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Sathya Sai Baba Biography In Hindi | सत्य साईं बाबा का जीवन परिचय

Sathya Sai Baba Biography In Hindi | आस्था, भक्ति और भगवान से जुड़ी यह कहानी श्री सत्य साईं बाबा (आध्यात्मिक गुरु) की है जो बचपन में एक आम बालक थे लेकिन समय के साथ उनका स्तर बदल कर सत्य साईं बाबा Sathya Sai Baba बने।

Sathya Sai Baba Biography In Hindi | सत्य साईं बाबा का जीवन परिचय
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Sathya Sai Baba Biography In Hindi | सत्य साईं बाबा का जीवन परिचय

Sathya Sai Baba Biography In Hindi | सत्य साईं बाबा का जीवन परिचय

  • नाम सत्यनारायण राजू
  • जन्म 23 नवंबर 1926
  • जन्मस्थान पुट्टपर्ती
  • पिता पेद्देवकेँ राजू रत्नाकरम्
  • व्यवसाय आध्यात्मिक गुरु
  • नागरिकता भारतीय

आध्यात्मिक गुरु सत्य साईं बाबा (Sathya Sai Baba Biography in Hindi)

Sathya Sai Baba Biography In Hindi | आस्था, भक्ति और भगवान से जुड़ी यह कहानी श्री सत्य साईं बाबा (आध्यात्मिक गुरु) की है जो बचपन में एक आम बालक थे लेकिन समय के साथ उनका स्तर बदल कर सत्य साईं बाबा Sathya Sai Baba बने। सत्य साई संस्था आज दुनिया के 167 देशो में स्थापित है और उनके भक्त भी किसी एक देश में नही बल्कि पूरी दुनिया में है।

सत्य साईं का प्रारंभिक जीवन (Sathya Sai Baba Early Life)

सत्य साईं का जन्म Sathya Sai Baba Birth 23 नवम्बर 1926 को भारत के आन्ध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी गांव में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। बचपन में वे ज्यादातर अपने सहपाठियों में 'गुरु' या 'ब्रह्मज्ञानी' के नाम से जाने जाते थे। राजू संगीत, नृत्य, गाना, लिखना इन सबमें काफी अच्छे थे। ऐसा कहा जाता है कि बाबा बचपन से ही चमत्कार दिखाते थे।

सत्य साईं बाबा ने अपने गांव पुट्टापर्थी में तीसरी क्लास तक पढ़ाई की। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो बुक्कापटनम के स्कूल चले गए। इसी दौरान एक ऐसी घटना हुई जिसने सत्यानारायण राजू को श्री सत्य साईं बाबा बना दिया।

कैसे बना सत्यनारायण राजू से सत्य साईं बाबा (Sathya Sai Baba Story)

8 मार्च, 1940 को सत्यनारायण राजू को एक बिच्छू ने डंक मार दिया। कई घंटे तक वो बेहोश पड़े रहे। उसके बाद के कुछ दिनों में उनके व्यक्तित्व में खासा बदलाव देखने को मिला। वो कभी हंसते, कभी रोते तो कभी गुमसुम हो जाते। उन्होंने संस्कृत में बोलना शुरू कर दिया जिसे वो जानते तक नहीं थे। डॉक्टर भी उनकी बीमारी के बारे में कुछ बता नही पाए।

23 मई 1940 को उनकी दिव्यता का लोगों को अहसास हुआ। सत्य साईं ने घर के सभी लोगों को बुलाया और चमत्कार दिखाने लगे। उनके पिता को लगा कि उनके बेटे पर किसी भूत का साया पड़ गया है। उन्होंने एक छड़ी ली और सत्यनारायण से पूछा कि कौन हो तुम? सत्यनारायण ने कहा कि मैं 'साईं बाबा' हूं।

इस घटना के बाद उन्होंने अपने आप को शिरडी वाले साईं बाबा का अवतार घोषित कर दिया। शिरडी के साईं बाबा, सत्य साईं की पैदाइश से आठ साल पहले ही गुजर चुके थे। खुद को शिरडी साईं बाबा का अवतार घोषित करने के बाद सत्य साई बाबा के पास श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी।

1944 में सत्य साईं के एक भक्त ने उनके गांव के नजदीक उनके लिए एक मंदिर बनाया जो आज पुराने मंदिर के नाम से जाना जाता है। उनके मौजूदा आश्रम प्रशाति निलयम का निर्माण कार्य 1948 में शुरू हुआ था और 1950 में ये बनकर तैयार हुआ था।

श्री सत्य साईं बाबा की एक बात जो उन्हें सबसे महान बनाती थी वह थी उनकी शिक्षा जिसके अनुसार उनका कहना था कि मुझे साईं मानने के लिए आपको धर्म बदलने की जरुरत नहीं है। बस दिल से बाबा के भक्त बनो मैं आपका ख्याल रखूंगा। श्री सत्य साई बाबा का यह भी कहना था कि मैं और तुम सभी भगवान हैं बस फर्क इतना है कि मैंने अपने आप को पहचान लिया है और तुम अपने आप से बिलकुल अनजान हो।

श्री सत्य साई बाबा की प्रसिद्धि इतनी ज्यादा है कि देश विदेश में इनके केन्द्र जगह जगह खुले हैं। बाबा को आने वाला दान पुण्य तामाम सामाजिक कामों जैसे अस्पताल और स्कूलों में खर्च होता है। देश विदेश में कई जगह श्री सत्य साईं बाबा के नाम से स्कूल, कॉलेज और अस्पताल खोले गए हैं।

विवादों में भी रहे बाबा (Sathya Sai Baba Controversy)

श्री सत्य साईं आध्यात्मिक प्रभाव के साथ ही कुछ विवादों में भी रहे, हाथ की सफाई को चमत्कार बता कर ठगने और शारीरिक शोषण जैसे आरोप लगते रहे हैं। एक समय ऐसा भी था जब देश के बड़े बडे जादूगरों ने बाबा को चुनौती दी थी। मशहूर जादूगर पीसी सरकार ने तो उनके सामने ही उन्हीं की तरह हवा से विभूति और सोने की जंजीर निकाल कर दिखा दी थी। इसके बाद भक्तों ने सरकार को धक्के मार कर आश्रम से बाहर कर दिया था।

कथित तौर पर यह भी कहा जाता है कि बाबा के आश्रम में कई तरह की शर्मनाक गतिविधियां लंबे समय से चलती रही हैं और इनके बारे में कभी पुलिस रिपोर्ट तक नहीं लिखी गई। आरोप सामान्य शारीरिक संबंधों के अलावा समलैंगिक गतिविधियों के भी हैं और कई भक्तों का कहना है कि उन्हें मोक्ष दिलाने के बहाने उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए।

अंतिम साँस ली (Sathya Sai Baba Death)

24 अप्रैल 2011 में 86 वर्षीय सत्य साईं बाबा ने आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले में खुद के स्थापित सत्य साईं इंस्टीट्यूट ऑफ हायर मेडिकल साइंसेस में ही सुबह-सुबह 7.40 बजे अंतिम साँस ली। Sathya Sai Baba Biography in Hindi

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