किसान दिवस के दिन भी किसानों का आंदोलन जारी, देशवासियों से की अपील- न बनाएं दोपहर का खाना

जनशक्ति: तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। वहीं आज किसान दिवस भी है और दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनरत किसानों ने देश के नागरिकों से बुधवार 23 दिसंबर को अपना दोपहर का भोजन छोड़ने का आग्रह किया है। बता दें कि केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले 28 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच एक तरफ आज पूरा देश 'राष्ट्रीय किसान दिवस' मना रहा है तो दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन ने एलान किया है कि आज हम एक टाइम का खाना नहीं खाएंगे। किसान संगठनों ने लोगों से अनुरोध किया है कि वह आज दोपहर का भोजन न पकाएं। किसान दिवस हर साल 23 दिसंबर को देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जन्मदिन पर मनाया जाता है।

अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा, "मंगलवार (22 दिसंबर) को अडानी और अंबानी आउटलेट्स के पास मुंबई में आयोजित रैलियों के बाद, किसानों ने अपने बहिष्कार अभियानों को तेज करने और 26 दिसंबर को सार्वजनिक समर्थन प्राप्त करने की योजना बनाई।" उन्होंने जोर दिया कि जब तक सरकार उनकी मांगों को सुनने की इच्छा नहीं दिखाती है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। "अब तक, सरकार ने हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया है, जो पिछले सात महीनों से अपरिवर्तित है। दूसरी ओर सरकार मीडिया की मदद से किसानों पर अपना एजेंडा लागू करने की कोशिश कर रही है। " वहीं किसान लोगों से अपना दोपहर का भोजन छोड़ने का अनुरोध करके अपने आंदोलन में सार्वजनिक भागीदारी की मांग कर रहे हैं।


उधर सरकार से मिले नए पत्र का आंदोलनकारी किसानों ने अब लिखित जवाब देने का निर्णय किया है। किसान दिवस पर सरकार को जवाब सौंपने की तैयारी है। मंगलवार को पंजाब के आंदोलनकारी किसान संगठनों ने घंटों मैराथन मंथन के बाद लिखित जवाब के कई बिंदुओं पर चर्चा की। जवाब का खाका भी तैयार कर लिया। इस पर संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े देश के अन्य किसान संगठनों से बुधवार को निर्णायक बैठक में अंतिम मंत्रणा होगी। सरकार को भेजे जाने वाले जवाबी पत्र पर मुहर लगते ही किसान दिवस पर ही सरकार को जवाब सौंपा जा सकता है।

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