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Vijender Singh Biography in Hindi | विजेंदर सिंह का जीवन परिचय

Vijender Singh Biography in Hindi | विजेंदर सिंह बेनीवाल एक भारतीय मुक्केबाज हैं, जिन्होंने वर्ष 2015 से बॉक्सिंग के करियर में अपनी किस्मत आजमाई। विजेंदर सिंह ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज हैं।

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Vijender Singh Biography in Hindi | विजेंदर सिंह का जीवन परिचय

Vijender Singh Biography in Hindi | विजेंदर सिंह का जीवन परिचय

  • पूरा नाम विजेंदर सिंह बेनीवाल
  • जन्म 29 अक्टूबर सन 1985
  • जन्मस्थान कालूवास गाँव, रेवरी जिला, हरियाणा
  • पिता महिपाल सिंह
  • माता कृष्णा देवी
  • पत्नी अर्चना सिंह
  • पेशा मुक्केबाज
  • व्यवसाय अभिनेता, राजनीतिज्ञ, पुलिस अधिकारी, पेशेवर बॉक्सर
  • पुरस्कार पद्म श्री, मुक्केबाजी के लिए अर्जुन पुरस्कार
  • राष्ट्रीयता भारतीय

पेशेवर बॉक्सर विजेंदर सिंह (Vijender Singh Biography in Hindi)

Vijender Singh Biography in Hindi | विजेंदर सिंह बेनीवाल एक भारतीय मुक्केबाज हैं, जिन्होंने वर्ष 2015 से बॉक्सिंग के करियर में अपनी किस्मत आजमाई। विजेंदर सिंह ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज हैं। 2019 में, वह दक्षिण दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 2019 के आम चुनाव लड़ने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए।

प्रारंभिक जीवन (Vijender Singh Early Life)

विजेंदर सिंह का जन्म 29 अक्टूबर 1985 को कालूवास, हरियाणा में एक जाट परिवार में हुआ था। उनके पिता महिपाल सिंह बेनीवाल, हरियाणा रोडवेज में बस चालक और माता कृष्णा देवी एक गृहिणी है। उनके बड़े भाई का नाम मनोज है।

शिक्षा (Vijender Singh Education)

उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने ही गांव कालूवास से प्राप्त की और भिवानी से माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने भिवानी के वैश कॉलेज ऑफ एजुकेशन में दाखिला लिया और वहां से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने कोचिंग का प्रशिक्षण भारतीय बॉक्सिंग कोच गुरबक्श सिंह संधू से लिया हैं।

निजी जीवन (Vijender Singh Married Life)

17 मई 2011 को उन्होने अर्चना सिंह से विवाह किया। उनके बेटे का नाम अर्बिर सिंह है।

राज कुमार सांगवान से प्रेरित (Vijender Singh Inspired by Raj Kumar)

1990 में बॉक्सर राज कुमार सांगवान को अर्जुन अवार्ड मिला और इसी वजह से भारत में बॉक्सिंग के प्रति लोगो की रूचि बढती गयी। मुक्केबाज़ राज कुमार सांगवान से प्रेरित होकर, विजेंदर ने बॉक्सर बनने का फैसला किया। उनके बड़े भाई मनोज भी एक मुक्केबाज थे। उन्हें भिवानी के बॉक्सिंग क्लब में प्रशिक्षित किया गया, जहां राष्ट्रीय स्तर के पूर्व मुक्केबाज और उनके कोच जगदीश सिंह भी प्रशिक्षित हुए थे।

करियर (Vijender Singh Starting Career)

विजेंदर सिंह पहली बार तब लोकप्रिय हुए, जब उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जीत हासिल की। 1997 में, उन्होंने अपने पहले सब-जूनियर लेवल प्रतियोगिता में रजत पदक जीता और बाद में 2000 में राष्ट्रीय स्तर पर, उन्होंने अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। 2003 में वह ऑल इंडिया यूथ बॉक्सिंग चैंपियन बने।

विजेंदर सिंह बॉक्सिंग करियर (Vijender Singh Boxing Career)

विजेंदर ने बहुत सी नेशनल लेवल प्रतियोगिताओ में उन्होंने मेडल जीते है, इसके बाद विजेंदर को इंटरनेशनल लेवल प्रतियोगिताओ के लिए ट्रेन किया गया और इसके बाद उन्होंने बहुत सी प्रतियोगिताओ में भाग भी लिया जैसे 2004 के एथेंस समर ओलंपिक्स और 2006 के कामनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने हिस्सा लिया।

2006 में दोहा में हुए एशियन गेम्स में कजाखस्तान के बख्तियार अर्तायेव के खिलाफ सेमीफाइनल हारने के बाद ब्रोंज मेडल जीता।

2008 के बीजिंग समर ओलंपिक्स में क्वार्टरफाइनल में इक्वेडोर के कार्लोस गोंगोरा को 9-4 से हराकर अपना ब्रोंज मेडल पक्का किया. जो किसी भी भारतीय बॉक्सर के लिए यह पहला ओलंपिक्स मेडल था।

2009 में उन्होंने वर्ल्ड अमटुर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और उसमे उन्होंने ब्रोंज मेडल भी जीता। उसी साल इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन ने विजेंदर को अपने वार्षिक मिडिलवेट केटेगरी की सूचि में 2800 पॉइंट के साथ टॉप बॉक्सर घोषित किया। 2009 में, उन्हें देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2010 में, उन्हें भारतीय खेलों में बेहतरीन योगदान देने के लिए पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में, वह सेमीफाइनल में इंग्लैंड के एंथनी ओगोगो से हार गए और कांस्य पदक ही जीत सके। उसी वर्ष, उन्होंने फाइनल में 7-0 के स्कोर के साथ उज्बेकिस्तान के अब्बोस एटोव को हराकर एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता।

2011 में विजेंदर को एक फ़िल्म करने का अवसर मिला, जोकि दक्षिण के निर्माता आनंद द्वारा बनाई जा रही थी, फ़िल्म का नाम "पटिअला एक्सप्रेस" था।

2012 के लन्दन ओलंपिक्स में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। 2012 के लंदन ओलंपिक खेलों में, वह क्वार्टर फाइनल में उज्बेकिस्तान के अब्बोस एतोव से 13-17 के स्कोर के साथ हार गए।

2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में, उन्होंने फाइनल में इंग्लैंड के एंटनी फाउलर से हारने के बाद रजत पदक जीता।

2014 में इन्होंने बॉलीवुड फ़िल्म "फगली" में अक्षय कुमार के साथ काम किया उन्होंने इसमें एक पुलिस ऑफिसर का रोले निभाया था, लेकिन यह फ़िल्म कुछ खास नहीं चली।

10 अक्टूबर 2015 को, उन्होंने अपना पहला पेशेवर मुकाबला लड़ा और TKO द्वारा सन्नी व्हिटिंग को हराया।

2015 में विजेंदर सिंह ने IOS खेल और मनोरंजन के द्वारा एक "क्वीन्सबेरी प्रोमोशन्स" के साथ बहु वर्षीय अग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिया, जिससे उनके कैरियर में एक नया मोड़ आ गया।

21 मार्च 2016 को सिंह ने फ्लानागन-मैथ्यू अंडरकार्ड में उन्होंने तीसरे राउंड में हंगरी के एलेग्जेंडर होर्वाथ को पराजित किया।

30 अप्रैल 2016 को 5 वे राउंड में TKO से ही उन्होंने फ्रेंच बॉक्सर मटियो रोएर को कॉपर बॉक्स एरीना में पराजित किया था।

2019 में, वह दक्षिण दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 2019 के आम चुनाव लड़ने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए।

विवाद (Vijender Singh Controversies) :

  • 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में, विजेंदर पर बाउट खत्म होने के 20 सेकंड पहले आने के लिए 2 पॉइंट की पेनल्टी लगाई गई थी।
  • 2013 में, पंजाब पुलिस ने विजेंदर सिंह पर आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार एक NRI से हेरोइन खरीदी है। लेकिन उन्होंने आरोप से इनकार किया और जिसके बाद उन्हें राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) से क्लीन-चिट दे दी गई।
  • पुरस्कार और सन्मान (Vijender Singh The Honors) :
  • 2009 में भारत सरकार द्वारा विजेंदर सिंह को "राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड" दिया गया।
  • 2010 में विजेंदर सिंह को "पद्मश्री अवार्ड" दिया गया।
  • विजेंदर सिंह भारत के पहले मुक्केबाज बने, जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीता।
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