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Swami Vivekanand Life at a glance | स्वामी विवेकानंद का जीवन एक नज़र में

Swami Vivekanand Life at a glance | स्वामी विवेकानंद केवल एक संत ही नहीं, एक महान दार्शनिक, एक महान देशभक्त, विचारक और लेखक भी थे।

Swami Vivekanand Life at a glance | स्वामी विवेकानंद का जीवन एक नज़र में
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Swami Vivekanand Life at a glance स्वामी विवेकानंद का जीवन एक नज़र में

Swami Vivekanand Life at a glance | स्वामी विवेकानंद का जीवन एक नज़र में

1) कॉलेज में शिक्षा लेते समय वो ब्राम्हो समाज की तरफ आसक्त हुये थे। ब्राम्हो समाज के प्रभाव से वो मूर्तिपूजा और नास्तिकवाद इसके विरोध में थे। पर आगे 1882 में उनकी रामकृष्ण परमहंस से मुलाकात हुई। ये घटना विवेकानंद के जीवन को पलटकर रखने वाली साबित हुयी।

योग साधना के मार्ग से मोक्ष प्राप्ति की जा सकती है, ऐसा विश्वास रामकृष्ण परमहंस इनका था। उनके इस विचार ने स्वामी विवेकानंद पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला। और वो रामकृष्ण के शिष्य बन गये।

2) 1886 में रामकुष्ण परमहंस का देहवसान हुवा।

3) 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में धर्म की विश्व परिषद थी। इस परिषद् को उपस्थित रहकर स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म की साईड बहोत प्रभाव से रखी। अपने भाषण की शुरुवात 'प्रिय-भाई-बहन' ऐसा करके उन्होंने अपनी बड़ी शैली में हिंदू धर्म की श्रेष्ठता और महानता दिखाई।

4) स्वामी विवेकानंद के प्रभावी व्यक्तिमत्व के कारण और उनकी विव्दत्ता के कारण अमेरिका के बहोत लोग उनको चाहने लगे। उनके चाहने वालो ने अमेरिका में जगह जगह ऊनके व्याख्यान किये।

विवेकानंद 2 साल अमेरिका में रहे। उन दो सालो में उन्होंने हिंदू धर्म का विश्वबंधुत्व का महान संदेश वहा के लोगों तक पहुचाया। उसके बाद स्वामी विवेकानंद इग्लंड गये। वहा की मार्गारेट नोबेल उनकी शिष्या बनी। आगे वो बहन निवेदीता के नाम से प्रसिध्द हुई।

5) 1897 में उन्होंने 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की। उसके साथ ही दुनिया में जगह जगह रामकृष्ण मिशन की शाखाये स्थापना की। दुनिया के सभी धर्म सत्य है और वो एकही ध्येय की तरफ जाने के अलग अलग रास्ते है। ऐसा रामकृष्ण मिशन की शिक्षा थी।

6) रामकृष्ण मिशन ने धर्म के साथ-साथ सामाजिक सुधार लानेपर विशेष प्रयत्न किये। इसके अलावा मिशन की तरफ से जगह-जगह अनाथाश्रम, अस्पताल, छात्रावास की स्थापना की गई।

7) अंधश्रध्दा, कर्मकांड और आत्यंतिक ग्रंथ प्रामान्य छोड़ो और विवेक बुद्धिसे धर्म का अभ्यास करो। इन्सान की सेवा यही सच्चा धर्म है। ऐसी शिक्षा उन्होंने भारतीयों को दी। उन्होंने जाती व्यवस्था पर हल्ला चढाया। उन्होंने मानवतावाद और विश्वबंधुत्व इस तत्व का पुरस्कार किया। हिंदू धर्म और संस्कृति इनका महत्व विवेकानंद ने इस दुनिया को समझाया।

स्वामी विवेकानंद केवल एक संत ही नहीं, एक महान दार्शनिक, एक महान देशभक्त, विचारक और लेखक भी थे। स्वामी विवेकानंद जातिवाद, और धार्मिक आडम्बरों का जमकर विरोध करते थे इसके साथ वे साहित्य, दर्शन के विद्धान थे जिन्होनें भारतीय संस्कृति की सुगंध विदेशो में भी फैलाई इसके साथ ही हिंदुत्व को भी बढ़ावा दिया उन्होनें अपनी रचनाओं का प्रभाव पूरे देश में डाला और सम्पूर्ण युवा जगत को नई राह दिखाई।

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