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रोजगार विहीन विकास के झण्डाबरदार नरेन्द्र मोदी: डॉ सुनीलम
मोदी सरकार के विकास को रोजगार रहित विकास कहा जाने लगा है। मेक इन इंडिया रिटेल में सीधे विदेशी निवेश के बावजूद रोजगार का ग्राफ नीचे आता दिखलाई पड़ रहा है। हर तरफ छटनी चल रही है। सरकारी भर्तियां पहले से ही बंद हैं। बढ़ती महंगाई और रोजगार की कमी के चलते गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। नोटबंदी के परिणामस्वरूप भी बाजार में मंदी आयी है तथा छोटे उद्योग बंद हो गये हैं। मोदी जी ने एक करोड़ रोजगार हर साल देने का वायदा किया था लेकिन पिछले एक वर्ष में केवल 2.13 लाख नयी नौकरियां पैदा हुईं। आई टी सेक्टर में अगले तीन वर्षों में 6 लाख नौकरियां कम पैदा होंगी, क्योंकि पिछले 3 वर्षों में निवेश 19 प्रतिशत कम हो गया है। 2013 में 8 प्रमुख सेक्टरों में 4.19 लाख नौकरियां आयी थीं लेकिन 2015 में यह घटकर 1.35 लाख रह गयीं।

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