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इन बड़ी पार्टियों ने चुनाव आयोग से गुहार लगाई, अभी न छीनें राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा

नई दिल्ली: हालिया लोकसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद तृणमूल कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। दरअसल चुनाव आयोग ने इन पार्टियों को राष्ट्रीय दर्जा हटाने संबंधी नोटिस भेजा है। इस नोटिस के जवाब में इन पार्टियों ने चुनाव आयोग से गुहार लगायी है कि साल 2024 के लोकसभा चुनावों तक उनसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा ना छीनने की गुहार लगायी है। बता दें कि ये पार्टियां राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे की न्यूनतम योग्यता खो चुके हैं। चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की टीएमसी, सीपीआई और एनसीपी को बीती 18 जुलाई को एक नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों नहीं इन पार्टियों का राष्ट्रीय दर्जा छीन लिया जाए?
चुनाव आयोग के इस नोटिस का जवाब देने की आखिरी तारीख 5 अगस्त थी। पता चला है कि अपने जवाब में इन पार्टियों ने राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज को आगामी 2024 को लोकसभा चुनावों तक जारी रखने का आग्रह किया है। टीएमसी ने अपने जवाब में कहा है कि उनकी पार्टी को साल 2016 में ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला है और उन्हें साल 2024 के आम चुनावों तक यह दर्जा दिया जाए। अपने जवाब में टीएमसी ने तर्क दिया है कि साल 2014 के आम चुनावों में बसपा, सीपीआई और एनसीपी अपना राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खो चुकी थीं, लेकिन आयोग ने दो चुनाव चक्र के बाद इनके राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे का रिव्यू करने का फैसला किया था। ऐसे में टीएमसी को भी दो चुनाव चक्र पूरा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
सीपीआई ने भी अपने जवाब में कहा है कि हम देश की सबसे पुरानी पार्टियों में से एक हैं और हमने देश की आजादी की लड़ाई में भी हिस्सा लिया है। ऐसे में फिलहाल हमारा राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखा जाए। बता दें कि यदि चुनाव आयोग इन पार्टियों का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा समाप्त करता है तो फिर देश में सिर्फ भाजपा, कांग्रेस, नेशनल पीपल्स पार्टी, सीपीएम और बसपा ही राष्ट्रीय पार्टियां रह जाएंगी। क्या है राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने की योग्यताः चुनाव आयोग के अनुसार, एक राष्ट्रीय पार्टी को न्यूनतम 4 राज्यों में 6% वोट मिलने जरुरी हैं या फिर तीन राज्यों में पार्टी को आम चुनावों में कुल 2% सीटें मिलना जरुरी है, या फिर पार्टी किन्हीं चार राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा रखती हो।
एनसीपी, टीएमसी और सीपीआई इस समय एक भी शर्त को पूरा नहीं कर रही हैं। क्या होगा नुकसान राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिनने पर: यदि टीएमसी, एनसीपी और सीपीआई से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छीन लिया जाता है तो फिर पार्टी पूरे देश में एक ही कॉमन सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ सकेगी और सिर्फ जिस राज्य में उसे क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा है, वहीं पर वह अपने सिंबल पर चुनाव लड़ सकेगी।
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