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योगी सरकार बनाम अखिलेश सरकार : योगी सरकार के 100 दिन में 622 हत्या और 790 बलात्कार: देखिये अपराधिक आंकड़े

योगी सरकार बनाम अखिलेश सरकार  : योगी सरकार के 100 दिन में 622 हत्या और 790 बलात्कार: देखिये अपराधिक आंकड़े
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लखनऊ: योगी सरकार के सौ दिन गुजर चुके हैं। बीते मंगलवार को 100 दिन की तमाम उपलब्धियों के बखान करने के दौरान कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ ने चुप्पी साधे रखी। हो भी क्यों ना की योगी सरकार कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पूरी तरह फेल हो चुकी है। आप को बता दें की अखिलेश सरकार के शुरुआती सौ दिन के मुकाबले योगी सरकार के सौ दिन में अपराध का ग्राफ जबरदस्त उछला है। प्रदेश में हत्या, बलात्कार, सांप्रदायिक हिंसा और यौन हिंसा की घटनाएं बेखौफ हुई हैं। लगातार चरमराती कानून-व्यवस्था पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया तो पुलिस ने मुकदमा लिखने से परहेज करना शुरू कर दिया। इस रवैये की शिकायत सीएम तक पहुंच चुकी है। बहरहाल, अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जल्द ही योगी सरकार प्रदेश में सुरक्षा सलाहकार को तैनात करने पर विचार कर रही है।


योगी सरकार के 100 दिन में 622 हत्या और 790 बलात्कार

19 मार्च 2017 से 26 जून 2017 यानी योगी सरकार के सौ दिन। इस मियाद में प्रदेश में कुल 22297 मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि अखिलेश यादव सरकार के शुरुआती सौ दिन में प्रदेश में 13062 मुकदमे दर्ज हुए थे। योगी सरकार के कार्यकाल में मुकदमों की संख्या बढ़ी है, इसके साथ ही गंभीर अपराधों के मामले भी ज्यादा सामने आए हैं। योगी सरकार के शुरुआती दिनों में डकैती और अपहरण जैसी वारदात कम हुई हैं, लेकिन हत्या, बलात्कार और सांप्रदायिक हिंसा-तनाव की घटनाएं ज्यादा हुई हैं।


मुकदमा लिखने से परहेज करने लगी यूपी पुलिस

अपराध का ग्राफ बढ़ा तो सीएम ने डीजीपी सुलखान सिंह से नाराजगी जताते हुए कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए कहा। इस फटकार का नतीजा यह हुआ कि पुलिस ने आंकड़े दुरुस्त करने के चक्कर में मुकदमा लिखने से परहेज करना शुरू कर दिया। उदाहरण के तौर पर लखनऊ जोन में बीते एक महीने में डकैती की आठ वारदात हुईं, लेकिन यूपी पुलिस की क्राइम मैपिंग के मुताबिक डकैती की सिर्फ पांच वारदात हुई हैं। इसी प्रकार हत्या के प्रयास के 20 मामलों को मारपीट की धाराओं में दर्ज किया गया। मुकदमों से परहेज के मामले में वाराणसी जोन की पुलिस सबसे आगे खड़ी नजर आती है। इसी तरह डीजीपी सुलखान सिंह की एक रिश्तेदार की रिपोर्ट लिखने से औरैया पुलिस ने इंकार कर दिया था। महिला ने अपना परिचय भी बताया तो थानेदार ने टरकाते हुए कहाकि था कि यहां तो रोजाना डीजीपी के रिश्तेदार आते हैं। इस हरकत की जानकारी होने पर डीजीपी आफिस ने सख्त रुख अपनाया था। मामले की जांच के आदेश जारी करने के साथ ही औरैया पुलिस अधीक्षक ने महिला को बुलाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।


शिकायतों से परेशान, एसएसपी आफिस में एफआईआर सेल बनानी पड़ी

मुकदमों से परहेज की शिकायतों का अंबार लगा तो मुख्यमंत्री को दखल देना पड़ा। बीते सप्ताह प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार ने डीजीपी सुलखान सिंह के साथ-साथ जोनल अपर पुलिस महानिदेशक, परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक, डीआईजी और समस्त जिलों के पुलिस कप्तानों को भी निर्देश की कॉपी भेजकर 15 दिन में ऑनलाइन एफआईआर काउंटर खोलने को कहा है। सरकार ने डीजीपी से आदेश पर अमल के बाद सभी जिलों की वास्तुस्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। किसी जिले की स्पेशल सेल में एफआईआर दर्ज नहीं होने की शिकायत आई तो संबधित जिले के एसएसपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

शुरुआती 100 दिन: योगी सरकार बनाम अखिलेश सरकार

हत्या- 622 --------- 408

हत्या के प्रयास - 1091---------832

बलात्कार - 790---------374

अपहरण -
1973--------2169

यौन शोषण - 3507-------1587

दंगे/सांप्रदायिक तनाव- 1459 --------956

(आकड़े एनसीआरबी तथा यूपी क्राइम मैपिंग के अनुसार)

अखिलेश सरकार के पहले साल में अपराध का इतिहास

हत्या - 4966, हत्या के प्रयास - 4811, बलात्कार - 1963, दंगा और सांप्रदायिक तनाव - 5676, अपहरण - 8878, डकैती - 322, यौन शोषण - 3255 (आंकड़े एनसीआरबी के अनुसार)


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