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Janskati Samachar

ऑक्सिजन पर दो टूकः विजयन ने पीएम को खत लिख कहा- कोरोना से हम भी बेहाल नहीं दे सकते और ऑक्सिजन

विजयन ने कहा कि उनके पास अब 86 मीट्रिक टन ऑक्सिजन का ही बफर स्टॉक है। उनका सूबा अब तमिलनाडु को 40 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की सप्लाई ही कर पाएगा। ये 10 मई तक होनी है।

ऑक्सिजन पर दो टूकः विजयन ने पीएम को खत लिख कहा- कोरोना से हम भी बेहाल नहीं दे सकते और ऑक्सिजन
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ऑक्सिजन पर केरल के सीएम ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर दो टूक कह दिया है कि वो अब पड़ोसी राज्यों को और ज्यादा ऑक्सिजन नहीं दे सकते। उनका कहना है कि कोरोना से केरल भी बेहाल है, इसलिए फिलहाल वो ऑक्सिजन नहीं दे सकते।

विजयन ने कहा कि उनके पास अब 86 मीट्रिक टन ऑक्सिजन का ही बफर स्टॉक है। उनका सूबा अब तमिलनाडु को 40 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की सप्लाई ही कर पाएगा। ये 10 मई तक होनी है। सेंट्रल कमेटी ऑफ ऑक्सिजन एलोकेशन के छह मई के निर्देश को पूरा करने के बाद वह अब और ऑक्सिजन सप्लाई नहीं कर पाएंगे। पीएम को खत में उन्होंने कहा कि इसके बाद उनके लिए सूबे से बाहर ऑक्सिजन की खेप भेज पाना बेहद मुश्किल होगा।

केरल में बुधवार को ही कोरोना वायरस के अब तक के सबसे अधिक केस सामने आए हैं। राज्य में बुधवार को 41,935 मामले सामने आए। सूबे में 58 लोगों की मौत हुई है। विजयन का कहना है कि उनके यहां वर्तमान में 4 लाख 2 हजार 640 एक्टिव मामले हैं। 15 मई तक ये आंकड़ा 6 लाख तक पहुंचने के आसार हैं। उन्हें अपने राज्य के लोगों के लिए ही 15 मई तक 450 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की जरूरत होगी। ऐसे में वो दूसरे राज्यों की मदद कर पाने में असमर्थ होंगे।

विजयन ने लिखा- पलक्कड़ के प्लांट की क्षमता 150 मीट्रिक टन ऑक्सिजन के उत्पादन की है। दूसरे छोटे प्लांटों को मिला दें तो सूबा 219 मीट्रिक टन ऑक्सिजन का उत्पादन कर पा रहा है। उनके पास 450 मीट्रिक टन ऑक्सिजन का बफर स्टॉक था। विजयन ने इसके साथ ही बढ़ते मामलों को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर पीएम से ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स, वेंटिलेटर्स और अन्य उपकरण मुहैया कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि अब केरल उस स्थिति में पहुंच चुका है जब उसे दूसरों की मदद की जरूरत है।

सीएम ने कहा कि उन्हें केंद्र से मदद की दरकार है, क्योंकि कोरोना बहुत तेजी से उनके यहां अपने पैर फैला रहा है। गौरतलब है कि विजयन ने सभी अस्पतालों के लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी किए हैं। कोरोना मरीजों की बड़ती संख्या के मद्देनजर वो लगातार सिस्टम को चाकचौबंद करने में लगे हैं।

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