Janskati Samachar

"गंदगी का दूसरा नाम राजनीति है"

गंदगी का दूसरा नाम राजनीति है
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गाँव में बने एक घास फूस की झोपड़ी के नीचे, जिसे हम गाँव वाले होटल कहते हैँ, रामखेलावन वर्मा अउर कल्लू मिशिर दूनो चाय पीते हुए, डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में बातचीत कर रहे थे । कुछ अउर लोग भी बैठे हुए थे वहाँ पर लेकिन इस समय रामखेलावन अउर कल्लू दूनो लोग फोम में थे एकदम । इनके आगे कोई कुछ बोल नहीं रहा था, सब बड़े ध्यान से चाय कि चुस्की लेते हुए इन दोनों को सुन रहे थे । हम भी वहीँ से जा रहे थे तो होटल पर गरमा गरम गोभी का पकौड़ा तलते देख कर सोचे कि दू ठो खा लें तब जाएँ । हम गए होटल में और रामनिवास काका जो कि होटल के मालिक थे उनसे बोले "काका एक पलेट गोभी पकौड़ा देना ।"



अब कहाँ होटल पर ट्रम्प कि नीतियों का गहन विश्लेषण चल रहा था ,और कहाँ हम बीच में गोभी का पकौड़ा घुसेड़ दिए ! सब लोग हमारी तरफ देखने लगे । खैर हमने भी शिष्टाचार दिखाते हुए अपने से उमरदराज लोगोँ को "पांय लागूँ " कहा और गोभी का पकौड़ा लेके बैठ गए । चर्चा फिर से शुरू होने ही वाली थी कि तभी होटल के मालिक रामू काका , जो कि ट्रंप की नीतियों पर हो रहे विश्लेषण से काफी पक चुके थे, ने टॉपिक बदलने का प्रयास किया और कल्लू मिशिर से पूँछा " मिसिर अबकी वोट का कुछ प्लानिंग किये,केहका दिया जाये वोट ?" मिसिर बोले " अब जेहका मन करे वोह को देदो , अउर का बताएँ हम ! वैसे भी सब चोर हैँ ससुरे, गंदगी जानते हो न , ई राजनीति शब्द गंदगी का पर्यायवाची है ।" कल्लू मिसिर के लास्ट वाले पंच "राजनीति गंदगी का पर्यायवाची है" सुनकर वहाँ बैठे सबलोग वाह वाह करने लगे । किसी ने कहा, "वाह मिसिर का बात कही है !"


तो ,कोनो चमचा टाइप इंसान बोल पड़ा "मिसिर आप क तो न्यू यॉर्क टाइम्स का संपादक पद दे दिया जाए तो भी कम है, इतना जबर बात बोले हो ।" अब मिसिर भी अपना बखान सुनकर दांत चियार दिए । लेकिन रामखेलावन जी को मिसिर की ये उपलब्धि थोड़ी खल गयी, फिर भी बेचारे चुप चाप बैठे रहे । ऐसे ही बात चीत हो रही थी कि तभी कल्लू मिसिर का फोन बजा । उन्होंने फ़ोन उठाया और कहा "तेवारी जी परनाम" । उधर से बात कर रहे व्यक्ति से हाल चाल पूँछा अउर फिर फोन पर उनसे कहने लगे " अरे वो बँटिया का मैटर देखा था आपने ?" मिसिर के चेहरे के मुस्कान को देखकर ऐसा लगा कि उधर से कुछ सकारात्मक खबर आयी और कल्लू मिसिर कहने लगे "बहुत बहुत धन्यवाद तेवारी जी, अच्छा अब रखिये घर पर जाकर बात करते हैँ ।"



कल्लू मिसिर जैसे ही फ़ोन रखे, रामखेलावन बोल पड़े "कौन तेवारी जी थे मिसिर ?" "अरे हमार बहनोई हैँ, लमहौरी वाले" मिसिर ने जवाब दिया । "अच्छा अच्छा, लेकिन ई बँटिया के कौन मैटर कि बात कर रहे थे आप ?" रामखेलावन ने फिर से सवाल दागा । "अरे उ बँटिया क पटवारी के नौकरी लगने वाला है, अउर हमारे बहनोई जी जिलापंचायत सदस्य हैँ, जाने माने नेता हैँ अपने जेंवार के, तो इनका थोड़ा जोर शिफारस लग जाता तो काम बन जाता , एहि से पूँछे थे ।" मिसिर ने उत्तर दिया । "मतलब कि गंदगी के छीटें आप पर भी पड़े हैँ ।" रामखेलावन वर्मा ने जोरदार पंच मारा ।



मिसिर बोखलाए , " का बोले वर्मा ? गंदगी के छीटें हमरे उपर , कैसे ?" "अरे आप ही तो बोले थे क़ि गंदगी का दूसर नाम राजनीति है, और फिर ,आप तो फा यदा भी उठा रहे हैं राजनीति वाले गंदगी का ।" राम खेलावन कुटिल मुस्कान के साथ बोले । रामखेलावन कि बात सुन के कुछ लोग अपनी हँसी न संभाल पाये अउर कल्लू मिसिर खिसिया कर वहाँ से उठ कर चल दिए । अब तक हम भी अपने प्लेट का पकौड़ा ख़तम कर चुके थे , रामू काका को पैसे दिए और वहाँ से यह सोचते हुए निकल लिए कि "वाकई राजनीति गंदगी का पर्यायवाची है।"


लेखक - शिवराम तिवारी "राघव शंकर"


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