासी थीं, जो रत्नों का व्यापार करते थे, ऐसा भी कहा जाता है, कि पाइथागोरस के दो या तीन भाई-बहन भी थे। पाइथागोरस का बचपन का ज्यादातर समय सामोस में ही व्यतीत हुआ था।

शिक्षा (Pythagoras Education)

पाइथागोरस ने सीरिया और इटली के कुछ प्रसिद्ध विद्धानों से शिक्षा भी ग्रहण की। पाइथागोरस अपनी यात्राओं के दौरान अलग-अलग देशों के विद्धानों से शिक्षा ग्रहण करते थे। और इसी दौरान उन्होंने ज्यामितीय के सिद्धान्तों का अध्ययन भी किया था।

पाइथागोरस ने सीरिया के विद्धानों से महत्वपूर्ण विषयों पर ज्ञान प्राप्त करने के अलावा शल्डिया के विद्धानों को भी अपना गुरु बनाया और महत्वपूर्ण विषयों पर ज्ञान प्राप्त किया। आपको बता दें कि, पाइथागोरस को शुरु से ही पढ़ने -लिखने में बेहद रुचि थी, इसलिए हर समय वे ज्ञान अर्जित करने में लगे रहते थे, उन्होंने शिक्षा अपने शिक्षक फेरेसायडस से ली थी, जिनसे उन्होंने दर्शनशास्त्र की शिक्षा प्राप्त हुई।

निजी जीवन (Pythagoras Married Life)

पाइथागोरस की शादी थेनो नाम की एक दार्शनिक महिला से हुई थी। पाइथागोरस के तीन बेटियां और एक बेटा भी था। ऐसा भी उल्लेखित है, कि जब पाइथागोरस के धार्मिक पंथ में दो अलग-अलग गुटों में बंट गए थे, तब उनमें से एक गुट का नेतृत्व उनकी पत्नी थेनो और उनकी बेटियों ने किया था।

करियर (Pythagoras Starting Career)

पाईथागोरस ने अपनी विश्वविख्यात प्रमेय का आरम्भ किया और इस प्रमेय के प्रयोगात्मक प्रदर्शन भी किया। वास्तव में यदि कहा जाए तो पाईथागोरस ही वह प्रथम व्यक्ति थे। जिन्होंने ज्यामितीय की प्रमेयो के लिए उत्पति प्रणाली की नीव डाली। यह भी कहा जाता है, कि पाईथागोरस ने यह भी सिद्ध करके दिखाया कि किसी भी त्रिभुज के तीनो अंत:कोणों का योग दो समकोण के बराबर होता है।

वे फोनेशिया में टायर और बैब्लोस में शिष्य बन कर भी रहे। इजिप्ट में उन्होंने कुछ ज्यामितीय सिद्धांतों को सिखा जिससे प्रेरित होकर उन्होंने अंततः प्रमेय दी जो अब उनके नाम से जानी जाती है। इस प्रमेय के अनुसार किसी समकोण त्रिभुज में दो भुजाओं के वर्गो का योग तीसरी भुजाओं का योग तीसरी भुजा के वर्ग के बराबर होता है।

समकोण त्रिभुज में यदि एक भुजा की लम्बाई तीन सेमी हो और दुसरी भुजा की लम्बाई चार सेमी हो तो कर्ण की लम्बाई पांच सेमी होगी। अभिप्राय यह है, कि तीन सेमी की भुजा में एक एक सेमी के नौ वर्ग होंगे और चार सेमी की भुजा में एक सेमी के सोलह वर्ग होंगे। अर्थात इन दोनों का योग 25 होता है। इस प्रकार सबसे लम्बी भुजा में 25 वर्ग होंगे अर्थात उस भुजा की लम्बाई पांच सेमी होगी।

पाइथागोरस को संगीत में रूचि (Pythagoras Interested in Music)

पाइथागोरस को संगीत में भी रूचि थी, वे स्वयं एक बेहतर वीणा वादक भी थे। इसलिए वह संगीत में सुधार लाना चाहते थे। कहा जाता है कि संगीत की इसी कमी को दूर करने के लिए उन्होंने संगीत के नोट को गणितीय समीकरणों में अनुवाद करने की खोज की थी।

पैथोगोरियंस पंथ की स्थापना (Pythagoras Establishment of Creed)

क्रोटन में पाइथागोरस ने विस्तृत तौर पर अध्यापन का कार्य शुरू किया था। जल्दी ही यहाँ उनके अनुयायिओं की संख्या बढ़ने लगी। यहाँ उन्होंने एक गुप्त धार्मिक पंथ की स्थापना की माना जाता है, कि पाइथागोरस का यह गुप्त पंथ ओर्फिक कल्ट से मिलता-जुलता था। और शायद वह उससे प्रभावित भी था पाइथागोरस ने अपने नवोदित पंथ के माध्यम से क्रोटन के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में सुधार लाने का प्रयास शुरू कर दिया।

वे वहां के नागरिकों को जीवन में सदाचार का पालन करने के लिए प्रेरित करते थे। आगे जाकर अनुयायिओं का यह समूह पैथोगोरियंस के नाम से जाना जाने लगा। पाइथागोरस द्वारा स्थापित केंद्र के संचालन करने के नियम बहुत ही कठोर थे। हालाँकि उन्होंने लड़के और लड़कियों, दोनों के लिए समान रूप से अपने केंद्र में प्रवेश लेने का नियम बनाया था।

केंद्र के सेवादार या कार्यकर्ता को मेथमेत्कोई कहा जाता था। ये सेवादार अपना घर-द्वार छोड़कर केंद्र यानि मठ में ही रहते थे। उनके लिए शाकाहारी भोजन अनिवार्य था, परन्तु केंद्र के आसपास रहने वाले जो छात्र वहां केवल अध्ययन करते थे। उन्हें अकउस्मेतिकोई कहा जाता था।

उन्हें अपने घर में रहने और कुछ भी खाने की छूट थी। कहना गलत नहीं होगा कि पाइथागोरस ने धार्मिक शिक्षा, सादा भोजन, व्यायाम और दार्शनिक शिक्षा से भरपूर जीवन का अनुसरण किया। इस जीवन के लिए पाइथागोरस ने संगीत को आवश्यक माना था। इसलिए उनके अनुयायिओं के लिए भजन गाना नित्यक्रम में शामिल था। आत्मसुधी और कई शारीरिक बीमारियों के ईलाज के लिए वे वीणा की धुनों का उपयोग करते थे। इसी तरह स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए सोने से पूर्व कविता पाठ करने का नियम था।

मृत्यु (Pythagoras Death)

पैथोगोरियंस का 80 वर्ष की आयु में ईसा से 500 वर्ष पूर्व करीब मेटापोंट्म इटली में उनकी मृत्यु हुई थी। उनके मृत्यु का कारण सिराकुसंस समूह के बीच संघर्ष में लोगों ने उनकी हत्या कर दी थी।

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