Top
Janskati Samachar

सद्गुरु जग्गी वासुदेव की जीवनी | Sadhguru Jaggi Vasudev Biography in Hindi

Sadhguru Jaggi Vasudev Biography in Hindi | सद्गुरु जग्गी वासुदेव एक विश्व प्रसिद्ध रहस्यवादी और भारतीय मूल के योगी हैं। ईशा योग और ईशा फाउंडेशन की स्थापना के संस्थापक, वह बहुत प्रसिद्ध कवि थे।

Sadhguru Jaggi Vasudev Biography in Hindi
X

Sadhguru Jaggi Vasudev Biography in Hindi

सद्गुरु जग्गी वासुदेव की जीवनी | Sadhguru Jaggi Vasudev Biography in Hindi

  • नाम सद्गुरु जग्गी वासुदेव
  • जन्म 3 सितंबर 1957
  • जन्मस्थान मैसूर, कर्नाटक, भारत
  • पिता डॉ वासुदेव (ओप्थाल्मोलॉजिस्ट)
  • माता सुशीला वासुदेव
  • पत्नी विजया कुमारी
  • पुत्री राधे जग्गी
  • शिक्षा अंग्रेजी साहित्य में स्नातक
  • पुरस्कार पद्म विभूषण, इंदिरा गाँधी पर्यावरण पुरस्कार
  • नागरिकता भारतीय

योगी सद्गुरु जग्गी वासुदेव (Sadhguru Jaggi Vasudev Biography in Hindi)

सद्गुरु जग्गी वासुदेव एक विश्व प्रसिद्ध रहस्यवादी और भारतीय मूल के योगी हैं। ईशा योग और ईशा फाउंडेशन की स्थापना के संस्थापक, वह बहुत प्रसिद्ध कवि थे। जीवन में उनका उद्देश्य लोगों की अपनी आध्यात्मिकता को प्रकट करने में मदद करना है सद्गुरु जग्गी वासुदेव के कई योग केंद्र हैं, जो कि भारत के विभिन्न शहरों और संयुक्त राज्य अमेरिका में भी स्थापित किए गए हैं। वह संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी विश्व शांति सम्मेलन का एक प्रतिनिधि था और यहां तक कि 2006 और 2007 में विश्व आर्थिक मंच में भी भाग लिया।

प्रारंभिक जीवन (Sadhguru Jaggi Vasudev Early Life)

सद्गुरु जग्गी वासुदेव का जन्‍म 3 सितंबर 1957 को कर्नाटक राज्‍य के मैसूर शहर में हुआ। उनके पिता वासुदेव एक डॉक्टर थे और माता का नाम सुशीला वासुदेव था। बचपन से ही वासुदेव दुसरे बालको से अलग थे। उन्हें कुदरत से खूब लगाव था।

अक्‍सर ऐसा होता था वे कुछ दिनों के लिये जंगल में गायब हो जाते थे, जहां वे पेड़ की ऊँची डाल पर बैठकर हवाओं का आनंद लेते और अनायास ही गहरे ध्‍यान में चले जाते थे। जब वे घर लौटते तो उनकी झोली सांपों से भरी होती थी जिनको पकड़ने में उन्‍हें महारत हासिल है।

शिक्षा (Sadhguru Jaggi Vasudev Education)

11 वर्ष की उम्र में जग्गी वासुदेव ने योग का अभ्यास करना शुरु किया। इनके योग शिक्षक थे श्री राघवेन्द्र राव, जिन्‍हें मल्‍लाडिहल्‍लि स्वामी के नाम से जाना जाता है। मैसूर विश्‍वविद्यालय से उन्‍होंने अंग्रजी भाषा में स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त की।

शादी (Sadhguru Jaggi Vasudev Marriage)

जग्गी वासुदेव जी की शादी विजया कुमारी जी के साथ हुई। उनकी एक बेटी है जिसका नाम राधे जग्गी रखा गया।

आध्यात्मिक जीवन (Sadhguru Jaggi Vasudev Spiritual Life)

सद्गुरु जग्गी वासुदेव को 25 वर्ष की उम्र में अनायास ही बड़े विचित्र रूप से गहन आत्‍म अनुभूति हुई, जिसने उनके जीवन की दिशा को ही बदल दिया। एक दोपहर, जग्गी वासुदेव मैसूर में चामुंडी पहाड़ियों पर चढ़े और एक चट्टान पर बैठ गए। तब उनकी आँखे पूरी खुली हुई थीं। अचानक, उन्‍हें शरीर से परे का अनुभव हुआ। उन्हें लगा कि वह अपने शरीर में नहीं हैं, बल्कि हर जगह फैल गए हैं, चट्टानों में, पेड़ों में, पृथ्वी में।

जब तक वह अपने होश में वापस आये, उससे पहले से ही शाम हो गई थी। उसके बाद के दिनों में, वासुदेव ने एक बार फिर से इसी स्थिति का अनुभव किया। वह अगले 3 या 4 दिनों के लिए भोजन और नींद त्याग देते थे। इस घटना ने पूरी तरह से उनके जीवन जीने का तरीका बदल दिया। जग्गी वासुदेव ने अपना पूरा जीवन अपने अनुभवों को साझा करने के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया।

योग शिविर (Sadhguru Jaggi Vasudev Yoga Camp)

1983 में मैसूर में अपने सात सहयोगियों के साथ उन्होंने अपनी पहली योगा क्लास की शुरुवात की। कहा जाता है की ध्यानलिंग में उपचारात्मक शक्तियां होती है, जो मानव विकास और सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ध्यान केंद्र होने की वजह से ऐसा माना जाता है ध्यान करने के बाद लोगो में यहाँ अपार उर्जा आ जाती है। यहाँ पर ध्यानकेंद्र में बैठकर लोग जितनी देर तक चाहे उतनी देर तक ध्यान लगाकर रह सकते है।

समय के साथ-साथ वे कर्नाटक और हैदराबाद में भी यात्राए कर योगा क्लास का आयोजन करने लगे। वे पूरी तरह से अपने पोल्ट्री फार्म पर आश्रित थे और क्लास के लिए उन्होंने लोगो से पैसे लेना भी मना कर दिया। उनका उद्देश्य यही होता था की वे सहयोगियों से आने वाले पैसो को क्लास के अंतिम दिन में स्थानिक चैरिटी करते थे। बाद में इन्ही शुरुवाती कार्यक्रमों के आधार पर ईशा फाउंडेशन की रचना की गयी।

ईशा योग सेंटर (Sadhguru Jaggi Vasudev Isha Yoga Center)

1992 में गुरु और उनके अनुयायियों ने 'ईशा योग सेंटर' और आश्रम की स्थापना भी की। यह आश्रम कोयंबटूर के पास पूंडी में वेल्लिंगिरी पहाडियों पर बना हुआ है। यह आश्रम तक़रीबन 150 एकड़ के विशाल जमीन में फैला हुआ है, जिसके भीतर 13 फीट ऊँचे विशाल ध्यानलिंग है। आश्रम परिसर में एक बहुत-धार्मिक मंदिर भी है, जिसका निर्माणकार्य 1999 में पूरा हुआ।

आंतरिक विकास के लिए बनाया गया यह शक्तिशाली स्थान योग के चार मुख्य मार्ग : ज्ञान, कर्म, क्रिया और भक्ति को लोगों तक पहुंचाने के प्रति समर्पित है। साधगुरू जग्गी वासुदेव के अनुसार यूनाइटेड स्टेट के योग सेंटर के अलावा दुनियाभर में उनके कुल 25 योग सेंटर है।

सामाजिक कार्य (Sadhguru Jaggi Vasudev Social Work)

जग्गी वासुदेव प्रोजेक्ट ग्रीन हैंड्स के भी संस्थापक है, उनका मुख्य उद्देश्य तमिल नाडू में हर साल कम से कम 10% तक हरे पेड़-पौधों को बढ़ाना है और आज संस्था के 20 लाख स्वयंसेवक तक़रीबन 27 मिलियन से भी ज्यादा पौधों का रोपण कर चुके है।

'एक्शन फॉर रूरल रेजुवेनेशन' (ARR) ईशा फाउंडेशन की ही एक पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य गाँव में रहने वाले गरीबो के स्वास्थ और उनके जीवन की गुणवत्ता को विकसित करना है। ARR की स्थापना 2003 में की गयी और दक्षिण भारत के गांवों के 70 मिलियन लोगो को वे सुविधा पहुचाना चाहते है। साथ ही भारतीय किसानो द्वारा सहन की जा रही खेती संबंधी विविध समस्याओ का समाधान निकालने में भी ARR कार्यरत है।

ईशा विद्या, ईशा फाउंडेशन द्वारा ही शिक्षा के क्षेत्र में चलायी जा रही एक योजना है। जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत में शिक्षा के स्तर का विकास करना है। इस योजना के तहत उन्होंने 7000 बच्चो को पढ़ाने वाली 7 ग्रामीण स्कूलो की स्थापना की है। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर बच्चो की सहायता करने के लिए उन्होंने 512 सरकारी स्कूलो को दत्तक ले रखा है

पुरस्कार (Sadhguru Jaggi Vasudev Awards)

  • 2017 में उनके योगदानो को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया है।
  • 2010 में भारत सरकार ने 'इंदिरा गाँधी पर्यावरण पुरस्कार' देकर सम्मानित किया।
Next Story
Share it