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Vikram Sarabhai Biography in Hindi | विक्रम साराभाई का जीवन परिचय

Vikram Sarabhai Biography in Hindi |

Vikram Sarabhai Biography in Hindi | विक्रम साराभाई एडिसन का जीवन परिचय
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Vikram Sarabhai Biography in Hindi | विक्रम साराभाई एडिसन का जीवन परिचय

Vikram Sarabhai Biography in Hindi | विक्रम साराभाई का जीवन परिचय

  • पूरा नाम विक्रम अम्बालाल साराभाई
  • जन्म 12 अगस्त 1919
  • जन्मस्थान अहमदाबाद
  • पिता अम्बालाल साराभाई
  • माता सरला देवी
  • पत्नी मृणालिनी साराभाई
  • पुत्री मल्लिका साराभाई, कार्तिकेय साराभाई
  • व्यवसाय भौतिक विज्ञानी
  • पुरस्कार पद्म भूषण, पद्म विभूषण
  • नागरिकता/राष्ट्रीयता भारतीय

वैज्ञानिक विक्रम साराभाई (Vikram Sarabhai Biography in Hindi)

Vikram Sarabhai Biography in Hindi | विक्रम अम्बालाल साराभाई Vikram Sarabhai एक भारतीय वैज्ञानिक और खोजकर्ता थे जो ज्यादातर "भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम" के जनक के नाम से जाने जाते है। इन्होंने 86 वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं 40 संस्थान खोले। इन्होने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र की स्थापना की और ब्रह्मांड के कई जटिल प्रश्नों के हल निकालने मे उल्लेखनीय कार्य किए। परमाणु उर्जा के क्षेत्र में देश की प्रगति को एक नई दिशा प्रदान की।

प्रारंभिक जीवन (Vikram Sarabhai Early Life)

विक्रम अंबालाल साराभाई का जन्म 12 अगस्त, 1919 को गुजरात राज्य के प्रमुख औद्योगिक विशाल नगर अहमदाबाद में एक उद्योगपति के परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम अंबालाल और माता का नाम सरला था। वे आठ भाई -बहन थे।

साराभाई का परीवार भारतीय स्वतंत्रता अभियान में शामिल होने के कारण बहुत से स्वतंत्रता सेनानी जैसे महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, रबीन्द्रनाथ टैगोर और जवाहरलाल नेहरू अक्सर साराभाई के घर आते-जाते रहते थे। इन सभी सेनानियो का उस समय युवा विक्रम साराभाई के जीवन पर काफी प्रभाव पडा और उन्होंने साराभाई के व्यक्तिगत जीवन के विकास में काफी सहायता भी की।

शिक्षा (Education)

विक्रम साराभाई की प्रारम्भिक शिक्षा उनकी माता सरला साराभाई द्वारा मैडम मारिया मोन्टेसरी की तरह शुरू किए गए पारिवारिक स्कूल में हुई। 1935 में मेट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1935-37 में उन्होंने गुजरात कॉलेज, अहमदाबाद में इंटरमीडिएट तक अध्ययन किया तथा 1936 में केंब्रिज विश्वविद्यालय, इंग्लैंड में अध्ययन प्रारंभ किया।

1940 में उन्होंने गणित और भौतिक शास्त्र मे बि.ए की परीक्षा उत्तीर्ण की। द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रारंभ मे वे भारत लौट आए।

निजी जीवन (Vikram Sarabhai Marriage)

विक्रम साराभाई का विवाह सितम्बर, 1942 मे प्रसिद्ध डांसर मृणालिनी से हुआ था। जिसमे विक्रम के परीवार से कोई उपस्थित नही था, क्योकि उस समय महात्मा गांधी का भारत छोडो आंदोलन चरम पर था, जिसमे विक्रम का परीवार भी शामिल था। विक्रम और मृणालिनी को दो बच्चे हुवे जिनका नाम कार्तिकेय साराभाई और मल्लिका साराभाई रखा गया।

वैज्ञानिक करियर (Vikram Sarabhai Scientific Career)

अपने करियर के आरंभिक काल में जब वे अपनी शिक्षा पूरी करके इंग्लैंड से भारत आए, तब विक्रम साराभाई ने अहमदाबाद में मौजूद शोध संस्थान को बंद कराने के लिए अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों को इकठ्ठा किया और धर्मार्थ ट्रस्ट को भी राजी किया कि उस शोध संस्थान को बंद कराया जाए. दरअसल वह शोध संस्थान उनके घर के पास ही था, जिसकी वजह से बहुत अत्यधिक प्रदूषण फैल रहा था. और फिर उन्होंने भारत में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना बनाई।

कुछ समय पश्चात डॉ साराभाई ने अहमदाबाद एजुकेशन सोसायटी में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के लिए एक छोटी सी जगह खरीद ली और उसमें अपने भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला का निर्माण कर दिया, जबकि वहीं दूसरी ओर एमजी कॉलेज ऑफ साइंस का निर्माण भी प्रगति पर था।

एमजी कॉलेज ऑफ साइंस में दो छोटे कमरे अनुसंधान कार्यों के लिए तैयार किए गए। धीरे-धीरे जैसे ही उनका कार्य पूरा होता गया तो उन कमरो को योजनाबद्ध तरीके से भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में बदल दिया गया। कुछ समय पश्चात और अधिक धन एकत्रित किया गया. और विज्ञान की ओर अपने करियर को आगे बढ़ाते चले गये।

खोज और प्रयोग (Vikram Sarabhai Research)

कॉस्मिक किरणों का निरीक्षण :

साराभाई के मार्गदर्शन में पहला कॉस्मिक किरणों का निरीक्षण करने वाले नए दूरबीनो का निर्माण किया गया। वे दूरबीन कुछ इस प्रकार के थे, जिनसे गुलमर्ग जैसी विभिन्न स्थानों में से निकलने वाली कॉस्मिक विकर्ण की तीव्रता और उसके निरंतर बदलते हुए प्रभावों के बारे में पूरी और गहन जांच की जा सकती थी। जैसे-जैसे वे कॉस्मिक किरणों पर खोज करते रहे वैसे वैसे उनको और भी निरीक्षण करने के लिए कई तरह के औजारों की आवश्यकता होने लगी।

विक्रम साराभाई ने अपने द्वारा बनाए गए छात्रों के समूह के साथ मिलकर कॉस्मिक विकिरण और गुलमर्ग जैसे विभिन्न स्थानों में आउटर दूरबीन का उपयोग करके कॉस्मिक किरणों के निरंतर बदलते रुझान का अवलोकन किया और किरण की तीव्रता के लिए बड़ी संख्या में कॉस्मिक रे दूरबीन का निर्माण करना और उनकी स्थापना करना शुरु कर दिया। उन्होंने यह पूरी प्रक्रिया को अहमदाबाद से अलग त्रिवेंद्रम में अंजाम दिया।

ISRO की स्थापना :

भारत में कोई भी रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन नहीं था, डॉक्टर होमी भाभा एक ऐसी शख्सियत जिसे विज्ञान में होने वाले प्रत्येक परमाणु विज्ञान कार्यक्रम का जनक माना जाता है, उनके सहयोग से अपना पूर्ण समर्थन देते हुए डॉक्टर साराभाई ने भारत में पहला रॉकेट लॉन्च इंप्रेशन स्थापित किया। यह संस्थान अरब सागर के तट के पास थुम्बा, तिरुवंतपुरम में स्थापित किया गया था।

उन्होंने रुसी स्पूतनिक लांच के बाद भारत जैसे विकासशील देश में अंतरिक्ष की महत्वता को समझाया और सरकार को इस बात पर राजी किया कि भारत देश में भी अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व पर जोर दिया जाना चाहिए।

उसके बाद भारत में भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन की शुरुआत की गई, और इसकी घोषणा साल 1969 के स्वतंत्रता दिवस के दिन की गई। इस संगठन को शुरू करने में सबसे अधिक महत्वपूर्ण योगदान डॉक्टर साराभाई का था, जिन्होंने 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान' नामक संगठन यानी इसरो (ISRO) की स्थापना की थी।

NASA के साथ भी साराभाई के अच्छे तालमेल थे, जिनसे बातचीत करके और उनके साथ मिलकर उन्होंने 1975 से लेकर 1976 के दौरान सेटेलाइट सफल टेलिविजन एक्सपेरिमेंट लांच किया। बाद में उनके द्वारा एक अद्भुत भारतीय उपग्रह निर्माण की परियोजना भी शुरू कर दी गई। जिसके परिणाम स्वरुप पहला भारतीय उपग्रह आर्यभट्ट 1975 में एक रुसी कॉस्मोडरोम से कक्षा में रखा गया।

अवॉर्ड्स और उपलब्धियां (Vikram Sarabhai Awards)

  • 1966 में उन्हें भारत सरकार से "पद्म भूषण" मिला।
  • 1972 में उन्हें भारत सरकार से "पद्म विभूषण" मिला।
  • भारत में प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त जो डॉक्टर साराभाई की जन्म तिथि है उस दिन को 'अंतरिक्ष विज्ञान दिवस' के रुप में मनाया जाता है।
  • भारतीय डाक विभाग द्वारा उनकी पहली पुण्यतिथि 30 दिसंबर 1972 पर उनकी याद में एक स्मारक डाक टिकट घर बनाया गया।
  • भारत से 22 जुलाई 2019 को पहला लेंडर रोवर बनाया गया और उसे चांद की ओर पहुंचाया गया, जो चांद पर खोज करने में सक्षम होता, इस रोवर का नाम विक्रम लैंडर रखा गया। विक्रम साराभाई को सम्मान देते हुए इसरो के जनक के नाम पर ही लेंडर का नामकरण किया गया।

मृत्यु (Vikram Sarabhai Death)

30 दिसंबर 1971 को मात्र 52 साल की उम्र में हार्ट अटैक की वजह से अचानक उनकी मृत्यु हो गई।

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