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Abrar Ahmed MLA Biography In Hindi | अबरार अहमद विधायक का जीवन परिचय

Abrar Ahmed MLA Biography In Hindi | समाजवादी पार्टी के विधायक अबरार अहमद का सियासी सफर खूब रहा है। कभी एक छोटी सी कोठरी में इनका गुज़ारा होता था। कुछ समय बाद इन्होंने 1995 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और विजयी हुए।

Abrar Ahmed MLA Biography In Hindi | अबरार अहमद विधायक का जीवन परिचय
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Abrar Ahmed MLA Biography In Hindi | अबरार अहमद विधायक का जीवन परिचय

Abrar Ahmed MLA Biography In Hindi | समाजवादी पार्टी के विधायक अबरार अहमद का सियासी सफर खूब रहा है। कभी एक छोटी सी कोठरी में इनका गुज़ारा होता था। कुछ समय बाद इन्होंने 1995 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और विजयी हुए।

पूरा नाम अबरार अहमद

निर्वाचन क्षेत्र - 187, इसौली

जिला - सुल्तानपुर,

दल - समाजवादी पार्टी

पिता का नाम स्व0 रफातउल्ला

जन्‍म तिथि 08 नवम्बर, 1950

जन्‍म स्थान अझुई (सुल्‍तानपुर)

धर्म इस्लाम

जाति मुस्लिम (खान)

शिक्षा साक्षर, दीनी तालीम धार्मिक शिक्षा

विवाह तिथि 07 जनवरी, 1978

पत्‍नी का नाम श्रीमती अजमतुलनिशां

सन्तान एक पुत्र, एक पुत्री

व्‍यवसाय कृषि

मुख्यावास ग्राम-अझुई, पोस्ट-हसनपुर, थाना-कोड़वार, जिला-सुल्तानपुर।

अस्थाई पता बी0 601, मंत्री आवास बहुखण्डी भवन, डालीबाग, जनपद-लखनऊ ।

मोबाइल नं0 8887150987, 8765954886

राजनीतिक योगदान

  1. 2012, मार्च सोलहवीं विधान सभा के सदस्‍य पहली बार निर्वाचित
  2. 2012- 2013 सदस्‍य, आचार समिति (एथिक्‍स कमेटी)
  3. 2017, मार्च सत्रहवीं विधान सभा के सदस्‍य दूसरी बार निर्वाचित
  4. विशेष अभिरूचि समाज सेवा, राजनीति तथा शैक्षिक कार्य, काव्‍य पाठन एवं मुशायरा।

अन्‍य जानकारी

अध्यक्ष, रामरहीम कन्या इण्टर कालेज, नौगावाँ रायतासी, सुल्तानपुर (2003-04 से), आजीवन संरक्षक, रजा मेमो0 स्कूल, नौगावाँ रायतासी, सुल्तानपुर, सदस्य, टी0एन0एम0एस0 संस्थान, सुल्तानपुर (2007) दिनांक 20 अगस्त 1976 को मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने को लेकर संघर्ष किया, दिनाँक 24 अगस्त, 1976 तक इमरजेन्सी व जबरन नसबन्दी के विरोध में पुलिस तथा पीएसी द्वारा जनता पर बर्बरता से लाठीचार्ज व गोली चली जिसमें 10 आदमी की मृत्यु हुई तथा प्रार्थी के दोनो हाथ पैर सघर्ष में टुट गये, लोकदल में रहतें हुए जनसंघर्ष में एक सप्ताह तथा राजभवन के घेराव वर्ष 1991 में मा0 मुलायम सिंह के नेतृत्व में तथा बाबरी मस्जिद बचानें में वर्ष 1992 में फैजाबाद कारागार में बंदी रहें, जनपद सुल्तानपुर के सरकारी चिकित्सक व सर्जन तथा निजी चिकित्सालय के संचालको की मिटिंग बुलाकर महीने में एक दिन निःशुल्क परामर्श, सर्जरी व दवाए दिलवाने का अभियान खासकर गरीब मरीजों हेतु चलवाया गया तथा समाज द्वारा सराहा गया ।

विधान सभा से पहली बार समाजवादी लहर में विधायक बने अबरार अहमद की कहानी बिल्कुल ख़्वाब सरीखी है। जी एक वक़्त ऐसा भी था जब विधायक जी को लोग इनकी सादगी और बेबाक अंदाज के लिए जानते थे और आज अपनी बदजुबानी और लाइफ स्टाइल के लिए जाने जाते हैं।

Abrar Ahmed MLA Biography In Hindi | अबरार अहमद विधायक का जीवन परिचय

विधायक अबरार अहमद का सियासी सफर काफी दिलचस्प रहा है कभी एक छोटी सी कोठरी में इनका गुज़ारा होता था , और क्षेत्र के लोग इनकी आर्थिक मदद के गाहे बगाहे कर दिया करते थे। कुछ समय बाद इन्होंने 1995 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और विजयी हुए। उस समय की जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं जानकी पाल को अध्यक्ष बनाने में अहम रोल निभाया। 2011 के पंचायत चुनाव में दूसरी बार जिला पंचायत सदस्य बने। बस यहीं से कहानी में मोड़ आना शुरू हुआ।

सदस्य चुने जाने के दौरान बसपा समर्थित प्रत्याशी सीताराम वर्मा को वोट कर दिया जबकि समाजवादी पार्टी ने भी अपना कैंडिडेट उतारा था। उस समय लोगों ने दबी ज़ुबान में बताया कि, अबरार अहमद ने नोट के बदले वोट का पालन किया।

2012 के विधान सभा में सपा ने घोषित किया उम्मीदवार

सूबे के कद्दावर समाजवादी नेता से अबरार अहमद की काफी नज़दीकियां जगजाहिर है ऐसे में विधान सभा के चुनाव में अबरार अहमद सपा से इसौली का टिकट झटकने में कामयाब रहे और विधान सभा सदस्य निर्वाचित हुए। इसौली विधान सभा को मुस्लिम बाहुल्य माना जाता है। बहरहाल ये तो था विधायक का सियासी सफर।

कैसे पहुंचे फर्श से अर्श पर

गुरबत की जिंदिगी जीने वाला शख्स अचानक से महलों में रहने लगा। कई गाड़ियों के काफिले में चलने लगा। महंगे मोबाइल (जिसकी कीमत लाखों में बताई जाती गई) जो विधायक जी अपने साथ लेकर चलते है और ऐसे ही न जाने क्या क्या और सबसे अहम खुलासा पत्रिका का की कभी विधायक जी बी पी एल कार्ड धारक भी हुआ करते थे तो आज कौन सा कारून का खज़ाना लग गया की विधायक जी करोड़ों के आदमी हो गए तो क्या विधयाक जी इसौली की उस ग़रीब जनता का हक तो नहीं मार रहे हैं इसकी पड़ताल की गई तो हकीकत सामने थी।

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