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BIHAR: गुप्तेश्वर पांडेय पर भारी पड़ गए उनके जूनियर ये पूर्व IPS, JDU ने इस सीट से दिया टिकट

Bihar Election 2020: बिहार के पूर्व IPS अधिकारी सुनील कुमार ने रिटायरमेंट के बाद जेडीयू की सदस्यता ली थी. अब पार्टी ने उनको गोपालगंज की भोरे सीट से टिकट दिया है.

BIHAR: गुप्तेश्वर पांडेय पर भारी पड़ गए उनके जूनियर ये पूर्व IPS, JDU ने इस सीट से दिया टिकट
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2020) को लेकर जेडीयू (JDU) ने अपने सभी 115 प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर दिया है. इस लिस्ट में जहां डीजीपी की नौकरी छोड़कर वीआरएस लेने वाले गुप्तेश्वर पांडेय (IPS Gupteshwar Pandey) का नाम गायब है, तो वहीं उनके ही जूनियर रहे बिहार के एक पूर्व आईपीएस अधिकारी का नाम शामिल है. उन्‍हें पार्टी ने टिकट दे दिया है. दरअसल गुप्तेश्वर पांडेय के साथ-साथ बिहार के पूर्व डीजी रहे आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार ने भी जदयू की सदस्यता ली थी.

31 जुलाई को सेवा से रिटायर हुए सुनील कुमार ने पटना में नीतीश कुमार की पार्टी का हाथ थामा था. अब उनको पार्टी ने गोपालगंज की भोरे सीट (सुरक्षित) से टिकट दिया है. सुनील कुमार की पहचान पटना के एसएसपी समेत कई जोन के डीआईजी और आईजी को लेकर रही है. नीतीश कुमार के करीबी रहे इस पूर्व आईपीएस ने बिहार में आईजी से लेकर एडीजी (पुलिस मुख्यालय) और डीजी (होमगार्ड), डीजी (अग्निशमन) समेत कई पदों पर रहे हैं.

बिहार की जिस सीट से सुनील कुमार को टिकट मिला है, उस पर उनसे पहले उनके बड़े भाई अनिल कुमार भी विधायक रह चुके हैं. अनिल कुमार एक बार जेडीयू और दूसरी बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने, लेकिन सीटिंग विधायक अनिल की ये सीट महागठबंधन में इस बार लेफ्ट के खाते में चली गई है, ऐसे में सुनील कुमार की राह आसान मानी जा रही है. दलित बिरादरी से आने वाले सुनील 1987 बैच के आईपीएस अफसर थे. पूर्व आइपीएस सुनील कुमार ने पुलिस भवन निर्माण निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) पद से सेवानिवृत्त होने के बाद 29 अगस्त को जदयू की सदस्यता ग्रहण की थी.

दूसरी ओर, 1987 बैच के ही आईपीएस अफसर रहे बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने बिहार की राजनीति में 11 साल पहले यानी 2009 में भी उतरने की कोशिश की थी. साल 2009 में आईजी रहते हुए उन्होंने वीआरएस लिया था और उस साल के लोकसभा का चुनाव भी वो बक्सर से ही लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिला था. बाद में उन्होंने वीआरएस वापस ले लिया था. इस बार भी इस पूर्व अधिकारी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है ऐसे में उनको माननीय बनने के लिए फिलहाल इंतजार करना होगा.

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