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V P Singh Biography in Hindi | वी पी सिंह की जीवनी

V P Singh Biography in Hindi |

V P Singh Biography in Hindi | वी पी सिंह की जीवनी
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V P Singh Biography in Hindi | वी पी सिंह की जीवनी

V P Singh Biography in Hindi | वी पी सिंह की जीवनी

  • नाम विश्वनाथ प्रताप सिंह
  • जन्म 25 जून 1931
  • जन्म स्थान इलाहबाद, उत्तरप्रदेश
  • पिता राजा बहादुर राय गोपाल सिंह
  • पत्नी सीता कुमारी
  • बच्चे अजय प्रताप सिंह, अभय सिंह
  • राजनैतिक पार्टी जन मोर्चा
  • व्यवसाय राजनीतिज्ञ
  • राष्ट्रीयता भारतीय

भारतीय राजनीतिज्ञ वी पी सिंह (V P Singh Biography in Hindi)

V P Singh Biography in Hindi | विश्वनाथ प्रताप सिंह भारत के आठवे प्रधानमंत्री थे, राजीव गाँधी के बाद जनता दल को चुनाव में जीत हासिल हुई और इस तरह 1989 में वी.पी. सिंह सत्ता के उच्च पद पर आसीन हुए। इनका रुझान राजीनीति की तरफ हमेशा से ही था, जिसके लिए इन्होने कठिन परिश्रम किये। इन्होने 1989 में भारत देश की राजनीती में अविस्मरणीय बदलाव कर दिए. वी पी सिंह ने दलित व निचली जाति के लोगों को चुनावी राजनीती में आने का मौका दिया।

प्रारंभिक जीवन (V P Singh Early Life)

विश्वनाथ प्रताप सिंह का जन्म 25 जून 1931 में इलाहाबाद के राजपूत ज़मीनदार परिवार में हुआ। इनके असली पिता का नाम रजा भगवती प्रसाद सिंह था। 1936 में वी पी सिंह को मांडवा के राजा बहादुर राय गोपाल सिंह के द्वारा गोद ले लिया गया था। 1941 में राजा बहादुर राय की मौत के बाद वी पी सिंह को मांडवा का 41वा राजा बहादुर बना दिया गया था।

शिक्षा (V P Singh Education)

वी पी सिंह की पढाई की शुरुवात देहरादून के कैंब्रिज स्कूल से हुई थी। आगे का अध्ययन इलाहाबाद से पूरा किया, फिर इसके बाद पूना में पुणे यूनिवर्सिटी से पढाई की। पढाई के समय से ही इन्हें राजनीति में रुझान रहा, वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज के ये स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट रहे, इसके अलावा इलाहबाद यूनिवर्सिटी के ये वाईस प्रेसिडेंट थे।

वी पी सिंह को कविताये लिखने का काफी शौक था, इसलिए इन्होने कई किताबे भी लिखी। वी पी सिंह ने छात्र काल में बहुत से आन्दोलन किये और उनका नेतृत्व सम्भाला, इसलिए इनका सत्ता के प्रति प्रेम बढ़ता गया। यह एक समृध्द परिवार से थे, पर इन्हें धन दौलत से इतना प्रेम ना था, देश प्रेम के चलते इन्होने भी भू दान में अपनी सारी सम्पति दान करी दी और परिवार ने इनसे नाता तौड़ दिया।

निजी जिंदगी (V P Singh Personal Life)

वी पी सिंह ने राजकुमारी सीता कुमारी से शादी की थी, जो देवगढ के राजा की बेटी थी, 25 जून 1955 को उनका विवाह हुआ था। उनकी शादी पारिवारिक मिलाप से ही की गयी थी। कुमारी जाती से एक सिसोदिया राजपूत थी। उनको दो बेटे है अजय सिंह और अभय सिंह

राजनीतिक करियर (V P Singh Political Career)

  • वी पी सिंह ने 1969 में एक सदस्य के रूप में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी में सदस्य बने। इसके बाद 1969 से 1971 में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुँचे। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री का कार्यभार भी सम्भाला और फिर 1974 में भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें कॉमर्स का डिप्टी मिनिस्टर भी बनाया। 1976 से 1977 तक उन्होंने कॉमर्स का मिनिस्टर बने रहते हुए सेवा की थी।
  • 1980 में ये लोकसभा के सदस्य भी बन गए। 1980 में जनता दल की सरकार गिरने के बाद जब इंदिरा गांधी वापस सत्ता में आई, उस वक्त वी पी सिंह को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया। 1982 तक वे इस पद पर रहे, इसके बाद वापस 1983 में इन्होने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री का पद सम्भाला।
  • 1984 में जब राजीव गांधी ने सत्ता सम्भाली, तब वी पी सिंह को वित्त मंत्री के पद पर आसीन किया गये। कुछ समय बाद 1987 में इन्हें रक्षा मंत्री का पद दे दिया गया। विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) में 'गोपाल इंटरमीडिएट कॉलेज' की स्थापना की थी।
  • वी पी सिंह काँग्रेस पर हो रहे, गांधी परिवार के सत्तेबाजी से काफी निराश थे, इसलिए इन्हें राजीव गांधी के साथ कार्य करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। राजीव गाँधी के समय हुए, बोफोर्स कांड में काँग्रेस की छवि पूरी तरह बिगड़ गई। राजीव गांधी से मतभेद के चलते वी पी सिंह को कैबिनेट से निष्काषित कर दिया गया। जिसके बाद सिंह ने कांग्रेस और लोकसभा दोनों से रिजाइन कर लिया।
  • वी पी सिंह ने अरुण नेहरु और आरिफ मोह्हमद खान के साथ 1987 में जन मोर्चा पार्टी का गठन किया और काँग्रेस के विरुध्द प्रचार करना प्रारम्भ कर दिया। 1988 में इन्हें इलाहबाद से लोकसभा की सीट फिर मिल गई।

प्रधानमंत्री बने (V P Singh As a Prime Minister)

11 अक्टूबर 1988 को जन मोर्चा, जनता पार्टी, लोक दल ने मिलकर गठबंधन किया, जिस पार्टी का नाम "जनता दल" रखा गया। ये सभी पार्टी मिलकर राजीव गांधी के विरुध्य खड़ी थी। वी पी सिंह को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। 2 दिसम्बर 1989 में जनता दल को भारी बहुमत से विजय प्राप्त हुई और वी पी सिंह को प्रधानमंत्री बना दिया गया।

1989 के चुनाव देश में बहुत बड़ा बदलाव लेकर आए थे और इसी चुनाव में उन्होंने प्रधानमंत्री बनकर दलित और छोट वर्ग के लोगो की सहायता की। सिंह एक निडर राजनेता थे, दुसरे प्रधानमंत्रीयो की तरह वे कोई भी निर्णय लेने से पहले डरते नही थे बल्कि वे निडरता से कोई भी निर्णय लेते थे और ऐसा ही उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ गिरफ़्तारी का आदेश देकर किया था। प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने देश में बढ़ रहे भ्रष्टाचार का भी विरोध किया था।

मृत्यु (V P Singh Death)

विश्वनाथ प्रताप सिंह गुर्दे और हृदय की समस्याओं से पीड़ित थे। बाद में दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में 27 नवम्बर 2008 को उनकी मृत्यु हुई थी। अलाहाबाद में गंगा नदी के किनारे पर 29 नवम्बर 2008 को उनका अंतिम संस्कार उनके बेटे अजेय सिंह की उपस्थिति में किया गया था।

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