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Janskati Samachar

बर्लिन की दीवार का काइतिहास, कब बनी? कब ढाह दी गई | Why was the Berlin Wall built?

नाजी जर्मनी के आत्मसमर्पण के साथ खत्म हुए दूसरे विश्व युद्ध के बाद गठबंधन सेनाओं ने बर्लिन को चार हिस्सों में बांटा था, सबसे बड़ा पूर्वी हिस्सा सोवियत सेक्टर था, पश्चिम हिस्से पर तीन ताकतों अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस का नियंत्रण था, गठबंधन सेनाओं ने "पोट्सडैम" समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके अनुसार जर्मनी और बर्लिन की सीमाएं तय हुईं।

बर्लिन की दीवार काइतिहास, कब बनी? कब ढाह दी गई | Why was the Berlin Wall built?
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बर्लिन की दीवार काइतिहास, कब बनी? कब ढाह दी गई | Why was the Berlin Wall built?

नाजी जर्मनी के आत्मसमर्पण के साथ खत्म हुए दूसरे विश्व युद्ध के बाद गठबंधन सेनाओं ने बर्लिन को चार हिस्सों में बांटा था, सबसे बड़ा पूर्वी हिस्सा सोवियत सेक्टर था, पश्चिम हिस्से पर तीन ताकतों अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस का नियंत्रण था, गठबंधन सेनाओं ने "पोट्सडैम" समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके अनुसार जर्मनी और बर्लिन की सीमाएं तय हुईं।

बर्लिन की दीवार बनने का क्या कारण थे? (What was the reason for the Berlin Wall being built?)

पूर्वी जर्मनी में शिक्षा मुफ्त थी लेकिन पश्चिमी जर्मनी में शिक्षा पर खर्च करना पड़ता था; इस कारण जर्मन छात्र शिक्षा के लिए पूर्वी हिस्से में जाते और नौकरी के लिए पश्चिमी जर्मनी लौट आते थे, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जब जर्मनी का विभाजन हो गया, तो सैंकड़ों कारीगर, प्रोफेसर, डॉक्टर, इंजीनियर और व्यवसायी प्रतिदिन पूर्वी बर्लिन को छोड़कर पश्चिमी बर्लिन जाने लगे।

एक अनुमान के अनुसार 1954 से 1960 के दौरान 738 यूनिवर्सिटी प्रोफेसर,15, 885 अध्यापक, 4,600 डॉक्टर और 15,536 इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ पूर्व से पश्चिमी जर्मनी चले गए, कुल मिला कर यह संख्या 36,759 के लगभग है, लगभग 11 हजार छात्रों ने भी बेहतर भविष्य की तलाश में पूर्वी जर्मनी छोड़कर पश्चिमी जर्मनी चले गए, जितने लोगों ने पश्चिमी जर्मनी के लिए पलायन किया था उनको अच्छी शिक्षा पूर्वी जर्मनी में मिली थी, इस प्रतिभा पलायन के कारण पश्चिमी जर्मनी को फायदा मिलने लगा और पूर्वी जर्मनी को नुकसान होने लगा।


यहाँ पर यह बताना भी जरूरी है कि जो लोग पूर्वी जर्मनी छोड़ना चाहते थे उनके लिए पश्चिमी बर्लिन में आकर वहां से विमान द्वारा पश्चिमी जर्मनी में जाना आसान था, इसके अलावा 1950 और 1960 के दशक के शीत युद्ध के दौरान पश्चिमी देश; बर्लिन को पूर्वी ब्लॉक की जासूसी के लिए भी इस्तेमाल करते थे।

अब ऐसे हालातों में पूर्वी जर्मनी को इस पलायन और जासूसी को रोकने के लिए कुछ न कुछ उपाय तो करने ही थे, इन्हीं सब वजहों से परेशान होकर पूर्वी जर्मनी की समाजवादी सरकार ने 12 और 13 अगस्त, 1961 की रात में पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन की सीमा को बंद कर दिया था।

बर्लिन दीवार का मुख्य मक़सद पूर्वी जर्मनी से भाग कर पश्चिमी जर्मनी जाने वाले लोगों को रोकना था, बर्लिन की दीवार की कुल लंबाई 155 किलोमीटर थी।पूर्वी जर्मनी की सरकार ने हजारों सैनिक सीमा पर तैनात किए और मजदूरों की मदद से रात में सीमा पर कटीले तार लगाने शुरू कर दिए थे, यहाँ तक की सड़कों पर जल रही लाइट्स को भी बंद कर दिया गया था ताकि पश्चिमी हिस्से में रहने वाले लोगों को इस दीवार की भनक ना लग सके और विरोध न हो, जब सुबह हुई तो बर्लिन शहर दो हिस्सों में बाँट चुका था, इस दीवार के कारण कई परिवार बंट गए, किसी का घर दीवार के इस तरफ था तो किसी का दीवार के उस तरफ, लोगों को समझ नही आ रहा थी कि आखिर ये क्या हो रहा है, यहाँ तक कि उस समय के अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी को भी इस बारे में कुछ पता नही था।

बर्लिन दीवार कब ढहाई गयी? (When did the Berlin Wall Demolished?)

1980 के दशक में सोवियत आधिपत्य का पतन होने से पूर्वी जर्मनी में राजनैतिक उदारीकरण शुरू हुआ और पूर्वी जर्मनी में सरकार के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन हुए इस कारण पूर्वी जर्मनी की समाजवादी सत्ता का अंत हुआ, 9 नवम्बर 1989 को घोषणा की गई कि बर्लिन सीमा पर आवागमन पर लगी रोक हटा ली गयी और दीवार गिरा दी गयी, जर्मन लोग दीवार के टुकड़े तोड़कर यादगार के लिए अपने अपने घर ले गए थे। बर्लिन दीवार के गिरने से पूरे जर्मनी में राष्ट्रवाद का उदय हुआ और पूर्वी जर्मनी के लोगों ने जर्मनी के पुनः एकीकरण के लिए मंजूरी दे दी और 3 अक्टूबर 1990 को जर्मनी फिर से एक हो गया।

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