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योगी राज: देवरिया शेल्टर होम की संचालिका अब अपने वृद्धाश्रम को लेकर विवादों में, कमरों में ताले, तबेले में बुजुर्ग

देवरिया: यूपी के देवरिया में शेल्टर होम से लड़कियों के गायब होने और उनका यौन उत्पीड़न किए जाने के मामले में फंसी गिरिजा त्रिपाठी अब वृद्धाश्रम मामले में भी घिर चुकी हैं। गिरिजा त्रिपाठी मां विंध्यावासिनी संस्था के तहत वृद्धाश्रम भी चलाती हैं, जो शहर से कुछ दूर रजला में स्थित है। अब इस वृद्धाश्रम को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। वृद्धाश्रम की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी पर आरोप लगा है कि यहां रहने वाले बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में बने कमरों के बजाए तबेलों में रखती थी।
खबरों के मुताबिक, दो मंजिला वृद्धाश्रम में करीब 15 कमरे थे, लेकिन बुजुर्गों को इन कमरों में नहीं बल्कि आश्रम के बाहर बने तबेला में रखा जाता था। जांच में खुलासा हुआ है कि सरकार से वृद्धाश्रम में बने कमरों में बेड और गद्दे दिखाकर अनुदान लिया जाता था, लेकिन इन कमरों में हमेशा ताला लगा रहता था। इन तालों को छिपाने के लिए बकायदा पर्दें भी लगे हुए थे। इसी वजह से 22 बुजुर्गों की गुरुवार को हालत बिगड़ गई। बुजुर्गों की हालात बिगड़ने के बाद पूरा मामला सामने आया है। फिलहाल इस वृद्धाश्रम को सील कर दिया गया है।
देवरिया के रजला में स्थित वृद्धाश्रम की देखरेख गिरिजा त्रिपाठी का बेटा प्रदीप और बहू प्रियंका करते थे। इस वृद्धाश्रम को प्रति वृद्ध के हिसाब से रोज 75 रुपये का अनुदान मिलता है। अनुदान समाज कल्याण विभाग देता है। पुलिस ने प्रदीप को भी गिरफ्तार कर लिया है।दूसरी ओर बालिका बाल गृह से लड़कियों के गायब होने मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति होने के बाद भी प्रदेश सरकार अपनी भी जांच करा रही है। इस प्रकरण की जांच कर रही टीम के पांच सदस्य एडीजी के नेतृत्व में आज देवरिया पहुंचे हैं।प्रदेश सरकार ने इस प्रकरण में एडीजी क्राइम संजय सिंघल के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम देवरिया पहुंच गई है। टीम सबसे पहले डाक बंगले में पहुंची और संबंधित अधिकारी से जानकारी ली। इस टीम के सहयोग में एसटीएफ भी लगाई गई है।
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