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चुनाव आयोग की बैठक में 70 फीसदी पार्टियों ने कहा 'ईवीएम हटाओ, वैलेट लाओ'

नई दिल्ली। चुनाव आयोग द्वारा आज बुलाई गयी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनैतिक दलों की बैठक में 70 फीसदी पार्टियों ने भविष्य के चुनाव ईवीएम की जगह वैलेट पेपर से कराये जाने की मांग की। अधिकांश पार्टियों का तर्क था कि ईवीएम विश्वसनीयता खो चुकी है। ईवीएम को लेकर लगातार विवाद बढ़ते जा रहे हैं। इसलिए चुनाव आयोग को चाहिए कि वह ईवीएम की जगह पुराने पैटर्न वैलेट पेपर से चुनाव कराये। वहीँ कुछ कुछ पार्टियों ने कहा कि ईवीएम और वीवीपैट की गिनती के साथ समस्याएं हैं, चुनाव आयोग इस पर काम क्यों नहीं करता?
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि कई ने राज्यों के हालिया चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में आई खराबी की रिपोर्ट चिंताजनक है और यह फिर से बैलेट पेपर से चुनाव की मांग करता है। सिंघवी ने कहा कि विपक्षी दलों ने विकल्प के तौर पर कम से कम 30 प्रतिशत मतदान केंद्रों में वोटों की प्रमाणिकता की जांच के लिए ईवीएम में वीवीपैट मशीन लगाने का सुझाव दिया है। कांग्रेस ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाताओं की सूची से सभी डुप्लिकेट और झूठे मतदाताओं से बाहर निकलने की भी मांग की है।
कांग्रेस का कहना है कि मध्य प्रदेश की मतदाता सूचि में 60 लाख और राजस्थान की मतदाता सूची में 35 लाख डुप्लिकेट मतदाता हैं। दोनों ही राज्यों में इस साल के अन्त में चुनाव होंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि कुछ पार्टियों ने कहा कि फिर से बैलेट पेपर की ओर जाना वास्तव में बुरा है, क्योंकि यह बूथ कैप्चरिंग को वापस लाएगा और हम इसकी वापसी नहीं चाहते। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस, जनता दल सेकुलर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सहित अधिकतर गैर बीजेपी दलों ने चुनाव आयोग के समक्ष ईवीएम की जगह वैलेट पेपर से चुनाव कराये जाने की मांग रखी।
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