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नासिक से मुंबई 180 KM लंबी रैली निकाल रहे किसान, कल यहां करेंगे शक्ति प्रदर्शन

किसानों की रैली को पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री और एनसीपी प्रमुख शरद पवार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोराट और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे संबोधित करेंगे।

नासिक से मुंबई 180 KM लंबी रैली निकाल रहे किसान, कल यहां करेंगे शक्ति प्रदर्शन
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मुंबई: केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आन्दोलन आज 60वें दिन भी जारी है। स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव ने पुलिस के साथ हुई बैठक के बाद कहा, "दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ आज एक छोटी बैठक हुई। हमें ट्रैक्टर रैली के लिए इजाज़त मिल गई है। जैसा मैंने पहले कहा था, 'किसान गणतंत्र परेड' 26 जनवरी को शांतिपूर्वक तरीके से होगा। हम दिल्ली नहीं दिल जीतने आ रहे हैं। दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने लिखित में मंज़ूरी के आदेश जारी किए हैं। पुलिस ने परेड को लेकर अलर्ट भी जारी किया है।

180 किमी लंबी रैली के साथ किसानों का काफिला बढ़ रहा आगे

26 जनवरी को 'किसान गणतंत्र परेड' के शामिल होने के लिए आज ऑल इंडिया किसान सभा के बैनर के तले बड़ी संख्या में किसान नासिक से मुंबई की तरफ रवाना हुए। 180 किमी लंबी रैली के साथ उनका काफिला धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। सोमवार 25 जनवरी को मुंबई के आजाद मैदान में किसान जमा होंगे। पहले यहां पर उनका शक्ति प्रदर्शन होगा। उसके बाद 26 जनवरी को दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली होगी।

किसानों की रैली को देश के कई बड़े नेता करेंगे सम्बोधित

अभी तक जो जानकारी निकलकर सामने आई है। उसके मुताबिक इस रैली का नेतृत्व अखिल भारतीय किसान सभा कर रहा है। इस रैली को देश के बड़े नेता, जिसमें पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री और एनसीपी प्रमुख शरद पवार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोराट और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे का नाम है। ये तमाम नेता संबोधित करेंगे। इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को एक ज्ञापन भी सौंपेगा।

26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च के लिए रूट मैप पर दिल्ली पुलिस और किसान नेताओं के बीच आम सहमति बन गई है। दिल्ली में किसानों के ट्रैक्टर मार्च पर शाम 4:30 बजे दिल्ली पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। किसानों ने रूट मैप दिल्ली पुलिस को सौंप दिया है।

क्या बोले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा है कि उन्हें दुख है कि किसान सिर्फ कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग करते हैं, जबकि इसके फायदों पर चर्चा भी नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि कोई अदृश्य ताकत है जो चाहती है कि ये मसला हल नहीं हो। जब उनसे उन ताकतों का नाम पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा। नरेंद्र तोमर ने कहा कि बातचीत के अगले ही दिन किसानों का सुर बदल जाता है।

सरकार किसानों से बातचीत के लिए हमेशा तैयार है। जब किसान पंजाब में रेल की पटरियों पर आंदोलन कर रहे थे, तभी से प्रयास हैं कि उनकी समस्या का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाये। सरकार ने इस बात का भी पूरा ध्यान रखा है कि इस आंदोलन में किसानों की प्रतिष्ठा को किसी प्रकार का आघात न लगे।

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